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वर्चुअल सम्मेलन:आरसीपी सिंह ने कहा- अल्पसंख्यक समाज के विकास के बिना बिहार का विकास असंभव

पटना10 महीने पहले
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  • जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का वर्चुअल सम्मेलन

जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) आरसीपी सिंह ने कहा कि अल्पसंख्यक समाज के विकास के बिना बिहार का विकास संभव नहीं है, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस बात को हमेशा कहते हैं। आरसीपी मंगलवार को जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के वर्चुअल सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। आरसीपी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हमेशा सामाजिक सद्भाव को सबसे ऊपर रखा है। उन्होंने कभी धर्म, सम्प्रदाय, जाति या लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया।

बिहार में अल्पसंख्यकों की आबादी 17 प्रतिशत है लेकिन हमें तो यह कहते हुए शर्म आती है कि पति-पत्नी की सरकार में इतनी बड़ी आबादी के लिए मात्र 3.45 करोड़ रुपए का बजट था। आज अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का बजट 532 करोड़ रुपए से अधिक का है। सिर्फ उर्दू भाषा के विकास के लिए ही आज 70 करोड़ का बजट है। आरसीपी ने कहा कि जो लोग खुद को अल्पसंख्यकों का रहनुमा कहते रहे उनके शासनकाल में मदरसा शिक्षकों की क्या स्थिति थी, उनका क्या वेतन था, यह पता कर लें।

पिछले 15 वर्षों में 10 हजार से ज्यादा तालीमी मरकज की स्थापना हुई। 2005 तक मदरसों की कुल संख्या मात्र 1128 थी, वहीं नीतीश कुमार ने एक साथ 2460 नए मदरसों की मंजूरी दी। अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष तनवीर अख्तर ने कहा कि 15 साल पहले मुसलमानों से लाठी में तेल लगवाया जाता था, नीतीश कुमार ने हमारे हाथों में कलम दी और उसकी स्याही का इंतजाम भी किया।

अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन प्रो. युनूस हकीम ने कहा कि आज मुसलमान बिहार में जितने सुरक्षित हैं, उतने कहीं और नहीं। कार्यक्रम में शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन इरशाद अली अहमद, जदयू की प्रदेश प्रवक्ता अंजुम आरा, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष सरदार जगजीवन सिंह, मुस्तफा कमाल, अतीक अहमद और पटना महानगर के अध्यक्ष शकील अहमद हाशमी मौजूद थे।
बिहार का विकास नीतीश का एजेंडा, कोई निजी एजेंडा नहीं 
आरसीपी ने कहा कि नीतीश कुमार का कोई निजी एजेंडा नहीं है। बिहार का विकास ही उनका एजेंडा है, जबकि दूसरी ओर लोगों को केवल अपने परिवार की चिन्ता है। नीतीश कुमार ने बिहार को नरसंहारों के दौर से बाहर निकाल कर  सरकार का इकबाल कायम किया। नीतीश कुमार के कार्यकाल में बिहार में कब्रिस्तानों की घेराबंदी संभव हुई। अभी तक 6137 कब्रिस्तानों की घेराबंदी हो चुकी है। इसी तरह भागलपुर के दंगापीड़ितों को न्याय दिलाकर उन्होंने साबित किया कि शासन आपके व्यक्तित्व और नेतृत्व पर चलता है।

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