RRB-NTPC और अग्निवीर हिंसा में एक ही ग्रुप शामिल!:700 की पहचान, ADG बोले- FIR हुई तो अग्निपथ क्या किसी पथ लायक नहीं बचेंगे

पटना5 महीने पहले

बिहार में केंद्र सरकार की योजना अग्निपथ के विरोध में हिंसा करने वालों की पहचान होने लगी है। इसमें शामिल वही ग्रुप है, जो छह महीने पहले जनवरी महीने में RRB और NTPC में वेकैंसी को लेकर उग्र प्रदर्शन किया था। मोबाइल टॉवर लोकेशन के आधार पर 700 लोगों की पहचान पुलिस ने किया है। हिंसा पर ADG लॉ एंड ऑर्डर संजय सिंह ने कहा कि FIR हुई तो अग्निपथ क्या किसी भी पथ के लिए भविष्य नहीं बचेगा। इसलिए बेहतर होगा कि युवा कानून को अपने हाथ में न लें।

बिहार पुलिस मुख्यालय के एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि करीब 6 महीने के अंतराल पर हुए इन दोनों ही विरोध-प्रदर्शन में एक कॉमन बात सामने आई है। अग्निपथ में शामिल लोग जनवरी महीने में RRB और NTPC के विरोध-प्रदर्शन में शामिल थे, उनमें से अधिकांश लोग वर्तमान के प्रदर्शन में भी शामिल हैं। इनके निशाने पर भारतीय रेलवे ही होती है, जो ट्रेनों को अपना निशाना बनाते हैं। ट्रेन की कोचों में आग लगाते हैं।

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700 लोगों की इस तरह पहचान

वीडियो फुटेज और कई इलाकों के डंप कराए गए मोबाइल टावर डेटा से यह स्पष्ट हुआ है। इसके जरिए करीब 700 उपद्रवियों की पहचान की गई है। पुलिस मुख्यालय समस्तीपुर, दानापुर, आरा, बक्सर, लखीसराय सहित कई जगहों पर नजर रख रहा है। अब इन नंबरों को सत्यापित कर संबंधित व्यक्ति तक पहुंचने की तैयारी में पुलिस टीम जुट गई है।

हाई लेवल की मीटिंग

अफसर के मुताबिक जिस तरह से यह बात सामने आई है, उससे यह लगता है कि एक ऐसा गैंग एक्टिव है जो उपद्रव के लिए मौके के इंतजार में रहता है। इस पॉइंट पर पुलिस अधिकारियों के हुए हाई लेवल मीटिंग पर चर्चा भी हुई है। अब इस पॉइंट पर जांच आगे बढे़गी। सवाल यह कि ये लोग हैं कौन? क्यों ऐसा कर रहे हैं? इन्हें किसका संरक्षण प्राप्त है? किसके इशारे पर ट्रेनों के कोच में आग लगा रहे हैं?

बड़ा सवाल- क्या खुफिया तंत्र फेल हुआ

जिस हिंसक तरीके से उपद्रव किया गया है, उसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। खुफिया जानकारी जुटाने वाली एजेंसियों से लेकर पुलिस तक को इस बड़े आंदोलन की भनक तक नहीं थी। बुधवार और गुरुवार के विरोध-प्रदर्शन के बावजूद इन्हें एहसास नहीं था कि शुक्रवार को गुस्साए युवाओं का विरोध-प्रदर्शन और विकराल रूप ले लेगा।

तीन दिनों से लगातार चल रहे इस आंदोलन पर किसी प्रकार का कोई इनपुट नहीं होना सीधे तौर पर इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और बिहार पुलिस की स्पेशल ब्रांच की कार्यशैली बड़े सवाल खड़ा करती है। सूत्र बताते हैं कि इन दोनों ही एजेंसियों के पास किसी प्रकार का कोई अनुमान नहीं था। ये एक बहुत बड़ा इंटेलिजेंस फेल्योर है। IB में तो पटना से लेकर दिल्ली तक में खलबली मची हुई है।

अनुमान से ज्यादा थी उपद्रवियों की भीड़
गुरुवार को ही बिहार पुलिस के ADG लॉ एंड ऑर्डर संजय सिंह ने कहा था कि भोजपुर, बक्सर, सारण सहित जिन जिलों में सेना बहाली के लिए लोग सबसे अधिक तैयारी करते हैं, वहां एक्सट्रा फोर्स दिए गए हैं। जगह-जगह पुलिस फोर्स की तैनाती भी की गई है। मगर, इनकी तैनाती कम पड़ गई। शुक्रवार को पुलिस का सारा अनुमान फेल हो गया।

जिन जगहों पर भी पुलिस के एक्स्ट्रा फोर्स की तैनाती हुई, उनकी संख्या से कहीं अधिक अग्निपथ योजना का विरोध करने वाले युवाओं की भीड़ पहुंच गई। इनके सामने पुलिस की टीम काफी छोटी पड़ गई थी। यही वजह कि इन पर काबू पाने में और रेल रूटों को पूरी तरह से क्लियर कराने में करीब 12 घंटे का वक्त लगा।

ऐसे लोगों को भविष्य में नहीं मिलेगा कोई बेनिफिट्स
ADG लॉ एंड ऑर्डर संजय सिंह ने बताया कि गुरुवार को हुए हिंसक उपद्रव और सरकारी संपत्तियों को पहुंचाए गए मामले में राज्य के अंदर कुल 31 FIR दर्ज हुई और 435 गिरफ्तारी हुई।

इसमें गुरुवार के उपद्रव पर 24 FIR व 125 गिरफ्तारी की गई। इनके अनुसार आज हुए उपद्रव के मामले में भी कानूनी कार्रवाई होगी। वीडियो फुटेज और फोटो के आधार पर पहचान कर उपद्रव करने वालों को गिरफ्तार किया जाएगा। इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी। पूरी कोशिश होगी भविष्य में ऐसे लोगों को कोई बेनिफिट्स नहीं मिले।

FIR हुई तो अग्निपथ क्या किसी भी पथ के लिए भविष्य नहीं बचेगा। इसलिए बेहतर होगा कि युवा कानून को अपने हाथ में न लें। इस मामले में बिहार पुलिस ने अब तक जो कार्रवाई की है, वो पूरी तरह से बंधे हाथों के बीच की है। क्योंकि, उपद्रवियों के खिलाफ खुलकर एक्शन नहीं लिया गया, यह साफ तौर पर दिखा है।

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