लापरवाही / अधिकतर जिलों में नहीं मिल रहे वर्ष 1946 से 2000 तक के रिकॉर्ड, होमगार्ड की 54 साल की बहाली से जुड़े कई रजिस्टर चाट गए दीमक

फाइल फोटो। फाइल फोटो।
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फाइल फोटो।फाइल फोटो।

  • किसी भी जिले के कमांडेंट ऑफिस या अन्य दफ्तरों से लेकर मुख्यालय तक में पुराने रिकार्ड नहीं हैं
  • बदले हालात में वाहिनी के इतिहास में पहली बार डीजी के निर्देशन में राज्य के सभी 42 हजार होमगार्डों का डाटा तैयार किया जा रहा है

दैनिक भास्कर

Mar 26, 2020, 01:14 AM IST

नीतीश कुमार सोनी, पटना. होमगार्ड की 54 साल की बहाली से जुड़े कुछ रिकॉर्ड एवं रजिस्टर को दीमक चाट गए, तो कुछ रखरखाव के अभाव एवं कर्मचारियों की लापरवाही के कारण नष्ट हो गए। चौंकिए नहीं। यही सच्चाई है।
बिहार गृह रक्षा वाहिनी का गठन वर्ष 1946 में हुआ था। आज वर्ष 1946 से लेकर 2000 के बाद तक की बहाली का रजिस्टर या फाइल ‘आप ढूंढ़ते रह जाएंगे’। किसी भी जिले के कमांडेंट ऑफिस या अन्य दफ्तरों से लेकर मुख्यालय तक में पुराने रिकार्ड नहीं हैं। इसके पीछे बाढ़, रखरखाव का अभाव, किराए के कमरे में कार्यालय, जर्जर दफ्तर से लेकर विभागीय अफसर-कर्मियों की लापरवाही व मनमानी अहम कारण हैं। सूत्रों के मुताबिक जान-बूझकर या सुनियोजित साजिश के तहत भी कागजात को नष्ट करने की आशंका है। विशेषकर 1990 के पहले के अधिकांश पेपर नहीं मिल रहे हैं। हजारों ऐसे पेपर भी हैं, जिन्हें खोलना या पढ़ना भी मुश्किल है। हालांकि, वर्ष 2010 या उसके बाद से जुड़े कागजात सही-सलामत और अपडेट हैं। 

बचे पुराने कागजात सुरक्षा घेरे में 
पुराने कागजातों के नहीं रहने से हो रही परेशानी व आरोपों से जुड़ी शिकायतों की बढ़ती संख्या के बीच जनवरी में डीजी सह महासमादेष्टा राकेश कुमार मिश्र के जिलों के भ्रमण-निरीक्षण के दौरान यह समस्या आने पर उन्होंने जांच करवाई। फिर सच्चाई सामने आई। इसके बाद विभिन्न स्तरों पर उपलब्ध पुराने दस्तावेज-रजिस्टर को मुख्यालय ने अपने कब्जे में ले लिया। अभी उन कागजात को कड़ी सुरक्षा में बिहटा स्थित वाहिनी के सेंट्रल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के शस्त्रागार में रखा गया है।

तैयार हो रहा 42 हजार होमगार्ड का डाटा 
बदले हालात में वाहिनी के इतिहास में पहली बार डीजी के निर्देशन में राज्य के सभी 42 हजार होमगार्डों का डाटा तैयार किया जा रहा है। पुराने उपलब्ध बहाली के पेपर, बॉण्ड पेपर व अन्य विभागीय कागजात के आधार पर इसे बनाया जा रहा है। वाहिनी के मीडिया को-आॅर्डिनेटर उमेश नारायण मिश्र के मुताबिक 1200 पेज को दो वॉल्यूम में सभी होमगार्ड का डाटा बुक होगा। इसमें बहाली की तिथि से लेकर मोबाइल नंबर तक रहेगा।

पुराने रिकॉर्ड के अभाव में कई बार अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो जाती है। आरोप है कि बहाली तिथि की अनुपलब्धता में कई बार होमगार्ड को समय से पहले ही रिटायर्ड कर दिया गया। कुछ दबंगई या ऊंची पहुंच के बल पर कागजात में छेड़छाड़ या पेपर गायब कर रिटायरमेंट की उम्र के बाद भी वाहिनी में बने रहे। इसमें विभागीय अफसर या कर्मियों पर भी अंगुली उठती रही है। शिकायत-आरोप लगने की स्थिति में पुराने कागजात नहीं रहने से असलियत का पता नहीं चल पाता है।   

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