सुखद खबर:इस साल पटना में नहीं होगा जल संकट, वाटर लेवल 50 फीट पर

पटना5 महीने पहले
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  • जून में अच्छी बारिश होने से शहर में वाटर लेवल ठीक, जुलाई 2010 में पटना का वाटर लेवल था 55 फीट

राजधानीवासियों को इस साल जल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। शहर का जलस्तर अभी 50 फीट पर बरकरार है। इसकी वजह जून में अच्छी बारिश होना है। इससे शहर का वाटर लेवल नीचे नहीं गया। 50 फिट पर पानी रहने पर बोरिंग प्रेशर के साथ पानी छोड़ती है। ऐसे में 10 तल्ला अपार्टमेंट पर भी आसानी से पानी पहुंच जाएगा।

वाटर बोर्ड के अधिकारी के अनुसार जून-जुलाई में शहरवासियों को 10 साल बाद पानी भरपूर मिल रहा है। जुलाई 2010 में पटना का वाटर लेवल 55 फीट था। वहीं 2015 के जून-जुलाई में वाटर लेवल 55-60 फीट नीचे चला गया था। 2019 में शहर का वाटर लेवल 70 से 75 फीट नीचे चला गया था, जिसकी वजह से शहर के विभिन्न वार्डों में पानी की समस्या आने लगी थी। इस बार वाटर लेवल 50 फीट पर होने से पानी की समस्या नहीं होगी।

वाटर लेवल नीचे जाने पर बोरिंग में डालनी पड़ती है 10-15 की कॉलम पाइप

जून-जुलाई, 2021 में शहर के हर इलाका में वाटर लेवल 50 फीट पर बरकरार है। इसकी वजह से नगर निगम से लेकर नगर पार्षद तक पानी की समस्या नहीं है। 2019 में वाटर लेवल 70 से 75 फीट नीचे चला गया था। 2020 में वाटर लेवल 55 से 60 फीट नीचे था। वाटर लेवल नीचे जाने के कारण सरकारी बोरिंग से लेकर निजी बोरिंग में 10 से 15 फीट की कॉलम पाइप अलग से डालनी पड़ती है। हालांकि 2021 में मई-जून में निगम के अंदर आने वाले विभिन्न वार्डों में चार बोरिंग में प्रेशर की समस्या आ गई थी। 10 फीट की कॉलम पाइप डाली गई, उसके बाद पानी प्रेशर से देने लगा।

लॉकडाउन का भी असर : राजधानी में पिछले एक साल से भूमिगत जल की समस्या से लोगों को निजात मिल रही है। 2020 में लॉकडाउन होने के कारण पानी की खपत शहर में कम हुई थी। इसकी वजह से वाटर लेवल में ज्यादा कमी नहीं पाई थी। अमूमन, जून-जुलाई में राजधानी का वाटर लेवल 70 से 75 फीट के करीब रहता है। लेकिन 2020 में वाटर लेवल 55 फीट रहा है। वर्ष 2019 में इसी माह में यह 75 फीट पर था।

पिछले साल की तुलना 15% पानी की अधिक खपत
जानकारों के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस साल 10 से 15 फीसदी पानी की अधिक खपत हो रही है। पिछले साल की तुलना में 4 घंटे अधिक सरकारी बोरिंग चल रही है। पिछले साल लॉकडाउन की वजह से पानी की खपत कम थी तो 14 घंटे बोरिंग चलता था। इस साल 18 घंटे तक बोरिंग चल रहा है। कोरोना के डर से पिछले साल पीने के लिए 10% लोग बोतलबंद पानी का इस्तेमाल कर रहे थे। इस साल यह स्थिति नहीं है।

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