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एम्स में ब्लैक फंगस से पीड़ित 108 मरीज भर्ती:अस्पतालों में ब्लैक फंगस की दवा खत्म परेशान परिजन बोले, फिर इलाज कैसा

पटना13 दिन पहले
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आज आवंटन नहीं मिला तो बिगड़ सकती है मरीजों की हालत। - Dainik Bhaskar
आज आवंटन नहीं मिला तो बिगड़ सकती है मरीजों की हालत।

ब्लैक फंगस की दवा पूरी तरह से खत्म हो गई है। न एम्स में भर्ती मरीजों को इंजेक्शन मिल रही है और न ही आईजीआईएमएस में। पीएमसीएच में रविवार को तो काम चल गया, लेकिर सोमवार ेलिए कोटा उपलब्ध नहीं है। निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए भी दवा उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभी दवा आने में एक से दो दिनों का समय लगेगा। अगर सोमवार को दवा नहीं मिलती है, तो मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। इधर, परिजन डॉक्टरों से पूछ रहे- बिना दवा इलाज कैसा?

वर्तमान में एम्स में ब्लैक फंगस से पीड़ित 108 मरीज भर्ती हैं। इसके अलावा आईजीआईएमस में 125, पीएमसीएच में 28, एनएमसीएच में 11 और निजी अस्पतालों में 100 से अधिक मरीज भर्ती हैं। अब भर्ती मरीजों को विकल्प के रूप में पोशाकोना जोल टैबलेट देने की तैयारी है। यह भी महंगी दवा है। एक टैबलेट की कीमत 500 है और प्रतिदिन एक मरीज को तीन टैबलेट देनी पड़ती है। पहले इंजेक्शन के रूप में एम्फोटेरेसिन बी इंजेक्शन दी जा रही थी।

14 और नए मरीज मिले
रविवार को भी ब्लैक फंगस के 13 नए मरीज मिले हैं। पटना एम्स में रविवार को कोई नया मरीज भर्ती नहीं हुआ है। अभी यहां 108 मरीज भर्ती हैं। सोमवार को कुछ मरीज डिस्चार्ज होंगे तो नए मरीज भर्ती होंगे। वैसे एम्स में ब्लैक फंगस से संक्रमित मरीज को कंबाइंड ओपीडी के जरिए भर्ती होने की व्यवस्था है। दो ऐसे मरीज भर्ती हुए जो कोरोना और ब्लैक फंगस दोनों से संक्रमित थे।

आईजीआईएमएस में तीन नए मरीज भर्ती हुए हैं। पांच मरीजों की मौत हुई है। यहां ब्लैक फंगस के भर्ती मरीजों की संख्या 125 हो गई है। वहीं पीएमसीएच में 9 नए मरीज भर्ती हुए हैं। यहां 28 मरीज भर्ती हैं। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं होने से मरीज एम्स या फिर आईजीआईएमएस में चले जा रहे हैं। एनएमसीएच में दो नए मरीज भर्ती हुए है। यहां 11 मरीज भर्ती हैं।

परिजनों ने कहा : भर्ती कराए दो दिन हो गए, अबतक नहीं मिली दवा
चितकोहरा के कारू सिंह को दिन पहले परिजनों ने आईजीआईएमएस में भर्ती कराया था। बेटे गिरीश का कहना था कि यहां दवा उपलब्ध होगी और इलाज तुरंत शुरू हो जाएगा, इसलिए भर्ती कराया गया था। पर भर्ती कराए दो दिन हो गए उन्हें अबतक ब्लैक फंगस की दवा नहीं चली। परिजन अब दवा को लेकर परेशान हैं। दवा कब मिलेगी। दो दिन से उम्मीद लगाए बैठे हैं।

रविवार शाम तक उन्हें दवा नहीं मिली। कारू सिंह के बेटे अस्पताल के बाहर से दवा के जुगाड़ में जुटे हैं। बड़ा बेटा पिता के पास तो छोटा बाहर पेड़ के नीचे रिश्तेदारों के साथ रह रहा है। सभी एक ही चर्चा करते मिले, दवा अबतक नहीं मिली। दवा कहां मिलेगी? क्या प्राइवेट में दवा उपलब्ध होगी?

गंभीर मरीजों को दी जा रही प्राथमिकता
एम्स में ईएनटी विभाग की हेड डॉ. क्रांति भावना भी मानती हैं कि दवा की कमी है। जरूरत के अनुसार दवा उपलब्ध नहीं हो रही है। परिजनाें को लगता है डॉक्टर ही दवा नहीं दे रहे हैं। दवा की व्यवस्था करने की हर संभव कोशिश की जा रही है। चिकित्सक कहते हैं दवा उपलब्ध नहीं रहेगी तो हमलोग क्या कर सकते हैं? बिना दवा इलाज कैसे होगा। जिस मरीज को दवा दी जाती है, उसे प्रतिदिन पांच डोज देनी पड़ती है। एेसा नहीं एक-एक डोज सभी को दे दिया। दवा जिस तरह से उपलब्ध हो रही है, उसके मुताबिक पहले गंभीर मरीज को प्राथमिकता दी जा रही है।

बिना काेर्स पूरा किए किया डिस्चार्ज
पटना सिटी के एन सलीम ब्लैक फंगस से संक्रमित होकर अाईजीअाईएमएस में भर्ती हुए थे। 14 दिन पर ही उन्हें रविवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। उनकी सर्जरी भी हुई है। उनकी बेटी जैनब सलीम का आरोप है कि दवा का कोर्स पूरा नहीं किया गया। सिर्फ सात डोज दवा की पड़ी है। डिस्चार्ज करने के बाद कहा गया है कि सुबह ओपीडी में आइएगा, वहीं दवा मिल जाएगी।

जैनब कहती हैं कि जब भर्ती रहने पर दवा का कोर्स पूरा नहीं हुआ तो क्या अब ओपीडी में दवा मिलेगी? आरा बड़हरा के रामबाबू सिंह भी ब्लैक फंगस से पीड़ित हैं, उनकी भी सर्जरी हुई है। परिजन कहते हैं कि शनिवार को दवा नहीं मिली थी। बताया गया कि दवा आएगी तो मिल जाएगी। भागलपुर के रूबी देवी के परिजन कहते हैं 15 दिन से भर्ती है और दवा रहने पर मिलती है। शनिवार को दवा नहीं मिली।

नाम मत लिखिएगा, मेरा मरीज आईसीयू में है...दवा नहीं मिल रही है

मधुबनी के गंगाराम के परिजन को पता ही नहीं है कि उन्हें हुआ क्या है। कोरोना से निगेटिव हो गए थे, फिर खून की उल्टी होने लगी। इसके बाद उन्हें आईजीआईएमएस में भर्ती कराया गया। दवा के बारे में कोई जानकारी नहीं है। आईजीआईएमएस में अबतक ब्लैक फंगस के 155 मरीज भर्ती हो चुके हैं। इनमें आठ मरीजों को छुट्टी दी गई है।

अबतक 17 मरीजों की मौत हो चुकी है। ब्लैक फंगस के 72 मरीजों की सर्जरी हो चुकी है। इसमें 40 इंडोस्कोपी और 32 ओपन सर्जरी हुई है। अभी 124 मरीज भर्ती हैं। इधर, पटना एम्स में जिनको दवा नहीं मिली है, उनके परिजन शिकायत तो करते हैं पर कहते हैं लिखिएगा मत। मेरा मरीज आईसीयू में है। ब्लैक फंगस के कुछ मरीज दो सप्ताह से आईसीयू में हैं। परिजनों का कहना है कि इलाज में कमी नहीं है। पर दवा नहीं मिलेगा

  • बिहार को 1700 वॉयल ब्लैक फंगस के इंजेक्शन का आवंटन हुआ है। एक-दो दिनों में अस्पताल तक पहुंचने की उम्मीद है। - मंगल पांडेय, स्वास्थ्य मंत्री
  • ब्लैक फंगस का इंजेक्शन खत्म है,कल तक आने की उम्मीद है। इंजेक्शन की जगह पोशाकोना जोल दवा दी जाएगी। कल तक दवा अस्पतालों को मिल जाने की उम्मीद है। - कमला कुमारी, असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर , पटना ग्रामीण
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