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सवाल बिहार के DGP से:विधानसभा कैंपस में खाली बोतल की जांच करने पहुंच गए, पर तब कहां थे जब जहरीली शराब से लोग मर रहे थे?

पटना2 महीने पहले
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29 नवंबर से बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ। इसके दूसरे दिन यानी 30 नवंबर को विधानसभा कैंपस में शराब की खाली 3 बोतल और 2 टेट्रा पैक मिले थे। जिसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारे में हंगामा मच गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को काफी गुस्सा आ गया। उस वक्त के माहौल को बिहार के DGP एसके सिंघल ने ऐसा भांपा कि वो खुद उस जगह पर पहुंच गए, जहां पर शराब की खाली बोतलों और टेट्रा पैक को देखा गया।

उस दिन बिहार पुलिस के मुखिया की तेजी देखते ही बन रही थी। वो झुक कर काफी बारीकी से कुछ समय तक शराब की खाली बोतलों को देख रहे थे। शराब की बोतलें वहां कैसे पहुंची? इसकी पड़ताल कर रहे थे। उस वक्त उस जगह पर और भी कई अधिकारी मौजूद थे। मीडिया के कैमरों ने उस पल को रिकॉर्ड भी किया।

DGP की तेजी पर उठ रहा सवाल
DGP की उस तेजी को देखकर अब एक बड़ा सवाल उठने लगा है। सवाल हाल के दिनों में बिहार के अंदर जहरीली शराब पीने से हुई लोगों की मौत का है। पिछले महीने यानी नवंबर में 7 दिनों के अंदर (3 से 10 नवंबर तक) जहरीली शराब पीने से बिहार के 4 जिलों में कुल 47 लोगों की मौत हो गई। इनमें गोपालगंज में 18, बेतिया (पश्चिमी चंपारण) में 17, समस्तीपुर में 7 और मुजफ्फरपुर में 5 लोगों की मौत हुई थी। लगातार हुई मौतों के बाद भी DGP साहब किसी एक जिले में भी खुद नहीं गए। मौके पर जाकर जांच करना तो दूर मुख्यालय से बाहर तक नहीं निकले।

सवाल ये है कि जो तेजी DGP ने विधानसभा कैंपस में मिली शराब की खाली बोतलों की जांच करने में दिखाई, वो तेजी उन्होंने जहरीली शराब की वजह से हो रही मौतों के दौरान क्यों नहीं दिखाई? वो उन जगहों पर क्यों नहीं गए, जहां मौतें हो रही थीं। उठ रहे सवालों का जवाब जानने के लिए DGP के सरकारी मोबाइल नंबर पर कॉल किया गया। लेकिन, उनसे बात नहीं हो सकी।