पटना में बैठकर अमेरिका में ठगी:किराए पर फ्लैट लेकर चला रहे थे कॉल सेंटर, सरगना के घर से मिले 10.50 लाख रुपए

पटना4 महीने पहले

पटना में बैठ कर साइबर अपराधी अमेरिका के लोगों के साथ ठगी कर रहे थे। एक बार में उनसे 15 हजार डॉलर (9 लाख रुपए) से अधिक की ठगी कर रहे थे। अमेरिका के लोगों के कंप्यूटर, लैपटॉप में Malware या Ransomeware डालते, फिर उसके सॉल्यूशन के नाम पर धोखाड़ी करते। ठगी के रुपए दो तरीकों से मंगवाए जाते थे।

पहला तरीका था- शातिर अपराधियों का अमेरिका में लोकल कनेक्शन है। इस आधार पर वहां के अलग-अलग बैंकों में अकाउंट्स हैं। इसमें ठगी के रुपए मंगवाए जाते थे। दूसरा तरीका ये था कि कूरियर कंपनी फेडेक्स के जरिए बंद लिफाफे में कैश में रुपए को अमेरिका के ही एक लोकल अड्रेस पर मंगवाया जाता था। साइबर ठगी के इस इंटरनेशनल मामले का पटना पुलिस ने रविवार को खुलासा किया है।

सिटी एसपी सेंट्रल अम्बरीश राहुल के अनुसार, पश्चिम बंगाल के कोलकाता और वीरभूम जिले के रहने वाले तीन शातिरों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें मो. दानिश अरशद, आमिर सिद्दकी और सब्बीर अहमद शामिल हैं। पटना के पाटलिपुत्रा थाना के तहत एक अपार्टमेंट के फ्लैट में इन लोगों ने एक कॉल सेंटर की तरह पूरा सिस्टम बना रखा था।

इस गैंग का मेन सरगना पटना जिले के ही मनेर का रहने पाला पिंटू सिंह है। गिरफ्तार शातिरों के साथ इसकी मुलाकात कोलकाता में हुई थी। इसके बाद ही कमिशन पर इनकी डील तय हुई। फिर इन्हें पटना लाया गया।

गिरोह के सरगना पिंटू के घर से छापेमारी में 10.50 लाख रुपए कैश मिले हैं।
गिरोह के सरगना पिंटू के घर से छापेमारी में 10.50 लाख रुपए कैश मिले हैं।

अंग्रेजी में ही बात करते थे
पूरा सिस्टम उपलब्ध कराया गया। इसके बाद से ठगी का खेल चल रहा था। तीनों लड़के काफी पढ़े-लिखे हैं। अमेरिका के लोगों से अंग्रेजी में ही बात करते थे। दरअसल, 17 सितंबर की सुबह 7 बजे के करीब दीघा थाना की पुलिस टीम पेट्रोलिंग पर थी। कुर्जी में एशियन हॉस्पिटल के पास तीनों शातिरों को संदिग्ध मानते हुए पकड़ा गया। उसी दरम्यान पुलिस ने एक शातिर के मोबाइल को चेक किया। तब उसमें कॉल सेंटर से जुड़े कुछ डिटेल्स दिखे। इसके बाद ही दीघा थाना लाया गया। थानेदार राजकुमार पांडेय और उनकी टीम ने पूछताछ शुरू की। फिर पूरा राज उगल दिया।

छापेमारी से पहले फरार हो गया मेन सरगना पिंटू सिंह
गिरफ्तार शातिरों की निशानदेही पर पहले कॉल सेंटर और फिर मनेर में पिंटू के घर पर छापेमारी हुई। पिंटू फिलहाल फरार है। पर उसके घर से छापेमारी में 10.50 लाख रुपए कैश मिले हैं। इसके साथ ही 1.79 लाख रुपए के ज्वेलरी खरीदने की रसीद मिली। जबकि, फ्लैट से 1 लैपटॉप, सीपीयू, 2 पेन ड्राइव, 3 कार्ड रीडर, 3 मेमोरी कार्ड, 3 मोबाइल, 2 बाइक, 7 बैंक अकाउंट के पासबुक और बैंक में जमा कराए गए 50 हजार रुपए का रसीद बरामद किया गया है। सिटी एसपी के अनुसार इनके पकड़े जाने की खबर पिंटू सिंह को लग चुकी थी। इसलिए पुलिस की छापेमारी से पहले ही उसने कई सिस्टम हटा लिए और फरार हो गया। बावूजद इसके शातिरों की कई डायरी हाथ लगी है। इसमें रुपए का लेखा-जोखा है।

सिटी एसपी सेंट्रल अम्बरीश राहुल के अनुसार, पश्चिम बंगाल के कोलकाता और वीरभूम जिले के रहने वाले तीन शातिरों को गिरफ्तार किया गया है।
सिटी एसपी सेंट्रल अम्बरीश राहुल के अनुसार, पश्चिम बंगाल के कोलकाता और वीरभूम जिले के रहने वाले तीन शातिरों को गिरफ्तार किया गया है।

अमेरिका के लोगों को इस तरह से ठग रहे थे
रिंग सेंटर, स्काइप और टेक्स्ट नाउ जैसे एप्लिकेशन के जरिए शातिरों ने फर्जी डिटेल्स के साथ अपना अकाउंट बना रखा है। सारे अकाउंट डेनियल, थॉमस और फ्रैंक जैसे नामों पर खुले होते हैं। इसके बाद ठगी के लिए पोन और दूसरे नाम से बने वेबसाइट पर पॉप लिंक्स अपलोड करते हैं। जब कोई इन लिंक्स को क्लिक करता है तो फिर उसके सिस्टम पर Malware या Ransomeware डाउनलोड हो जाता है। इसके बाद उस शख्स का कंप्यूटर सिस्टम स्लो हो जाता है। इसी बीच रिंग सेंटर, स्काइप और टेक्स्ट नाउ के जरिए फर्जी नाम पर बनाए गए प्रोफाइल को बड़ी कंपनियों के कॉल सेंटर के नाम पर पुश किया जाता है। उसमें नाम कंपनियों का होता है, पर नंबर इन शातिरों के होते हैं।

जब इनसे अमेरिका के लोग मदद मांगते हैं तो ये शातिर ऑनलाइन कॉल करते हैं। इसके बाद उन से Any Desk नाम के एप्लीकेशन को डाउनलोड करवा लेते हैं। इसके बाद उनके सिस्टम का पूरा कंट्रोल इन शातिरों के पास होता है। फिर कंप्यूटर को ठीक कराने के नाम पर कई तरह के प्लान उनके सामने रखा जाता है। प्लान बेचने के दौरान ही ठगी होती है। रुपए को अमेरिका के बैंक अकाउंट में ही ट्रांसफर कराया जाता है। फिर वहां से रुपए इंडिया भेजे जाते थे।

EOU को जांच के लिए लेटर लिखेगी पुलिस

यह मामला काफी बड़ा है। इसलिए सिटी एसपी सेंट्रल इस केस में आगे की जांच के लिए जल्द ही आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को एक लेटर लिखेंगे। फिलहाल इस मामले में दीघा थाना की पुलिस जांच कर रही है।

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