बिहार के IAS ने भेजा था पेपर:एग्जाम से 17 मिनट पहले BPSC के एग्जाम कंट्रोलर के पास आ गया था क्वेश्चन पेपर

पटना3 महीने पहले

67वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा के पेपर लीक मामले में एक नई बात सामने आई है। 8 मई को एग्जाम शुरू होने से 17 मिनट पहले ही लीक हुआ C सेट का क्वेश्चन पेपर एग्जाम कंट्रोलर के मोबाइल पर पहुंच चुका था। इन्हें किसी व्यक्ति ने अपने नंबर से भेजा था। यह व्यक्ति एक IAS अधिकारी हैं।

दरअसल, भास्कर रंजन आर्थिक अपराध शाखा (EOU) में DSP हैं। जिस दिन पेपर लीक हुआ, उस दिन EOU को इस केस के जांच की जिम्मेवारी मिली थी। कुछ घंटों की शुरुआती जांच में कई सुराग टीम के हाथ लगे। इसके लिए टीम को कई सोशल साइट्स को खंगालना पड़ा था। कई लोगों से पूछताछ करनी पड़ी थी। उस दरम्यान कई बातें सामने आई। इसके बाद ही 9 मई को DSP भास्कर रंजन के बयान पर पटना स्थित EOU थाना में केस दर्ज किया गया।

सामने आई दो महत्वपूर्ण बातें

FIR पढ़ने से दो महत्वपूर्ण बातों का पता चला है। पहली बात यह है कि BPSC के एग्जाम कंट्रोलर के मोबाइल नंबर 9472276281 पर 8 मई को 11 बज कर 43 मिनट पर ही सेट C का क्वेश्चन पेपर आ चुका था। इन्हें मोबाइल नंबर 9472343001 से भेजा गया था। FIR में दूसरी महत्वपूर्ण बात है कि DSP ने अपनी कंप्लेन में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि यह एक सुनियोजित साजिश है। रुपए कमाने के लिए किसी संगठित गिरोह ने क्वेश्चन पेपर को एग्जाम शुरू होने के तय समय से पहले लीक कर दिया।

सवाल ये कि IAS अधिकारी को किसने भेजा?

BPSC के एग्जाम कंट्रोलर को जिस मोबाइल नंबर से क्वेश्चन पेपर भेजा गया था, वो नंबर एक IAS अधिकारी का है। EOU की टीम ने IAS अधिकारी की पहचान कर ली है। EOU की टीम IAS अधिकारी से जानना चाहती है कि उनके पास क्वेश्चन पेपर को एग्जाम शुरू होने से पहले किसने भेजा था? जांच टीम में शामिल सूत्र बताते हैं कि IAS अधिकारी इस मामले में उन्हें कॉपरेट कर रहे हैं। उनसे बात भी हुई है। इस बारे में उनसे पूछा जाएगा।

कई लोगों से चल रही है पूछताछ

सूत्र बताते हैं कि इस मामले में जांच का दायर काफी बड़ा हो चुका है। कई जगहों पर EOU की टीम घूम रही है। सबूत जुटाने में लगी है। अभी भी कई लोगों से पूछताछ कर रही है। एक-दो दिनों में इस मामले में कुछ और बड़ी कार्रवाई होने की संभावना है। दूसरी तरफ गिरफ्तार किए गए भोजपुर जिले में बड़हरा के BDO जय वर्द्धन गुप्ता, कुंवर सिंह कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. योगेंद्र प्रसाद सिंह, प्रोफेसर सुशील कुमार सिंह और अगम कुमार सहाय को बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया। फिर वहां से जेल भेज दिया गया।

खबरें और भी हैं...