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हाईकोर्ट सख्त:कोरोना से मौत के सही आंकड़े नहीं दे रही बिहार सरकार, ये कैसा गुड गवर्नेंस? कितनी जानें गईं, यह जानना लोगों का मौलिक हक

पटनाएक महीने पहले
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खंडपीठ ने 28 पन्नों के आदेश से यह तय किया है कि कोरोना से हुई मौत के आंकड़ों को जानना लोगों का मौलिक अधिकार है - Dainik Bhaskar
खंडपीठ ने 28 पन्नों के आदेश से यह तय किया है कि कोरोना से हुई मौत के आंकड़ों को जानना लोगों का मौलिक अधिकार है

कोरोना से हुई मौत के आंकड़ों को सार्वजनिक करने में बिहार सरकार बेवजह आनाकानी कर रही है। हाई कोर्ट में शिवानी कौशिक व अन्य की जनहित याचिका की सुनवाई के क्रम में मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायमूर्ति एस.कुमार की खंडपीठ ने शुक्रवार को कहा कि सरकार का यह अड़ियल रुख उचित नहीं है। क्योंकि यह न तो कानूनन सही है और न ही यह गुड गवर्नेंस की कसौटी पर खरा उतरता है। पारदर्शिता ही गुड गवर्नेंस की कसौटी है। और जब केंद्र व राज्य सरकार नेशनल डाटा शेयरिंग एसिसिबिलिटी पॉलिसी-2012 को सफल बनाने में जुटी हों तब यह और जरूरी हो जाता है।

ऐसे में डिजिटल प्लेटफार्म पर कोरोनों से कितनी मौतें हुईं, यह जानकारी सरकार खुद दे क्योंकि राज्य की जनता को यह जानने का कानूनी अधिकार है। सरकार जनता को, खासकर ग्रामीण इलाकों में, ऑनलाइन सूचानाएं हासिल करने के प्रति जागरूक भी करे। कोर्ट ने कहा मौतों के आंकड़ों में हुई गड़बड़ी सामने आने के बाद भी अबतक जन्म-मृत्यु निबंधन के पोर्टल जन साधारण के लिए सुलभ नहीं हैं। कोर्ट इसके बारे में बार-बार कह चुकी है लेकिन सरकार उदासीन रही है।

बार-बार कहने के बाद भी पोर्टल अपडेट नहीं होने पर नाराज हाईकोर्ट ने कहा- सरकार की उदासीनता की क्या है वजह

खंडपीठ ने 28 पन्नों के आदेश से यह तय किया है कि कोरोना से हुई मौत के आंकड़ों को जानना लोगों का मौलिक अधिकार है और सही व सटीक आंकड़े देना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। पोर्टल्स पर जानकारी देने के मामले में राज्य सरकार के रुख को मायोपिक (अदूरदर्शी) बताते हुए कोर्ट ने सरकार को सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी याद दिलाई कि रोजाना और रुटीन बिजनेस को गोपनीयता की चादर से ढंकना जनहित में ठीक नहीं है। राज्य सरकार ने कोरोना की दूसरी लहर से बिहार में हुई मौत का जो आंकड़ा दिया था, उसकी गड़बड़ी और सूबे के डिजिटल पोर्टल में जानकारी ससमय अपलोड नहीं होने की आदत को देखते हुए कोर्ट यह महसूस

करती है कि सूबे के जन्म-मृत्यु निबंधन से जुड़े तमाम पोर्टल्स को अपडेट कर उसे जन साधारण को सुलभ कराना जरूरी है। कोर्ट ने सख्त हिदायत दी कि राज्य सरकार, पोर्टल्स को अपडेट करे और पिछले एक साल में बिहार में हुई हर प्रकार की मौत की सटीक जानकारी डाले जिसमें कोरोना से हुई मृत्यु भी शामिल हो। वहीं कोर्ट ने यह भी आगाह किया है कि कोरोना मौत को छोड़कर अगर कुछ मौतों की जानकारी लोगों की निजता के संवैधानिक अधिकार के दायरे में आती है तो सरकार उसका भी ख्याल रखे।

राज्य सरकार की दलीलें खारिज
हाईकोर्ट ने इस बात पर अफसोस जताया कि बार-बार कहने पर भी सरकार जन्म-मृत्यु के तमाम पोर्टल्स को अपडेट कर उसे जनता के सामने खोलने में आनाकानी कर रही थी। कोर्ट ने सरकार की इन दलीलों को खारिज किया कि ये पोर्टल आम पब्लिक के लिए नहीं खोले जा सकते क्योंकि वह भारत सरकार के अधीन होता है।

पोर्टल्स पारदर्शी व जनसुलभ हों
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि बिहार में रह रहे लोगों की पहुंच राज्य के जन्म मृत्यु से जुड़े तमाम डिजिटल पोर्टल पर हो जो ससमय अपडेट होते रहें। इसके साथ सभी पोर्टल्स पर पिछले एक साल से कोविड से हुई मौत की सटीक जानकारी रहे और सभी पोर्टल्स पारदर्शी और जनसुलभ हों।

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