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फ्री ही अच्छा:महाराष्ट्र के निजी अस्पतालों ने 1 करोड़ डोज़ खरीदे, बिहार में जो खरीदना भी चाहते थे वह न्यूनतम 6000 डोज की बंदिश से ठिठके

पटना4 महीने पहलेलेखक: गिरिजेश
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60 अस्पताल खरीदना चाहते थे टीका, 10 ने भेजा ऑर्डर। - Dainik Bhaskar
60 अस्पताल खरीदना चाहते थे टीका, 10 ने भेजा ऑर्डर।
  • रिपोर्ट: बिहार के निजी अस्पतालों ने कोविशील्ड-कोवैक्सीन नहीं खरीदी
  • हकीकत: सरकारी में फ्री थी, इसलिए 1250 डोज की डिमांड ही भेजी गई

06 अगस्त को लोकसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री मनसुख मंडाविया ने एक सवाल के जवाब में आंकड़ा दिखाया था कि बिहार के निजी अस्पतालों ने मई से 03 अगस्त तक एक भी डोज कोवैक्सीन या कोविशील्ड नहीं ली। महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 1 करोड़ से ज्यादा डोज का दिखा। भास्कर ने इन आंकड़ों की पड़ताल शुरू की तो सामने आया कि जहां कोविशील्ड के लिए न्यूनतम 6 हजार और कोवैक्सीन के लिए 1 हजार डोज़ का ऑर्डर देना जरूरी था, वहां पूरे बिहार के 10 निजी अस्पतालों से महज 1250 डोज का ऑर्डर गया।

न्यूनतम ऑर्डर भी नहीं जाने के कारण बिहार का यह रिकॉर्ड रहा। सरकार की ओर से फ्री टीका देने के कारण प्राइवेट अस्पताल न्यूनतम ऑर्डर देने की भी हिम्मत नहीं जुटा सके। 60-62 अस्पताल वैक्सीन लेने के लिए तैयार थे, लेकिन न्यूनतम ऑर्डर तक जाने को कोई तैयार नहीं हुआ।

फ्री वैक्सीन दे रहे ओडिशा के भी निजी अस्पतालों का रिकॉर्ड बिहार जैसा

केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार मई, जून व जुलाई में देशभर के निजी अस्पतालों को 3.56 करोड़ टीके की आपूर्ति की गई है। बिहार की तरह ही सरकारी स्तर पर फ्री टीकाकरण करने वाल ओड़िशा का भी आंकड़ा शून्य पर रहा। देशभर में सबसे अधिक 1.04 करोड़ वैक्सीन महाराष्ट्र के निजी अस्पतालों ने खरीदी है। उसके बाद 47 लाख वैक्सीन कर्नाटक और तेलंगाना ने 45.23 लाख वैक्सीन खरीदी। 1 मई से 20 जून तक भारत सरकार कुल वैक्सीन उत्पादन का 50 प्रतिशत खरीद रही थी जबकि 50 प्रतिशत राज्य सरकार व निजी अस्पतालों को खरीदनी थी।

जबतक फ्री थी, 2.5 लाख लोगों को टीका दिया

बिहार में वैक्सीनेशन की शुरुआत में 45 साल से ऊपर के सभी लोगों का चिह्नित कर निजी अस्पतालों में भी निशुल्क वैक्सीनेशन किया जा रहा था। अप्रैल के अंत तक प्राइवेट अस्पतालों ने करीब 2.5 लाख लोगों को वैक्सीन की पहली डोज लगाई गई। 1 मई से निजी अस्पतालों को टीके की डोज सरकार की ओर से बंद कर दी गई। बाद में रेट तय कर इन्हें वैक्सीन खरीदने को कहा गया। उस खरीद पर हर आदमी को कोविशील्ड के लिए अधिकतम 780 रुपए प्रति डोज, कोवैक्सीन के लिए 1410 रुपए तथा स्पुतनिक वी के लिए 1145 रुपए देना है।

सरकार फ्री में दे रही तो कोई हमसे पैसे देकर क्यों लेगा

  • न्यूनतम डोज को लेकर ही परेशानी थी। सरकारी में फ्री और सुलभ होने के कारण बहुत कम लोग इन्क्वायरी भी कर रहे थे। जब फ्री था तो लोग आ रहे थे। अब हमने अपने कर्मियों के लिए वैक्सीन खरीदी है।” - डॉ. सत्यजीत सिंह, रूबन अस्पताल
  • जब सरकारी में फ्री और प्राइवेट में चार्ज लगने की घोषणा हुई तो लोगों ने इधर झांकना ही बंद कर दिया। इसके बावजूद 200 वॉयल के लिए ऑनलाइन भुगतान किया, लेकिन वह फेल्ड रह गया।” - डॉ. वीपी सिंह, सवेरा अस्पताल
  • जब भारी संकट का दौर था तो सरकार ने खुद प्राइवेट अस्पतालों से अपील की थी। प्राइवेट में फ्री पर रोक लगी तो लोग लौटने लगे। स्थिति ठीक हुई तो अस्पताल में सामान्य मरीज आने लगे।” - डॉ. अमूल्य सिंह, अक्षत अस्पताल
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