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सख्ती:हाईकोर्ट ने पूछा- राज्य में कैसे बिक रहीं प्रतिबंधित दवाएं

पटना12 दिन पहले
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  • अफसरों की इसमें मिलीभगत नहीं तो लापरवाही निश्चित, यह भोपाल गैस त्रासदी की याद दिलाती है

पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि सूबे में प्रतिबंधित दवाएं आखिर बिक कैसे रहीं हैं, जबकि इसके लिए लाइसेंस नहीं होता है। कोर्ट की मौखिक टिप्पणी रही-यह स्थिति हमें भोपाल गैस कांड की याद दिलाती है। चीफ जस्टिस संजय करोल तथा जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा की खण्डपीठ ने बुधवार को प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री व निर्माण के मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को आदेश दिया-एक हफ्ते में बताएं कि उन अफसरों के खिलाफ क्या कदम उठाया गया है या उठाया जा रहा है, जो इस राज्य में प्रतिबंधित दवाओं के निर्माण या बिक्री के लिए जिम्मेदार हैं? प्रज्ञा भारती एवं राजीव कुमार ओझा ने इस मामले में अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की हुईं हैं।

सुनवाई के दौरान इस मामले के कोर्ट मित्र राजीव कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार केवल प्राइवेट दवा विक्रेताओं पर ही कार्रवाई कर मामले को निपटा रही है। राज्य में प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री हो रही है लेकिन पता नहीं कैसे ऐसा करने वाले अफसर जांच से बच जाते हैं? उनका कहना था कि अफसरों की ऐसी लापरवाही, लोगों के जीवन से सीधा खिलवाड़ है।

कोर्ट का कहना था कि जब इन दवाओं का लाइसेंस ड्रग कंट्रोलर ने नहीं दिया तो फिर ये दवाएं बाजार में आईं कैसे? इसका निर्माण बिहार में कैसे हुआ? ड्रग इंस्पेक्टर व कारखाना निरीक्षक क्या कर रहे हैं? अगर इन अफसरों की इसमें मिलीभगत नहीं है, तो कम से कम उनकी लापरवाही तो निश्चित है। ऐसी लापरवाही भोपाल गैस त्रासदी की याद दिलाती है। अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।
व्यवसायियों की सिक्योरिटी डिपॉजिट रोकने पर एक्साइज कमिश्नर को किया गया तलब

हाईकोर्ट ने उत्पाद विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। मसला, व्यवसायियों की सिक्योरिटी डिपॉजिट को रोकने का है। अशोक कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजय करोल व जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा की खंडपीठ ने एक्साइज कमिश्नर को कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता के वकील सूरज नारायण यादव ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता के लाइसेंस की मियाद 1997 में ही खत्म हो गयी थी। विभाग के यहां उनका 6 लाख रुपया सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में पड़ा है। एक्साइज विभाग का कहना था कि सेल्स टैक्स की बकाया राशि काटने के बाद ही जमानत की राशि वापस की जाएगी।

यह मामला सेल्स टैक्स ट्रिब्यूनल में भी गया। ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के बाद 2017 में याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला दिया। इसके बावजूद एक्साइज विभाग ने सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस नहीं किया। सो, हाईकोर्ट आना पड़ा। कोर्ट ने कहा-एक्साइज कमिश्नर यहां आकर स्थिति स्पष्ट करें।

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