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बिहार में 16 ग्रामीण बैंक थे, अब सिर्फ दो बचे:उनका भी प्रायोजक बैंक पीएनबी व सीबीआई में हो सकता है विलय, ग्रामीण बैंकों के नन परफार्मिंग असेट बढ़ रहे

पटना3 महीने पहले
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बैंक के उपभोक्ताओं के हितों के लिए रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित ऋण की तुलना में सम्पति कम (क्रेडिट रिज़र्व एसेट 9 % से भी कम) - Dainik Bhaskar
बैंक के उपभोक्ताओं के हितों के लिए रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित ऋण की तुलना में सम्पति कम (क्रेडिट रिज़र्व एसेट 9 % से भी कम)

देश के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों खासकर छोटे किसान, कृषि श्रमिकों और दस्तकारों को बैंकिंग सुविधा उपलब्ध करवाने के मकसद से स्थापित कि गए ग्रामीण बैंक आज बंदी के कगार पर हैं। ग्रामीण बैंकों के नन परफार्मिंग असेट में लगातार वृद्धि हो रही है। रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों के लिए निर्धारित सीआरएआर (कैपिटल टू रिस्क वेटेज रेशियो) यानी पूंजी अनुपात भी मानक से कम हो गया है।

यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बैंक को रिजर्व बैंक अपनी निगरानी में ले सकता है। हालात देखते हुए केंद्र सरकार ने ग्रामीण बैंकों की स्थिति के आकलन के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी संजीव कौशिक की अध्यक्षता में एक कमिटी गठित की थी। कमिटी ने ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ता को देखते हुए ग्रामीण बैंकों का विलय प्रयोजक बैंकों में करने की सिफारिश की है।

आठ बैंक को मिलाकर पंजाब नेशनल बैंक का दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक बनाया गया

ग्रामीण बैंक के स्थापना का उद्देश्य
ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे किसान, कृषि श्रमिकों और दस्तकारों को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध करवाने के मकसद से ग्रामीण बैंकों का गठन आरआरबी अधिनियम, 1975 के अंतर्गत किया गया था। देश में1982 तक ग्रामीण बैंकों की संख्या 196 थी जो अब 48 हो गई है। बिहार में 16 ग्रामीण बैंक थे जिनमें मात्र 2 बचे हैं।

चार दशक में भी अपने पैरों पर खड़े ना हो सके
बिहार में ग्रामीण बैंक को व्यावहारिक बनाने के लिए विलय शुरू हुआ तो सेन्ट्रल बैंक के आठ ग्रामीण बैंकों को मिलाकर उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक और शेष 8 को मिलाकर पीएनबी का दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक बनाए गए। चम्पारण, सारण, सीवान, गोपालगंज, वैशाली, मिथिला, मधुबनी और कोशी ग्रामीण बैंक का प्रायोजक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया था।

जबकि भोजपुर, रोहतास, मगध, नालंदा और पाटलिपुत्र ग्रामीण बैंक पीएनबी के अधीन थे। यूको बैंक ने बेगूसराय, मुंगेर, भागलपुर और बांका ग्रामीण बैंक को प्रायोजित किया और स्टेट बैंक ने समस्तीपुर ग्रामीण बैंक को प्रायोजित किया। जब बैंकों का विलय शुरू हुआ तो सेन्ट्रल बैंक के आठ ग्रामीण बैंक को मिलाकर उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक और बाकी बचे 8 को मिलाकर पीएनबी का दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक बना। लेकिन बीते चार दशक में अधिकांश ग्रामीण बैंक अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाए।

शेयर पैटर्न : पुनर्गठन योजना के तहत क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में अपने कुल 50% शेयर को प्रायोजक व्यावसायिक बैंक को ट्रांसफर करना है। प्रायोजक बैंक के पास पहले से ही ग्रामीण बैंक का 35% शेयर है। शेष 15% का अंशदान राज्य सरकार का है।

क्या है सीआरएआर : सीआरएआर (कैपिटल टू रिस्क वेटेज रेशियो) यानी पूंजी पर्याप्ता अनुपात, यह बैंक की पूंजी को मापने का तरीका है। यह बैंक की जोखिम वाली पूंजी का प्रतिशत बताता है। इसका इस्तेमाल जमाकर्ताओं के धन की सुरक्षा और वित्तीय तंत्र के स्थायित्व के लिए किया जाता है। डिपॉजिट को नुकसान पहुंचाए बगैर लोन बुक पर बैंक कितना घाटा उठा सकता है, पूंजी पर्याप्ता अनुपात से इसका पता चलता है। यह अनुपात ज्यादा है तो जमाकर्ताओं का जोखिम कम होता है।

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