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मोदी कैबिनेट से RCP सिंह का इस्तीफा:कल खत्म हो रही थी राज्यसभा सदस्यता, JDU ने इस बार नहीं दिया था टिकट

पटना3 महीने पहले

JDU से बेटिकट हुए RCP (रामचंद्र प्रसाद) सिंह ने मोदी कैबिनेट से बुधवार को इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल 7 जुलाई यानी कल गुरुवार तक ही बचा था। ऐसे में उनका आगे मंत्रिमंडल में रहना मुश्किल था। वैसे उनके समर्थक BJP से उम्मीद कर रहे थे कि वो उनको एडजेस्ट करेगी।

बता दें, दो जुलाई को उनके BJP में शामिल होने की खबर आग की तरह फैली, लेकिन यह महज अफवाह निकली थी। सूचना फैलते ही बिहार BJP के नेता सफाई देने लगे, लेकिन सिंह ने अपने पत्ते नहीं साफ किया था। वहीं, मंगलवार को जब उनका मीडिया से सामना हुआ तो चुप्पी साध ली और कोई जवाब नहीं दिया था।

RCP समर्थक दिसंबर में राष्ट्रपति की तरफ से राज्यसभा में नॉमिनेट होने का दावा कर रहे हैं।
RCP समर्थक दिसंबर में राष्ट्रपति की तरफ से राज्यसभा में नॉमिनेट होने का दावा कर रहे हैं।

अब JDU नेता बनकर रहेंगे

जनता दल यूनाइटेड (JDU) में दो महत्वपूर्ण पद हैं। एक राष्ट्रीय अध्यक्ष का और दूसरा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष का। फिलहाल राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह हैं और संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा हैं। अब इन दोनों नेताओं के रहते पार्टी उनको कैसे फिट करेगी, यह बड़ा सवाल है। चूंकि RCP संगठन के व्यक्ति रहे थे। उनकी पकड़ संगठन पर काफी हद तक है। ऐसे में पार्टी चाहेगी कि वह संगठन के लिए काम करें।

नहीं स्वीकार होगा नीचे का पद

वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय बताते हैं, 'RCP बिना पद के भी संगठन के लिए काम कर सकते हैं। वह पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं तो उससे नीचे का कोई पद उन्हें स्वीकार नहीं होगा। ऐसे में वह एक नेता के तौर पर संगठन के लिए काम कर सकते हैं। वैसे भी JDU में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ही चलती है। राष्ट्रीय अध्यक्ष कोई भी हो, लेकिन सारे फैसले नीतीश कुमार ही लेते हैं। अब मुख्यमंत्री ने यह फैसला ले लिया है कि उनको राज्यसभा सांसद के तौर पर नहीं रखेंगे तो उन्हें संगठन में लाना है। ऐसे में संगठन में उन्हें कोई ना कोई पावर तो देना ही पड़ेगा।'

नीतीश कुमार के कृपा पात्र नहीं रहे तो घर बैठेंगे या फिर राजनीति में रहेंगे।
नीतीश कुमार के कृपा पात्र नहीं रहे तो घर बैठेंगे या फिर राजनीति में रहेंगे।

नीतीश कुमार के रहते RCP पर फोकस नहीं कर सकती BJP

वरिष्ठ पत्रकार अरुण पांडेय कहते हैं, 'पार्टी में RCP की स्थिति कमजोर हुई है, क्योंकि अध्यक्ष ललन सिंह उन्हें पसंद नहीं करते हैं। उनके खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं। सामान्य कार्यकर्ता के रूप में JDU में उनका रहना संभव होगा क्या? नीतीश कुमार के कृपा पात्र नहीं रहे तो घर बैठेंगे या फिर राजनीति में रहेंगे। नीतीश कुमार की कृपा भी नहीं रही और ललन सिंह का रवैया उनके खिलाफ जगजाहिर है। ऐसे में पार्टी में सम्मानजनक स्थिति अब नहीं है। BJP के साथ उनकी नजदीकियां तो बढ़ी है और उसके कारण भी उन्हें नुकसान हुआ है, लेकिन यह सच्चाई है कि नीतीश कुमार के रहते BJP उनको क्यों गले लगाएगी? 2024 का चुनाव महत्वपूर्ण है और BJP के लिए नीतीश कुमार मजबूरी हैं।'