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बिहार की राजनीति का अफसरशाही पर साइड इफेक्ट:सत्ता बदलते ही अफसरों की मुश्किलें बढ़ती हैं, पूर्व DGP ने खोला बड़ा राज

पटनाएक महीने पहलेलेखक: मनीष मिश्रा

कहानी लोकसभा चुनाव 2014 की है। नीतीश कुमार भाजपा से अलग हो गए थे। तब उन्होंने राज्य की सभी लोकसभा सीटों पर पार्टी का प्रत्याशी उतारा। खुद सीएम थे तो पूरा भरोसा भी था, लेकिन परिणाम से मुंह की खानी पड़ी। महज दो प्रत्याशियों के सिर जीत का सेहरा बंध सका। पार्टी की बड़ी हार की जिम्मेदारी लेते हुए नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया।

राज्य की सत्ता जीतन राम मांझी के हाथ आ गई। फिर क्या था, अफसरशाही में जो हुआ वह बिहार के लिए इतिहास बन गया। सत्ता के इस परिवर्तन के साथ एक बड़ी कहानी जुड़ी है, जिसे अब तक कभी कहीं नहीं गई थी। इसका खुलासा पूर्व डीजीपी अभयानंद ने अपनी किताब अन बाउंडेड के अंतिम चैप्टर ‘द स्टोरी दैट वाज नेवर टोल्ड’ में किया है। पढ़िए कैसे बिहार की राजनीति का अफसरशाही पर साइड इफेक्ट होता है...

IPS की कलम ने खोला बड़ा राज

1977 बैच के रिटायर्ड IPS और बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद की कलम ने 343 पेज की किताब अन बाउंडेड में कई राज खोला है। हाल ही में रिलीज हुए किताब में माई एक्सपेरीमेंट विथ लॉ, फिजिक्स, पुलिसंग एंड सुपर 30 पर कई चैप्टर हैं। पूर्व डीजीपी अभयानंद बताते हैं कि 31 अगस्त 2011 को तत्कालीन सीएम नीतीश कुमार ने उन्हें बिहार का डीजीपी बनाया था। इस पद के लिए उन्होंने कभी सीएम के सामने इच्छा भी नहीं जताई थी।

सीएम से अभयानंद ने डीजीपी बनने से पहले बोला था कि जिस दिन लगे कि राजनीति भार बन सकती है, उस दिन बता दीजिएगा मैं पद छोड़ दूंगा। जब 2014 में नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिया तो स्थिति भी ऐसी ही बन गई। राजद के साथ अन्य कई दल सरकार में शामिल हो रहे थे। ऐसे में डीजीपी को राजनीतिक भार की चिंता सताने लगी। उन्होंने सीएम से डीजीपी के पद से हटने की इच्छा जता दी।

पूर्व डीजीपी अभयानंद की किताब।
पूर्व डीजीपी अभयानंद की किताब।

नीतीश के इस्तीफे के साथ डीजीपी का फैसला

सीएम नीतीश के इस्तीफा देने के 24 घंटे के अंदर ही अभयानंद उनके आवास पहुंच गए और बदली राजनीतिक परिस्थिति में डीजीपी के पद पर काम करने से मना कर दिया। नीतीश कुमार से कह दिया कि बदली राजनीतिक समस्या का समाधान उनके पास नहीं है। पूर्व डीजीपी ने अपनी किताब में यह साफ कर दिया है कि सरकार बदलने के बाद अफसरों की मुश्किल बढ़ जाती है।

ऐसे में जो सिस्टम बनता है, उसमें हर अधिकारी स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाता है। पूर्व डीजीपी ने इशारों में यह भी साफ कर दिया है कि अफसरों की कार्यप्रणाली सरकार के हिसाब से बदलती है। ऐसे अफसर जो सरकार के बदलाव के बाद खुद को सेट नहीं कर पाते, वह खुद से पद से हटने की इच्छा जता देते थे। ऐसे अफसरों को काम करने में घुटन होती है।

सीएम के हटते ही दिखने लगा था भविष्य

अभयानंद ने बताया कि वह लगभग 3 साल डीजीपी रहे। वर्ष 2014 के पूर्व तक बिहार पुलिस में उनके योगदान से पुलिसिंग काफी अच्छी चली, लेकिन जब नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिया और सरकार में कई अन्य दल आ रहे थे। ऐसे में उन्हें बिहार का फ्यूचर दिख रहा था। वह बिहार के भविष्य के साथ अपना भविष्य भी देख रहे थे। कहीं न कहीं से उन्हें राजनीतिक दबाव में काम करने की चिंता सता रही थी।

किताब में पूर्व डीजीपी ने लिखा है कि बिहार का फ्यूचर दिखने के बाद वह खुद से इस पद से हटने की इच्छा पूर्व सीएम के सामने रख गए। नए सीएम के शपथ ग्रहण के बाद अभयानंद को हटाने का आदेश उनकी इच्छा के अनुसार जारी करते हुए डीजी होमगार्ड के पद पर बने रहने को कहा गया। इसी पद से अभयानंद रिटायर हुए। अभयानंद बताते हैं कि बिहार के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब किसी डीजीपी ने खुद से पद छोड़ने की इच्छा जताई। बिहार के इतिहास में अब तक जितने भी डीजीपी बनाए गए हैं। वह उस पद से ही रिटायर हुए हैं।

यूपी में भी चर्चा में रहे डीजीपी

अभयानंद उत्तर प्रदेश में भी चर्चा में रहे हैं। पहली बार योगी की सरकार बनने के बाद योगी ने दो अफसरों को क्राइम कंट्रोल का सिस्टम समझने के लिए अभयानंद के पास भेजा था। बिहार में अभयानंद ने पुलिसिंग में कई बड़े प्रयोग किए हैं। अभयानंद ने चार्जशीट को लेकर बड़ा प्रयोग किया था जिससे अपराधियों को अधिक से अधिक सजा दिलाई गई। इसके साथ ही इन्वेस्टिगेशन को पूरी तरह से वैज्ञानिक बनाया। पहले बयान के आधार पर इन्वेस्टिगेशन होता था लेकिन इसके वैज्ञानिक आधार पर सबूतों के साथ शुरू कराया गया।

अफसरों की मुश्किलें बढ़ जाती है

विधि विज्ञान प्रयोगशाला को लेकर बड़ा काम किया गया। पूर्व डीजीपी अभयानंद ने अपनी किताब में यूपी सरकार को टिप्स देने का उल्लेख किया है। डीजीपी ने 2014 की घटना का उल्लेख करते हुए किताब में बिहार में सरकार बदलने के बाद अफसरों की बढ़ने वाली मुश्किल का खुलासा किया है। उनका कहना है कि जब भी सरकार बदलती है तो मुश्किल अफसरों की बढ़ जाती है।

लेकिन, बिहार के इतिहास में पहली बार हुआ जब उन्होंने डीजीपी के पद से खुद से हटने की इच्छा जताई। वह इसके पीछे भविष्य में काम में आने वाले राजनीतिक दबाव काे लेकर बड़ा निर्णय ले लिया। अन बाउंडेड किताब में डीजीपी ने अंतिम पेज में जो कुछ लिखा है, वह मौजूदा हालात में पूरी तरह से फिट हैं। इस बार भी सरकार बदली है, कुछ नए दल नए राजनेता शामिल हुए हैं। ऐसे हालात में ही अफसरों को काम करना हाेता है।