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  • The Whole Family Was Infected, I And Mother Were Two Hospitalized, Wife And Children Were In Haem Islation, But Did Not Lose Courage; Defeated Corona

जन संकल्प से हारेगा कोरोना:पूरा परिवार संक्रमित, मैं और मां दो अस्पताल में थे भर्ती, पत्नी व बच्चे हाेम आइसाेलेशन में थे, मगर नहीं हारी हिम्मत; कोरोना को हरा दिया

पटना6 महीने पहले
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  • कवि केदारनाथ मिश्र ‘प्रभात’ के परिवार में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं था, जो संक्रमित न हो

मैं ऐशीष कुमार राजेंद्रनगर में परिवार के साथ रहता हूं। मेरे दादा कवि केदारनाथ मिश्र प्रभातजी थे। मेरे पिता स्व. सराेज कुमार मिश्र राजभाषा विभाग से डिप्टी डायरेक्टर के पद से रिटायर हुए थे। मैं, मेरी 77 साल की मां निर्मला देवी, 35 साल की मेरी पत्नी गरिमा मिश्रा, मेरे दाे बेटे 14 साल का अर्धेन्दु मिश्रा और 12 साल का काैस्तव मिश्रा एक ही घर में रहते हैं। मेरी ननिहाल और ससुराल वाराणसी में है। 22 मार्च काे पूरा परिवार वाराणसी गया था। उस वक्त काेराेना की इतनी रफ्तार नहीं थी। 28 मार्च काे लाैटे तो सबाें में काेराेना के लक्षण पाए गए। 29 मार्च काे जांच कराई। 31 मार्च काे परिवार के सभी लाेगाें की आरटीपीसीआर रिपाेर्ट पाॅजिटिव ऐई। मां को सांस लेने में तकलीफ हाेने लगी। उनका ऑक्सीजन लेवल भी घटकर 90 के नीचे आ गया। उन्हें 2 अप्रैल काे एम्स में एडमिट करा दिया गया।

मैं जगदीश मेमाेरियल अस्पताल में एडमिट हाे गया। पत्नी गरिमा व दाेनाें बच्चे हाेम आइसाेलशेन में रहे। पत्नी और परिवार ने हिम्मत नहीं हारी। पत्नी खुद हाेम आइसाेलशेन में रही और दाेनाें बच्चाें काे अलग रखा। पाॅजिटिव हाेने के बावजूद वह खाना बनातीं और मुझे, मेरी मां काे खाना अस्पताल भेजवातीं। बच्चाें काे घर पर देखभाल करने के साथ उन्हें दवा खिलाती। पत्नी ने सबाें काे संभाल कर रखा। मां गंभीर थी, इसलिए उनके लिए चिंता ज्यादा हाे रही थी। मां अस्पताल से ही पत्नी, मुझे और बच्चाें काे ढाढ़स दिला रही थीं। उनकी बाताें से मैं पाॅजिटिव साेचने लगा। बच्चाें काे समझाता रहा। हां, परिवार के इस संक्रमण में मेरे ड्राइवर विनाेद कुमार ने सबाें का जो केयर किया वह कभी नहीं भुला सकता। चाचा अरुण ने भी परिवार की इस घड़ी में पूरी मदद की। इनके अलावा डाॅक्टर शंकर नाथ ने मेरी मां काे एम्स में एडमिट कराया। वे बराबर चिकित्सकीय सलाह देते रहे। मां 10 दिन के बाद निगेटिव हाेकर घर आ गईं। मैं भी ठीक हाेकर घर आ गया। मां काे फिर कुछ तकलीफ हुई ताे दोबारा एम्स में एडमिट कराया और वह फिर ठीक हाेकर घर आ गईं। मेरा पूरा परिवार अब ठीक है। पहले की तरह जिंदगी गुजर रही है। काेराेना काे मात देनी है ताे पाॅजिटिव साेच जरूरी है। परिवार और परिचित लाेगाें का साथ हाेना चाहिए। काेराेना काेई ऐसा वायरस नहीं जिससे जंग नहीं जीती जा सकती। केवल मन काे मजबूत रखना है।

कवि केदारनाथ मिश्र की 77 साल की बहू, उनके पाेते, पाेते की पत्नी और पाेते के दाेनाें बेटे हाे गए संक्रमित, पाेते की पत्नी ने सबकाे संभाला, सास काे एम्स में एडमिट कराया, पति काे निजी अस्पताल में, खुद बच्चाें काे लेकर घर पर रहीं और सबों ने काेराेना से जंग जीत ली

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