रमजान में इफ्तार, मुहर्रम पर कुर्सी तैयार!:चाचा-भतीजे में पिछले दरवाजे से बढ़ीं नजदीकियां, ताकते रह गई BJP

पटना2 महीने पहलेलेखक: अभिनव कुमार

दिन 22 अप्रैल: शाम 6 बजे

RJD ने इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था। कुछ दिन पहले लालू यादव को बेल मिली थी। इससे राजद में खुशी दोगुनी थी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी बुलावा भेजा गया था। पिछले पांच साल से वे रबड़ी आवास नहीं आए थे। कयासों के बीच मुख्यमंत्री अपने आवास के पिछले गेट से पैदल ही वहां पहुंच गए।

नीतीश कुमार तो अक्सर ही इफ्तार पार्टी में शामिल होते हैं, लेकिन इस बार कुछ खास था। तैयारी मुहर्रम की थी। सत्ता पलटने की थी। विपक्ष में रहते हुए भी राजनीतिक तल्खियों से बचते हुए तेजस्वी ने CM नीतीश के साथ मिलकर ऐसा खाका बुना कि BJP ताकते रह गई।

LJP के खेल से नाराज हुए नीतीश

2017 में नीतीश ने राजद से गठबंधन तोड़ BJP के साथ मिलकर सरकार बनाई। 2019 में जब BJP केंद्र की सत्ता में आई तो साथ लड़ने वाली JDU से मंत्री पद के बंटवारे पर तनातनी हो गई। यहां से लगी चिंगारी ने 2020 के विधानसभा चुनाव में आग भड़का दी। कहने को तो BJP ने JDU के साथ चुनाव लड़ा था, लेकिन LJP के खुलेआम JDU के खिलाफ जाना नीतीश को खटक गया।

जहां-जहां JDU ने प्रत्याशी उतारे वहां-वहां LJP ने भी प्रत्याशी उतारे। इससे नीतीश के वोट कटे और 39 प्रत्याशी सिर्फ LJP के कारण हार गए। इस हार से नीतीश को बड़ा झटका लगा था और JDU सीटों की संख्या में तीसरे नंबर पर रही।

उस समय भी तैयार नीतीश सीएम पद के लिए तैयार नहीं थे क्योंकि सीटें JDU की कम(43) थीं। राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भी छोड़ दिया और पार्टी की कमान RCP सिंह को सौंप दी। इसके बाद चिराग की लगातार बयानबाजी आग में घी का काम करने लगी। वे सब कुछ बर्दाश्त करते रहे।

2021 में जब केंद्र में मोदी कैबिनेट का विस्तार हुआ तो नीतीश के न चाहते हुए भी JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह JDU कोटे से केंद्र सरकार में मंत्री बन गए। बीजेपी की आरसीपी सिंह के साथ बढ़ती नजदीकियों से और सतर्क हो गए और तेजस्वी की तरफ बढ़ने लगे।

जब ऑपरेशन LJP नहीं हुआ सफल तो आग भड़की

इसके बाद नीतीश ने भी दांव खेलना शुरू किया और LJP को ही तोड़ने की तैयारी कर दी। उनका प्लान मनिहारी से विधायक को अपने साथ लाना था। यही नहीं उन्होंने LJP के सांसदों को भी तोड़ने की तैयारी कर दी।

हालांकि उनके इस गेम प्लान को ओम बिरला ने पलट दिया। पशुपति पारस और उनके साथ आए चन्दन सिंह, प्रिंस सिंह, बीणा देवी महबूब अली कैशर से कहा आपको अलग दल का दर्जा दे देते हैं। यह बात नीतीश को और खटक गई। एक बार फिर से उनके प्लान को BJP ने धराशायी कर दिया था। धोखा खाकर भी मन मसोस कर रह गए। तब तक तेजस्वी भी नीतीश पर हमलावर रहे थे और उनके खिलाफ लगातार भड़काऊ बयान दे रहे थे।

जातीय जनगणना बना सेतु

उसी समय जातीय जनगणना का मुद्दा उठा था। तेजस्वी ने जोर लगा कर जातीय जनगणना का मामला उठाया और CM नीतीश से मिलकर समर्थन मांगा। नीतीश को ये बात अच्छी लगी। इसके लिए 23 अगस्त 2021 को वे तेजस्वी के साथ प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली भी गए। 2022 में जब यही मांग उठी तब नीतीश ने सर्वदलीय बैठक की। इसमें निर्णय जातीय जनगणना कराने का फैसला लिया गया। एक दिन बाद नीतीश कैबिनेट की बैठक में जाति आधारित जनगणना कराने के लिए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी के नेतृत्व में जातीय जनगणना केंद्र के पास उठाया जाएगा।

5 साल बाद राबड़ी आवास पहुंचे

दूसरी तरफ बोचहां उपचुनाव में मिली चुनावी-जीत के बाद महागठबंधन नए सियासी जोड़-तोड़ की तैयारियों में जुटा था। इसके बाद मौका आया रमजान का। ईद के मौके पर तेजस्वी ने निमंत्रण दिया। निमंत्रण को नीतीश ने स्वीकार किया और पैदल ही रबड़ी आवास पहुंच गए। ये 5 साल बाद हुआ था जब नीतीश राबड़ी आवास पहुंचे थे। इससे पहले अंतिम बार 2017 में मकर संक्रांति के मौके पर नीतीश कुमार राबड़ी आवास गए थे। तब वह RJD के साथ मिलकर सरकार चला रहे थे। साथ बैठक कर गुफ्तगु करते दोनों चाचा-भतीजे ने यह संदेश दे दिया था कि जल्द ही कुछ बड़ा धमाका हो सकता है।

15 दिन के अंदर 3 बार मिले

नजदीकियां बढ़ती गईं और बात बनती गईं। यही नहीं 6 दिन बाद 28 अप्रैल को जब JDU के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने इफ्तार पार्टी रखी तो दोनों एक बार फिर मिले। इसके बाद राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज हो गई। इसी बीच 11 मई को तेजस्वी एक बार से CM से वन-टू-वन गुफ्तगु करने पहुंचे। यह मुलाकात पूरे पौने घंटे तक चली। दोनों ने मिल कर प्लान तैयार किया और एक के बाद एक पत्ते खोलते गए। ऐसे पत्ते जिससे सरकार बनाते समय न तो गवर्नर कुछ पेंच फंसा सके और न ही विधानसभा अध्यक्ष किसी तरह का अड़ंगा डाल सकें।

विधानसभा में बीजेपी वीआईपी के तीनों विधायकों को शामिल करा सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। यही चाल नीतीश कुमार ने चली और 29 जून को ओवैसी की पार्टी AIMIM के चार विधायकों RJD में शामिल करा दिया। इससे RJD सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई और सरकार बनाने का दावा ठोकने की दावेदार बन गई। ऐसा करके नई सरकार का दावा करने के बीजेपी के मंसूबों पर पानी फिर गया।

इसके बाद जब लालू यादव की तबीयत बिगड़ी तो 6 जुलाई को नीतीश खुद पहुंचे और अपने निर्देश में उन्हें सरकारी खर्चे पर दिल्ली एयर एंबुलेंस से भेजा। ध्यान देने वाली बात यह है कि नीतीश किसी को हॉस्पिटल नहीं देखने जाते हैं। बात जब लालू की थी, वे आनन-फानन में देखने पहुंचे। इससे चाचा-भतीजा और पास आए और मुहर्रम तक पासा ही पलट दिया...