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प्लेटफॉर्म टिकट कोरोना मुक्त:544 ट्रेनों से स्पेशल चार्ज नहीं हटा, कोरोना नियंत्रित होने के बावजूद स्पेशल चार्ज नहीं हटाने से यात्री संघ गुस्से में

पटना3 महीने पहलेलेखक: आलोक कुमार
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पहले 687 ट्रेनें चलती थीं, अभी 143 का परिचालन नहीं, जो चल रहीं उनका भी ठहराव नहीं बढ़ाया गया। - Dainik Bhaskar
पहले 687 ट्रेनें चलती थीं, अभी 143 का परिचालन नहीं, जो चल रहीं उनका भी ठहराव नहीं बढ़ाया गया।

रेलवे को पता चल गया है कि कोरोना अब नियंत्रित है। कोरोना के नाम पर प्लेटफॉर्म टिकट का चार्ज 50 रुपए हुआ था, अब वह लौटकर 10 रुपए पर आ गया है। लेकिन जो 544 ट्रेनें चल रही हैं उनपर कोरोना काल का स्पेशल चार्ज लग रहा है।

बाकी 143 ट्रेनों को शुरू कराने, चालू ट्रेनों का ठहराव वापस बढ़ाने, स्पेशल चार्ज को जल्दी हटाने और तबतक ट्रेनों के अंदर परदा, बेडरोल, कैटरिंग जैसी सुविधाएं वापस करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। यात्रियों की इन मांगों के साथ बिहार दैनिक यात्री संघ ने दानापुर डीआरएम और पूर्व मध्य रेलवे के जीएम के साथ ही रेलमंत्री को भी ईमेल भेजा है।

त्योहारों के पहले ही फेस्टिवल स्पेशल लिख रेट बढ़ाया
कोरोना की पहली लहर के बाद से रेगुलर ट्रेनों की जगह स्पेशल और बगैर किसी फेस्टिवल के फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को सामान्य ट्रेनों की तुलना में अधिक किराया चुकाना पड़ता है।

त्योहार तो अब आएं हैं, मगर मगध एक्सप्रेस, इस्लामपुर पटना हटिया एक्सप्रेस, सुपर एक्सप्रेस, गंगा दामोदर, राजेंद्र नगर हावड़ा समेत पटना से खुलने व यहां से गुजरने वाली कई ट्रेनों को रेलवे फेस्टिवल स्पेशल के रूप में ही चला रहा है। यही वजह है कि नई दिल्ली के लिए संपूर्ण क्रांति के एसी थ्री से सफर करने पर 1350 रुपए और मगध एक्सप्रेस की एसी थ्री से यात्रा करने वाले यात्रियों को 1715 रुपए चुकाना पड़ रहा है।

फेस्टिवल स्पेशल एक्सप्रेस में किराए को लेकर नियम के कारण भी यात्रियों पर बोझ बढ़ा हुआ है। इसमें 2एस में न्यू्नतम 100 किमी, स्लीपर में 500 किमी, एसी चेयरकार में 250 किमी, एसी थ्री में 500 किमी, 2 एसी में 500 किमी और एसी फर्स्ट में न्यूनतम 300 किमी से कम दूरी के लिए टिकट नहीं मिलने का प्रावधान है। उससे कम दूरी का टिकट लेने पर निर्धारित किराया चुकाना पड़ता है।

सामान्य स्पेशल ट्रेनों अधिक किराया जारी, सुविधाएं-छूट भी अबतक गायब
स्पेशल ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों से अधिक किराया वसूला जा रहा है। खासतौर से जनरल क्लास को टू एस में तब्दील कर हर यात्री से आरक्षण शुल्क के नाम पर किराए के अलावा 30 रुपए अधिक लिए जा रहे हैं। सीनियर सिटीजन समेत विभिन्न श्रेणियों को मिलने वाली रियायतें भी स्पेशल ट्रेनों में नहीं मिल रही हैं।

कोरोना नियंत्रित है, प्रमाण मिला तो बाकी चीजें ठीक करें वरना आंदोलन

  • अच्छी बात है रेलवे ने प्लेटफॉर्म टिकट का रेट घटा दिया। यह कोरोना नियंत्रित होने के कारण ही किया गया है। इसलिए, अब ट्रेनों पर जबरन लगा स्पेशल चार्ज हटाकर पुरानी सुविधाएं बहाल की जानी चाहिए। रियायतें दी जानी चाहिए। सब्र की परीक्षा दे-देकर यात्री अब गुस्से में हैं। ऐसे में हम आंदोलन को मजबूर हो रहे हैं। चिट्‌ठी-वार्ता से सुनवाई नहीं होगी तो आंदोलन करेंगे। - शोएब कुरैशी, सचिव, बिहार दैनिक यात्री संघ

फेस्टिवल स्पेशल में 10 से 30 प्रतिशत तक अधिक किराए का है प्रावधान

  • कोविड प्रोटोकॉल में भारत सरकार के निर्देशानुसार रेलवे बोर्ड द्वारा यात्रियों की सहूलियत के लिए फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। फेस्टिवल स्पेशल और हॉलीडे स्पेशल ट्रेनों में न्यूनतम और अधिकतम किराया दूरी को आधार मानकर निर्धारित किया जाता है। रेलवे के सर्कुलर के अनुसार शुरू से ही फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों का किराया सामान्य ट्रेनों के मुकाबले अधिक रहता है। - राजेश कुमार, सीपीआरओ, पूर्व मध्य रेल
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