घरों से बाहर नहीं आई कोरोना की पॉजिटिव रिपोर्ट:ऑनलाइन आ रही किट, लोग घर में जांच कर दबा ले रहे रिपोर्ट; विभाग डेटा से वंचित

पटना10 दिन पहले
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बिहार में अधिक संख्या में कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट घरों में दबा ली जा रही है। ऑनलाइन रैपिड एंटीजन किट मंगाकर की जा रही जांच का डेटा स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। मेडिकल स्टोर से लेकर ऑनलाइन बाजार में मिलने वाली कोरोना के रैपिड एंटीजन की जांच रिपोर्ट घरों में कैद होने से संक्रमण का आंकड़ा भी हवा में है। यह बड़े विस्फोट का कारण बन सकता है, क्योंकि दूसरी लहर में ऐसे ही प्राइवेट पैथोलॉजी ने खेल किया था, जिसके बाद कोरोना का बड़ा विस्फोट हुआ।

सरकार के पास नहीं है कोई डेटा
कोरोना की जांच किट मेडिकल स्टोर से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आसानी से मिल रही है। ऑनलाइन में 398 रुपए में दो रैपिड एंटीजन किट मिल रही है। इसके लिए कोई पर्सनल जानकारी भी नहीं देनी पड़ रही है। माय लैब कोविसेल्फ के साथ अन्य कई ब्रांड के किट ऑनलाइन आसानी से मिल रहे हैं। वहीं, कोविफाइंड की किट 1237 की है। जिसमें 5 लोगों की जांच हो सकती है। कंपनी का दावा है कि इसको ICMR ने इसे अप्रूव्ड किया है। कोविफाइंड का 494 रुपए वाले पैक में दो किट है। वहीं, पनिबो कोविड-19 की जांच किट 249 की है। वहीं, मेडिकल स्टोर में 250 रुपए में किट मिल जा रही है। जांच में कोई टेक्निकल मामला नहीं होने से लोग आसानी से ही जांच कर ले रहे हैं। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव भी आ रही है तो वह इसकी जानकारी नहीं दे रहे हैं। होम आइसोलेशन में दवाएं लेकर वह खुद से कोरोना का इलाज कर रहे हैं।

रैपिड किट को लेकर भी गाइडलाइन
कोरोना जांच की रैपिड एंटीजन किट को लेकर भी गाइडलाइन है और कंपियों ने इसके लिए व्यवस्था भी बनाई है। जांच के लिए एक केमिकल दिया गया और एक स्लाइड है। नाक का स्वाब लेकर केमिकल में मिलाने के बाद उसे स्लाइड पर डालना होता है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मोबाइल में एप डाउनलोड कर पैक पर दिए स्कैन बार की मदद से रिपोर्ट निकालना होता है। रिपोर्ट निकालने के बाद जानकारी मिल जाती है, लेकिन लोग रिपोर्ट नहीं निकाल रहे हैं। वह बस केवल इतना जांच रहे हैं कि निगेटिव हैं या पॉजिटिव हो गए। इसके बाद विभाग काेई जानकारी नहीं दी जा रही है। औषधि विभाग के अधिकारियों को भी यह नहीं पता कि बाजार में कितनी किट है। ऑनलाइन से कितनी किट आ रही है, इसका भी कोई पता नहीं चल रहा है।

रिपोर्ट पॉजिटिव आए, तो दें सूचना
मेडिकल स्टोर से मिली जानकारी के मुताबिक लोग अधिक संख्या में किट ऑनलाइन ही मंगा रहे हैं। वह मेडिकल स्टोर से भी कम ले रहे हैं। ऑनलाइन में किसी को पता नहीं चल रहा है और पैसा भी कम लग रहा है। सहायक औषधि नियंत्रक का कहना है कि टेस्टिंग की गाइडलाइन है किसी को भी पॉजिटिव होने की जानकारी हो वह खुद आइसोलेट कर ले और इसकी सूचना विभाग को दे दे जिससे निगरानी की जा सके। कंट्रोल को सूचना के बाद संक्रमित की निगरानी हो जाती है और दवाएं भी मिल जाती हैं। औषधि विभाग ने लोगों से अपील की है कि वह घरों में जांच करते हैं तो जो भी रिपोर्ट आती है तत्काल उसे कंट्रोल रूम को बताएं। इससे संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सकता है और सरकार को पॉजिटिव और एक्टिव केस के बारे में भी जानकारी मिल जाती है।

एक दिन में 5 हजार से अधिक किट बिक रही
पटना के GM रोड मेडिकल होलसेल मंडी से एक दिन में 5 हजार से अधिक मेडिकल किट बिक रही है। बोरिंग रोड, कैनाल रोड, राजीव नगर, गांधी मैदान, अशोक राजपथ, राजा बाजार, आशियाना रोड, दीधा एरिया में थोड़ी डिमांड अधिक है। अशोक मेडिकल के अशोक कुमार का कहना है कि 250 रुपए से लेकर 450 रुपए तक की किट है, एक दिन में 4 से 7 किट बिक जाती है। हालांकि पटना केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोशिएशन के संतोष कुमार का कहना है कि कोरोना की जांच किट दो तीन कंपनियों की बिक रही है, लेकिन लोग ऑनलाइन अधिक मंगा रहे हैं। फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के बिहार अध्यक्ष अशोक वर्मा सोनार का कहना है कि ऐसे मेडिकल किट का ऑनलाइन आना बड़ा खतरा है। सरकार को इस पर कोई कदम उठाना चाहिए, अगर लोग ऑनलाइन किट मंगाकर घर में जांच कर रह जएंगे तो इसका बड़ा रिएक्शन देखने को मिलेगा। ऐसे सामानों की ऑनलाइन बिक्री बंद करनी चाहिए।

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