रिहा नहीं होंगे आनंद मोहन:MLA बेटे के सवाल पर सदन में बोली सरकार- वो लोकसेवक की हत्या के दोषी, उन्हें रिहा नहीं कर सकते

पटना8 महीने पहले
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पूर्व सांसद आनंद मोहन के राहत नहीं मिलेगी। वो जेल में ही रहेंगे। शुक्रवार को प्रभारी गृह मंत्री की हैसियत से विजेन्द्र यादव ने विधानसभा में कहा, 'वो लोकसेवक की हत्या के दोषी हैं, उन्हें परिहार (रिहा) नहीं किया जा सकता। यानी 14 वर्ष की वास्तविक सजा और परिहार सहित 20 वर्ष की सजा काट लेने के बाद भी छोड़ा नहीं जा सकता। सामान्यता अच्छा व्यवहार होने पर सजा काट लेने के बाद आजीवन कारावास भुगतने वाले बंदियों को छोड़ा जाता है, पर कुछ मामलों में आजीवन कारावास की सजा काटने वालों को छोड़ने का नियम नहीं हैं। उनमें लोकसेवक के हत्या के दोषी, बलात्कारी, डकैती, आतंकवादी, पेशेवर हत्यारे, सिद्ध दोषी बंदी भी शामिल हैं।'

उन्होंने बताया, 'खासकर सरकारी काम में रहते लोकसेवक की हत्या के दोषी आजीवन सजा काटने वालों को परिहार नहीं दिया जा सकता है। परिहार पर्षद की लगातार बैठकें होती है। अंतिम बैठक पहली नवंबर को हुई है। पिछले तीन सालों में 374 बंदियों को कारामुक्त किया गया है। समय-समय पर समीक्षा की जाती है।'

मंत्री RJD के ललित यादव, चेतन आनंद समेत कई सदस्यों के ध्यानाकर्षण सूचना का जवाब दे रहे थे। हालांकि, मंत्री के जवाब से असंतुष्ट RJD विधायकों ने सरकार पर पूर्वाग्रह से ग्रसित होने का आरोप लगाया। विधायक चेतन आनंद ने पूछा कि आनंद मोहन की सजा पूरी हुए छह महीने से ज्यादा समय बीत गए। सरकार उन्हें क्यों नहीं छोड़ना चाहती?

ललित यादव ने कहा, 'सरकार बदले की भावना से काम कर रही है।' मुकेश रौशन ने कहा, 'सरकार राजनीति प्रेरित फैसले ले रही है।' माले के महबूब आलम समेत कई सदस्य विरोध जताते हुए वेल में पहुंच गए और धरना पर बैठ गए। राजद के शोरगुल करने के बाद स्पीकर ने कार्यवाही स्थगित कर दी। चेतन ने भास्कर से कहा है कि हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

17 मई 2021 को खत्म हुई आनंद मोहन की सजा

बाहुबली सांसद आनंद मोहन गोपालगंज में डीएम रहे जी कृष्णैया की हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे हैं। वह 2007 से लगातार सहरसा जेल में हैं। 17 मई को उनकी 14 साल की सजा पूरी हो रही है। मई में ही उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया था, जिसमें CM नीतीश कुमार को उनके वादे की याद दिलाई गई थी। नीतीश कुमार ने बीते साल ही महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि के मौके पर घोषणा की थी कि आनंद मोहन जल्द जेल से बाहर होंगे।

पत्नी लवली आनंद के साथ आनंद मोहन का फाइल फोटो।
पत्नी लवली आनंद के साथ आनंद मोहन का फाइल फोटो।

सजा पूरी होने के वक्त तक कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से रिहाई से पहले बनने वाली बोर्ड नहीं बन सका था। इस बोर्ड को कोर्ट में सजा पूरी होने की जानकारी देनी थी। इसके बाद राज्य सरकार रिहाई की प्रक्रिया संपन्न कराती।

विधानसभा में आनंद मोहन मामले पर मीडिया से बात करते तेजस्वी यादव। साथ में हैं चेतन आनंद।
विधानसभा में आनंद मोहन मामले पर मीडिया से बात करते तेजस्वी यादव। साथ में हैं चेतन आनंद।

चेतन के सपोर्ट में तेजस्वी बोले- तानाशाह हो गई सरकार
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी सरकार पर सवाल उठाया है। कहा कि यह सरकार तानाशाह हो चुकी है। राजनीतिक वेंडेटा (दुर्भावना) से ग्रसित होकर काम कर रही है। आनंद मोहन को सजा पूरी होने के बाद भी जबरन जेल में रखा गया है। जिन मंत्रियों पर आरोप लग रहे हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

आनंद मोहन पहले नेता जिन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी
आनंद मोहन शिवहर से पूर्व सांसद हैं, उनकी पत्नी लवली आनंद भी पूर्व सांसद हैं। उनके दादा रामबहादुर सिंह स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। परिवार के कई लोगों ने आजादी की लड़ाई में भाग लिया था। सहरसा जेल में सजा काट रहे आनंद मोहन पर कई मामलों में आरोप लगे। अधिकतर मामले या तो हटा दिए गए या वो बरी हो गए। 1994 में एक मामला ऐसा आया, जिसने न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया। 5 दिसंबर 1994 को गोपालगंज के DM जी कृष्णैया की भीड़ ने पिटाई की और गोली मारकर हत्या कर दी गई। कहा जाता है कि इस भीड़ को आनंद मोहन ने उकसाया था।

मामले में आनंद मोहन और उनकी पत्नी लवली समेत 6 लोगों को आरोपी बनाया गया था। साल 2007 में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया और फांसी की सजा सुनाई। 2008 में इस सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया गया था। साल 2012 में आनन्द मोहन ने सुप्रीम कोर्ट से सजा कम करने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

कहानी बिहार के उस बाहुबली और उसकी पत्नी की, जो जेल में रहते हुए भी चुनाव जीता; पहला नेता, जिसे मौत की सजा मिली थी

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