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भास्कर इंटरव्यू:शाहनवाज बोले-17 इथेनॉल प्लांट, मेगा फूड पार्क बन रहे, ये बताते हैं कि अपहरण जैसी फिल्मी कहानियों के दौर से बाहर आ चुका है बिहार

पटना5 महीने पहले
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उद्योग मंंत्री का दावा है कि बिहार में औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। - Dainik Bhaskar
उद्योग मंंत्री का दावा है कि बिहार में औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हो चुकी है।
  • सवाल: बिहार के लॉ एंड ऑर्डर को बाहर मुद्दा बनाया जाता है ऐसे में निवेशक कैसे आएंगे ?

अब तो लौट आओ बिहार में, एक बार तो आइए बिहार में, बेचिए ही नहीं, बनाइए भी बिहार में...ये नारे अब जल्द ही देश के अलग-अलग कोने में सुनाई देगा। मिशन है-बिहार को इंडस्ट्री के लिए मोस्ट फेवरेट डेस्टिनेशन बनाने का। अभी यहां बड़ा मौका है। जो चूकेंगे वो बाद में पछताएंगे। ये कहना है राज्य के उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन का। उद्योग से लेकर राजनीति तक के तमाम मुद्दों पर उनसे भास्कर टीम ने विस्तार से बातचीत की।

सवाल-भाजपा के कई नेता और मंत्री सहयोगी दल जदयू से एकदम अलग स्टैंड रखते हैं?

शाहनवाज का जवाब-यह सही है क्योंकि हमारी विचारधारा अलग है, आप मित्र हैं और वेजिटेरियन हैं तो मित्रता के नाम पर क्या नॉनवेज खिला दूं?

क्या औद्योगिक क्रांति का सपना पूरा होगा?
बिहार को पहले चरण में 17 इथेनॉल प्लांट मिले थे। 16 में काम हो रहा है। एक में बैंक की वजह से परेशानी आई थी। 4 प्लांट बनकर तैयार है। आरा में देश का सबसे बड़ा इथेनॉल प्लांट बनकर तैयार है। मुजफ्फरपुर के मोतीपुर में एकसाथ 4 इथनॉल प्लांट, सिधौलिया में बिरला ग्रुप का प्लांट, गोपालगंज में सोनपती ग्रुप का प्लांट लगभग तैयार है।

मधुबनी, नालंदा, मोकामा, बाढ़ में भी काम चल रहा है। मुजफ्फरपुर में 178 एकड़ में मेगा फूड पार्क, गया में 1600 एकड़ में इंडस्ट्रियल पार्क अब जमीन पर उतर रहा है। मेगा टेक्सटाइल पार्क के लिए बेतिया में 1719 एकड़ जमीन ले ली है। उसके लिए हम बिड कर रहे हैं। मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क का भी प्रस्ताव है। जूट मिलों को फिर से जीवित किया जा रहा है।

क्या इथनॉल से ही औद्योगिक क्रांति आएगी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसानों की आमदनी दोगुनी करने का जो वायदा किया, वह भी इसके माध्यम से संभव होती दिख रही है। जो मक्का 800 में बिकता था, जिसका बेस प्राइस ही 1700 रुपए था, अब दो हजार के ऊपर बिक रहा है। अभी तो सिर्फ एक इथेनॉल प्लांट ही शुरू हुआ है। ये गेमचेंजर है।

उद्योगों के लिए जमीन कहां से लाएंगे?
2800 एकड़ पुरानी चीनी मिलों की जमीन मुख्यमंत्री ने उद्योगों के लिए दी है। इसी के एक हिस्से में पेप्सी ने आम-लीची-पाइनएपल जूस के लिए प्लांट लगाया है। वह दूसरा भी लगाने जा रहा है। कुछ लोगों ने जमीन लेकर छोड़ रखी है। ऐसे लोगों के खिलाफ जल्द ही अभियान चलेगा। या तो वह काम शुरू करें या जमीन सरकार को वापस करें। कोर्ट से ऐसे 16 मामलों में निर्णय भी हुआ है।

क्या बिहार की कानून व्यवस्था को लेकर दूसरे राज्यों में सवाल उठते हैं?
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, गुजरात में रोड शो करेंगे। बताएंगे कि बिहार गंगाजल और अपहरण जैसी फिल्मों की कहानियों के दौर से बाहर निकल गया है। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस है।

राजद-जदयू में नजदीकी सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे रहे?
दरअसल, सीएम बहुत उदार और सामने वाले के सम्मान का बहुत ध्यान रखने वाले व्यक्ति हैं। वह एक-दो बार तेजस्वी से मिल लिए तो इसका गलत मतलब नहीं लगाया जाना चाहिए। सालों बाद ऐसा हुआ कि विपक्ष के नेता को गाड़ी तक छोड़ने सीएम गए? वो तो वह भाजपा नेताओं को भी छोड़ने के लिए गाड़ी तक चले जाते हैं। ये उनका बड़प्पन है। इसको उनकी कमजोरी नहीं समझी जा सकती है।

क्या भाजपा के कई नेता-मंत्री जदयू से बिलकुल अलग स्टैंड रखते हैं?
हम अलग दल है, हमारे नेता अलग हैं, हमारा झंडा अलग है, हमारी विचारधारा अलग है, हमारा चुनावी निशान भी अलग ही है। लेकिन हम दोनों बिहार के लिए एकजुट हैं। जो हमारे विचार हैं, वहीं क्यों जदयू के भी होने चाहिए? अगर ऐसा ही होता तो फिर अगल पार्टी क्यों होती? वह लोहिया और समाजवादी विचारधारा पर चलते हैं।

हम लोहिया का सम्मान करते हैं, लेकिन पंडित दीनदयाल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी, नरेंद्र मोदी के रास्ते पर चलते हैं। अलग-अलग रास्ते हैं। हमारी मित्रता है और आप वेजिटेरियन हैं तो क्या मित्रता के नाम पर आपको नॉनवेज खिला दूंगा? मित्रता है लेकिन विचारधारा अलग है।

क्या तो क्या ये गठबंधन एक मजबूरी है?
नहीं, ये हम दोनों दलों की विकास के लिए एक तड़प है। नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी के बहुत अच्छे संबंध हैं। दोनों बड़े नेता हैं। उनका आदेश है कि गठबंधन में सरकार चलाना है तो कोई क्या बोलता है, हमें उससे कोई लेना देना नहीं।

कहा जाता है कि बिहार में उद्योग लगाना सबसे मुश्किल है?
उद्योग लगाने में अगर कहीं सबसे आसान प्रक्रिया होगी तो वह बिहार में होगा। हमने सिंगल विंडो सिस्टम शुरू कर दिया है। लाइसेंस से लेकर सभी चीजों के लिए क्लीयरेंस तक हम (उद्योग विभाग) एक हफ्ते में करके देंगे। 20 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर से ऊपर की जमीन ई ऑक्शन से ही मिलेगी। आपको अगर जमीन किसी प्रोडक्ट को बनाने के लिए अलॉट की गई है और बाद में आप उसमें कुछ और बनाना चाहते हैं तो अब इसके लिए अनुमति जरूरी नहीं होगी।

क्या अदाणी, आईटीसी, हिन्दुस्तान लीवर, सभी फूड प्रोसेसिंग में ही निवेश कर रहे?
हां, क्योंकि इस बार हमारा ज्यादा फोकस फूड प्रोसेसिंग ही था। हम जल्द ही मुंबई में इंन्वेस्टर्स मीट करने जा रहे हैं। उसमें हमारा ज्यादा फोकस टेक्सटाइल पर होगा।

आखिर ये बताने से हिचकते क्यों है कि कितने के निवेश प्रस्ताव आए?
स्टेट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड में 36 हजार करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिल्ली इन्वेसटर्स मीट से पहले ही मिल चुका है। हम तब तक किसी भी कंपनी के प्रस्ताव या वायदे को नहीं मान रहे, जब तक उसका प्रस्ताव एसआईपीबी को न मिल जाए। वैसे तो अकेले बरौनी में ही पेट्रो कैमिकल में 30 हजार करोड़ से अधिक के निवेश के प्रस्ताव हैं। हम बरौनी को बड़ोदा के रास्ते पर ले जा रहे हैं। हमारे पास बताने के लिए बहुत कुछ है।

तो बता क्यों नहीं रहे?
प्रस्तावों को परिपक्व होने दीजिए। फिर धीरे-धीरे सारी चीजें खुद ब खुद सामने आ जाएंगी। लेकिन मैं ये कह सकता हूं कि दिल्ली इन्वेस्टर्स मीट में हमारी उम्मीद से बहुत अधिक निवेश के प्रस्ताव आए और हमें निवेश की भी पूरी उम्मीद है। इंन्वेस्टर्स मीट में 170 कंपनियां आई। इसमें अदाणी, आईटीसी, हिन्दुस्तान लीवर, लूलू बिहार में निवेश को लेकर उत्साहित हैं। अदाणी मेगा फूड पार्क और लॉजिस्टिक, लूलू ग्रुप मीट प्रोसेसिंग, फूड और मॉल में। किसी सेक्टर में काेई निवेश करना चाहता है तो उसका स्वागत है।

क्या टेक्सटाइल और लेदर पॉलिसी काफी समय से अटकी है?
टेक्सटाइल और लेदर पॉलिसी को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। इसकी फाइल को वित्त विभाग ने ओके कर दिया है। इससे बंगाल के चमड़ा उद्योग को हम बिहार लाने में सफल हो सकते हैं। किशनगंज में मेगा लेदर पार्क बनाना चाहते हैं। पांजीपाड़ा पहले से ही चमड़ा उद्योग का गढ़ है। उद्योग विभाग लेदर प्रोसेसिंग यूनिट हब बनाने की योजना पर काम कर रहा है। साथ ही इससे टेक्सटाइल के क्षेत्र में व्यापक निवेश और रोजगार की संभावना खड़ी होगी।