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संकट गहराया:बाजार से नहीं मिल रही कंपनी को पूरी बिजली; सरकार ने बाजार से 20 रुपए की दर पर खरीदी 1400 मेगावाट बिजली

पटना2 महीने पहले
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थर्मल के बाद अब पवन ऊर्जा में 410 मेगावाट कटौती, गांवों और शहरों में लोड शेडिंग जारी। - Dainik Bhaskar
थर्मल के बाद अब पवन ऊर्जा में 410 मेगावाट कटौती, गांवों और शहरों में लोड शेडिंग जारी।

एनटीपीसी के दोनों बिजलीघरों तालचर और दरलीपाली में उत्पादन पहले ही ठप था, बुधवार को पवन उर्जा से भी 70 फीसदी की कटौती के बाद सूबे का बिजली संकट और गहरा गया। देर शाम 560 मेगावाट पवन ऊर्जा के कोटा में मात्र 150 मेगावाट की ही आपूर्ति हुई।

इसके पहले एनटीपीसी के बिजलीघरों में गड़बड़ी के बाद 300 मेगावाट की कटौती पहले ही हो रही थी। संकट से जूझ रही बिजली कंपनी को बाजार से भी पूरी बिजली नहीं मिली। केन्द्रीय कोटा से बिहार को 1700-1800 मेगावाट कम बिजली मिली। देर रात राहत की बात यही रही कि मांग में भी 200 मेगावाट की कमी आई।

मंगलवार को 5600 मेगावाट की जगह बुधवार की रात 5400 मेगावाट की ही डिमांड रही। पर, सेन्ट्रल सेक्टर से पूरी बिजली नहीं मिलने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी 8 से 10 घंटे की कटौती हुई।

एनटीपीसी के तालचर व दरलीपाली बिजलीघरों में उत्पादन शुरू नहीं

एनटीपीसी संकट से परेशान बिहार
सोमवार की देर रात एनटीपीसी के तालचर और दरलीपाली बिजलीघर की एक-एक यूनिट का ट्यूब लिकेज हो जाने से वहां उत्पादन ठप हो गया था। तालचर की 500 मेगावाट के बिजलीघर के बंद होने से बिहार को अचानक 206 मेगावाट बिजली की आपूर्ति अचानक बंद हो गयी। जबकि, दरलीपाली बिजलीघर 90 मेगावाट की आपूर्ति कम हो गयी।

संकट एक सप्ताह और बना रहेगा
सेन्ट्रल सेक्टर से बिजली आवंटन में कटौती और एनटीपीसी के बिजलीघरों में आई तकनीकी गड़बड़ी के कारण बिहार को बाजार से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। बुधवार को देर शाम बिजली कंपनी ने बाजार से 20 रुपए प्रति यूनिट की कीमत पर 1400 मेगावाट बिजली खरीदी। अभी सूबे का बिजली संकट कम से कम एक सप्ताह तक कायम रहेगा।

बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति 20 लाख टन तक बढ़ाई गई : जोशी
कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि ताप बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति मंगलवार को 20 लाख टन को पार कर गई है। देश के विभिन्न बिजली संयंत्र इस समय कोयले की कमी से जूझ रहे हैं और इसके कारण बिजली का संकट पैदा हाे गया है। कई जगह कटाैती करनी पड़ रही है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथाॅरिटी के नेशनल पावर पाेर्टल के अनुसार कई राज्याें में प्लांट्स अपनी क्षमता से कम बिजली उत्पादन कर रहे हैं।

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