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रूसा की बैठक:शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों को दिखाया आईना, कहा- एक तो राज्य में शिक्षकों की कमी है, जो हैं वे भी अपना शत-प्रतिशत नहीं देते

पटना2 महीने पहले
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कार्यक्रम का शुभारंभ करते शिक्षा मंत्री विजय चौधरी बोले-उच्च शिक्षण संस्थानों के वित्तीय प्रबंधन की होगी ऑनलाइन मॉनिटरिंग। - Dainik Bhaskar
कार्यक्रम का शुभारंभ करते शिक्षा मंत्री विजय चौधरी बोले-उच्च शिक्षण संस्थानों के वित्तीय प्रबंधन की होगी ऑनलाइन मॉनिटरिंग।

शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने यूनिवर्सिटी और कॉलेज के शिक्षकों को आईना दिखाया। कहा-सरकार यह मानती है कि राज्य में शिक्षकों की कमी है। लेकिन जो शिक्षक हैं,वे भी अपना शत-प्रतिशत नहीं देते हैं। अगर दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ वे सीमित संसाधन में भी प्रयास करें तो राज्य की शिक्षा की स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और राज्य के बच्चें और बेहतर करेंगे।

शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए विश्वविद्यालय सेवा आयोग शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरु कर दी है। शनिवार को शिक्षा मंत्री, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रुसा) के मेन्टरिंग पोर्टल का लोकार्पण करने के बाद यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के शिक्षक और प्रतिनिधियों को सं‍बोधित कर रहे थे।

जानबूझकर की गई गड़बड़ी और मानवीय भूल से हुई गड़बड़ी में बारीक फर्क, एकाउंटिंग के काम को गंभीरता से लें
शिक्षा मंत्री ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के शिक्षकों को वित्तीय गड़बड़ी को लेकर चेताया। कहा-जानबुझ कर की गई गड़बड़ी और मानवीय भूल के कारण हुई गड़बड़ी में बड़ा ही बारीक फर्क है। जानबूझ कर की गई गड़बड़ी को गबन, घपला और घोटाला कहा जाता है। मानवीय भूल के कारण हुई गड़बड़ी भूल है। इसलिए भविष्य की परेशानी से बचने के लिए सरकारी संस्थानों में काम करने वाले लोगों को एकाउंटिंग को गंभीरता से लेनी चाहिए।

पीएफएमएस पर देनी होगी रिपोर्ट
उच्च शिक्षण संस्थानों की वित्तीय प्रबंधन की ऑनलाइन मॉनेटरिंग होगी। इसके लिए पब्लिक फाइनेंस सिस्टम (पीएफएमएस) लागू की गई है।यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को सभी तरह की वित्तीय जानकारी ऑनलाइन इस पोर्टल पर अपलोड करना होगा। वित्तीय गड़बड़ी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

नैक के लिए संस्थान सूचनाएं जरूर दें
नैक मान्यता के लिए पार्टिसिपेट करे यूनिवर्सिटी और कॉलेजों नैक एक्रिडिएशन प्राप्त करने के लिए जो प्रक्रिया है उसमें यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को भाग लेना चाहिए। जो भी सूचनाएं मांगी जाती है उससे देना चाहिए। कमियों को पता चलता है,तभी सुधार होती है। सरकार कभी संस्थानों को सूचना छुपाने के लिए नहीं कहती है।

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