पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Patna
  • This Time A Direct Competition Between Nokha, Navinagar And Arwal; Three Kushwaha Candidates Are Confused In Kurtha Kushwaha Voters Of Kurtha

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

पड़ताल:इस बार नोखा, नवीनगर और अरवल में सीधी टक्कर; कुर्था में तीन कुशवाहा उम्मीदवारों के बीच उलझ गए हैं कुर्था के कुशवाहा वोटर

पटनाएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
नोखा विधानसभा सीट पर महिला वोटर की सक्रियता अभी महसूस नहीं हो रही। वो अपने घर के पुरुष मतदाताओं की ओर देख रही हैं।
  • नोखा, अरवल, नवीनगर और कुर्था विधानसभा क्षेत्र में जनिए प्रत्याशियों की क्या है स्थिति

नोखा: यादव, राजपूत और कुर्मी-कुशवाहा बाहुल्य इस क्षेत्र में राजद की विधायक अनिता देवी और जदयू उम्मीदवार नागेन्द्र चंद्रवंशी के बीच अंतत: सीधी लड़ाई होनी है। लोजपा और रालोसपा के भी प्रत्याशी हैं। लोजपा से पूर्व सांसद राम अवधेश सिंह के पुत्र डा. कृष्ण कबीर (यादव) और रालोसपा से अखिलेश्वर सिंह (राजपूत) क्षेत्र में घूम रहे हैं। जनता उनसे मिल तो रही है पर झोली भर कर आशीर्वाद देने में कोताही बरत रही है।

अनिता देवी को अपने जाति नोनिया के साथ ही यादव जाति का फुल सपोर्ट मिल रहा है। वहीं जदयू उम्मीदवार नागेन्द्र चंद्रवंशी की जाति कहार की यहां उपस्थिति कम है। उन्हें अति पिछड़ा और कुर्मी के अलावा 50-60 फीसदी कुशवाहा वोटरों पर भी भरोसा है। लोजपा उम्मीदवार की ओर पासवान वोटरों का झुकाव है। पूर्व मंत्री अनिता देवी को माले के समर्थन के कारण पिछले बार की तुलना में स्थिति अच्छी है। यहां मुसलमान वोटर तो उतने नहीं हैं, पर आधार वोट बड़ा है।
डिसाइडिंग फैक्टर 2020 सवर्ण

भाजपा यह सीट लड़ती-जीतती रही है। प्रत्याशी नहीं होने से भाजपा कैडर शिथिल है। उनमें सक्रियता आयी तभी जदयू उम्मीदवार मजबूत स्थिति में होंगे।

मुद्दा जो लोगों की जुबान पर: नोखा में बेरोजगारी मुद्दा लोगों के जुबां पर है। 10 लाख नौकरी का वादा लोगों को दिलासा देता है। कोरोना कोई मुद्दा नहीं है। बिजली और सड़क जदयू उम्मीदवार को फायदा पहुंचा रहा है। अनिता देवी भी राजद-जदयू-कांग्रेस की सरकार में करीब 16 महीने पर्यटन मंत्री थी पर कुछ कर नहीं पायी।

अरवल: माले हार का बदला लेने के करीब, नया चेहरा भाजपा के लिए बन सकता है दिक्कत

अरवल में माले के महानंद प्रसाद 2010 में अपनी हार की टीस मिटा सकते हैं। तब भाजपा-जदयू की मजबूत बांडिग और विकास लहर के बावजूद वह मात्र 4200 मतों से हारे थे। उनको हराने वाले चितरंजन कुमार का इस बार टिकट ही नहीं कटा है भाजपा नेतृत्व ने उन पर यह शर्त भी थोप दी है कि वे पूरे चुनाव अपने क्षेत्र से बाहर रहें। माले को यह सीट चले जाने से रविन्द्र बेटिकट हो गए लेकिन स्वजातीय (कुशवाहा) माले प्रत्याशी के खिलाफ बगावत नहीं की। यह माले के लिए इत्मीनान है।

माले उम्मीदवार की अपनी छवि ठीक है पर जमीन वाली जातियां भूमिहार और यादव माले की विचारधारा से लगातार लड़ते रहे हैं। वैसे इस बार यहां भूमिहार और कुशवाहा वोटर और उम्मीदवार दोनों आमने-सामने हैं। भाजपा की बस एक मुश्किल है, उसका प्रत्याशी नया है। वैसे दो साल से क्षेत्र में दीपक शर्मा पूरी मेहनत भी कर रहे हैं उन्हें भाजपा कैडर और नेतृत्व का सहयोग मिल रहा है।

महिला वोटर भी जाति और कैडर आधारित वोट करेंगी, ऐसा माना जा रहा है।
महिला वोटर भी जाति और कैडर आधारित वोट करेंगी, ऐसा माना जा रहा है।

डिसाइडिंग फैक्टर 2020 रालोसपा

पार्टी प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा की ओर कुशवाहा आकर्षित हुए और प्रत्याशी सुभाषचंद्र यादव को स्वजाीतय यादव और वोट मिला तो भाजपा फायदे में।

मुद्दा जो लोगों की जुबान पर: राजनीति विशेषज्ञों का कहना है कि कुशवाहा वोटरों का जो ट्रेंड रहता है उसके हिसाब से अधिसंख्य वोट इस बार माले उम्मीदवार को मिलेगा। इस क्षेत्र में यादव वोटर 40 हजार और भूमिहार वोटर 35 हजार के करीब हैं। कुशवाहा वोटर की संख्या 20 हजार से ज्यादा है। मुसलमान और पासवान 15- 15 हजार हैं।

नवीनगर: वीरेंद्र के लिए मुश्किल, जदयू और राजद के बीच यहां होगी कांटे की टक्कर

लगातार पिछला दो चुनाव जीतने वाले जदयू के वीरेन्द्र कुमार सिंह इस बार थोड़ी मुश्किल में नजर आ रहे हैं। उन्हें भी इस बात का एहसास हैं। लिहाजा लो-प्रोफाइल में ही सही, लोगों के बीच लगातार जा रहे हैं। झारखंड की सीमा से सटे दूरदराज क्षेत्र में उनके लिए प्लस प्वाइंट हैं कि खेतों में बौना मंसूरी धान लहलहा रहा हैं क्योंकि खेतों तक बिजली पहुंच गई है। पर विधायक का ढीला ढाला रवैया उनसे इस बार कठिन परिश्रम करवा रहा है।

उनके चिरपरिचित प्रतिद्वंदी मथुरा सिंह के बेटे डब्ल्यू सिंह इस बार लालेटन के सहारे मैदान में है। दोनों में सीधी लड़ाई है। पिछली बार भाजपा के गोपाल नारायण सिंह को उनके कारण ही हार का सामना करना पड़ा था। पर इस बार वो राजद के सिंबल पर जदयू उम्मीदवार वीरेन्द्र सिंह को कड़ा मुकाबला देने में लगे हुए हैं।

यहां महिला वोटर उधर ही वोट करती हैं, जहां परिवार के लोग।
यहां महिला वोटर उधर ही वोट करती हैं, जहां परिवार के लोग।

मुद्दा जो लोगों की जुबान पर: पूरे क्षेत्र में यही चर्चा है कि राजपूत वोटर के युवा डब्ल्यू सिंह के साथ होने की सोच रहे हैं तो गंभीर मतदाता वीरेन्द्र सिंह को ही वोट देने का मन बना रहे हैं। वाले छोटे-मोटे काम टालने से ग्रामीण वीरेन्द्र सिंह से रुठे हैं। वहीं दूसरी ओर डब्ल्यू सिंह अपने व्यक्तिगत खर्चे पर ही लाखों का सार्वजनिक काम करा देते हैं।

डिसाइडिंग फैक्टर 2020 राजपूत

मतदाताओं की मन:स्थिति पर ही निर्भर है यहां परिणाम, एक ओर झुका तो पुराना नतीजा बंटा तो पलट सकता है परिणाम।

कुर्था: तीन कुशवाहा उम्मीदवारों के बीच उलझ गए हैं कुर्था के कुशवाहा वोटर

तीन कुशवाहा उम्मीदवारों ने इस बार कुर्था के कुशवाहा वोटरों को फंसा दिया है। जदयू उम्मीदवार और वर्तमान विधायक सत्यदेव सिंह कुशवाहा, पूर्व मंत्री रहे राजद के बागी कुमार वर्मा और रालोसपा के पप्पू वर्मा, तीनों कुशवाहा वोट के दावेदार हैं। जदयू उम्मीदवार सत्यदेव कुशवाहा का बड़बोलपन और उनके विधायक कोटे के काम से नाराज सवर्ण वोटरों को अपनी ओर खींचने के लिये लोजपा के भुवनेश्वर पाठक भी कुर्था की जंग को चतुष्कोणीय बनाने में जुटे हैं।

वैसे पाठक की कर्मभूमि अरवल है पर अरवल से भाजपा उम्मीदवार होने के कारण लोजपा ने उन्हें कुर्था से उम्मीदवार बना दिया है। पप्पू वर्मा भी अरवल में काम करते रहे हैं। दरअसल जदयू के सत्यदेव कुशवाहा की दो विपरित पहचान है। वे विकास के लिये जाने जाते हैं। सीएम उनको पसंद करते ही है, वे लगातार दो चुनाव जीत भी रहे हैं। जो जाति/वर्ग उनको वोट नहीं देता है उनके खिलाफ तो बोलते ही हैं।

कुछ महिला वोटर जदयू उम्मीदवार के पक्ष में दिख रही हैं। लेकिन अभी तस्वीर साफ नहीं।
कुछ महिला वोटर जदयू उम्मीदवार के पक्ष में दिख रही हैं। लेकिन अभी तस्वीर साफ नहीं।

डिसाइडिंग फैक्टर 2020 सवर्ण

मतदाताओं की मन:स्थिति पर ही निर्भर है यहां परिणाम। कुर्था विधानसभाा क्षेत्र में सवर्ण वोटर ही डिसाइडिंग फैक्टर रहेंगे।

मुद्दा जो लोगों की जुबान पर: सत्यदेव के रवैये से नाराज सवर्ण खासकर भूमिहार वोटर विकल्प तलाश रहे हैं। लोजपा उम्मीदवार के पक्ष में सवर्णों ने मतदान किया तो जदयू की मुश्किलें बढ़ जायेंगी। पिछले चुनाव में राजद-कांग्रेस का साथ मिलने से मुसलमानों के बरगायां (पिंजरावां समेत 12 गांव) का पूरा सपोर्ट मिला था।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- यह समय विवेक और चतुराई से काम लेने का है। आपके पिछले कुछ समय से रुके हुए व अटके हुए काम पूरे होंगे। संतान के करियर और शिक्षा से संबंधित किसी समस्या का भी समाधान निकलेगा। अगर कोई वाहन खरीदने क...

और पढ़ें