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कोरोना की तीसरी लहर का खौफ:इसबार पंडालों में विराजेंगी मां दुर्गा, लेकिन पहले जैसी भव्यता नहीं, सजावट पर ही जोर, लॉकडाउन की आशंका से पूजा समितियां खर्च में कर रहीं कटौती

पटना23 दिन पहलेलेखक: राजू कुमार
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समितियों ने हर साल से एक चौथाई का ही बजट बनाया। - Dainik Bhaskar
समितियों ने हर साल से एक चौथाई का ही बजट बनाया।

कोरोना ने पूरी तरह बदल डाला पटना की दुर्गापूजा को। पंडाल और प्रतिमा के मामले में तो काफी पीछे जाता नजर आ रहा है पटना। बस, लाइटिंग को लेकर नए प्रयोग दिखेंगे इस बार ठीक से। बाकी, लॉकडाउन के डर से कमजोर ही रहेगा। मां दुर्गा की प्रतिमाएं 20-20 फीट की बनती थीं, इस बार हमसे कुछ ही ऊंची होगी।

बंगाली अखाड़ा भी महज 8 फीट की प्रतिमा बनवाएगा और डोमन भगत लेन तो 7 फीट की ही। जहां तक पंडाल का सवाल है तो सबसे भव्य रहने वाला डाकबंगला चौराहा भी इस बार पहले की तरह बड़ा पंडाल नहीं बनाने जा रहा है, भले लाइटिंग से सजावट खूब कराएगा।

कोरोना-लॉकडाउन का एक फायदा भी है कि इस बार लोकल फॉर वोकल की तर्ज पर बाहरी से ज्यादा स्थानीय कारीगर दुर्गापूजा की सजावट करते दिखेंगे। इसके अलावा पंडालों के मॉडल में भी स्थानीयता रहेगी, जैसे बोरिंग रोड पर बोरिंग रोड चौराहे के शिव मंदिर का मॉडल बनेगा।

पंडालों के दिखेगी स्थानीयता : बोरिंग रोड चौराहे पर पास के शिव मंदिर का मॉडल बनेगा
पटना नगर निगम और नगर परिषद् में अधिक संख्या में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। वर्ष 2019 में खगौल से पटना सिटी तक करीब 100 की संख्या में पंडाल और प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। इस बार फिलहाल करीब 50 पूजा समितियों ने आयोजन की तैयारी शुरू की है।

इन तैयारियों को देखने से पता चल रहा है कि इस बार पंडाल की उंचाई करीब 30 फीट और चौड़ाई करीब 20 फीट तक ही जाएगी। इसमें 7-10 फीट की मां दुर्गा विराजमान रहेंगी। भव्य पंडाल और प्रतिमा स्थापित करने के लिए जहां 40-50 लाख रुपए आसानी से खर्च कर दिए जाते थे, वहां इस बार मूर्ति बनाने, पंडाल निर्माण, डेकोरेशन, सजावट सहित अन्य चीजें पर कोई समिति अधिकतम करीब 10 लाख रुपए तक खर्च करेगी। कारण तीसरी लहर की आशंका को लेकर लॉकडाउन का डर है।

इस बार लोकल फॉर वोकल की तैयारी
पटना में लाइटिंग से सजावट तक बंगाल की तरह की जाती है। मूर्ति निर्माण करने के लिए दूसरे राज्यों से कारीगर बुलाकर उन्हें 40 से 80 हजार रुपए तक देते थे। कुल मिलाकर पटना से मूर्ति कारीगरों को करीब एक करोड़ रुपए का काम मिल जाता था। इस बार यह भी बदल गया है।

छोटे स्तर पर पूजा आयोजन होने के कारण 90 फीसदी पूजा समितियों ने मूर्ति निर्माण के लिए लोकल कारीगरों पर भरोसा जताया है। पटना में कारीगर नहीं मिलने की स्थिति में 10 फीसदी समितियां झारखंड और बंगाल से कारीगरों को बुला सकती हैं।

छोटे स्तर पर आयोजन के कारण कारीगरों को प्रति मूर्ति करीब 20-40 हजार रुपया तक ही मिलेगा, यह भी लगभग तय है। सजावट में भी ज्यादातर समितियां बहुत से बहुत झारखंड जाने को तैयार हैं। कुछ ही बंगाल और यूपी के कारीगरों के संपर्क में हैं। बंगाली अखाड़ा के पास बंगाल के कारीगर की बनाई मूर्ति सजेगी, यह एक पक्का हो गया है।

अनुमति मिलने से समितियों ने जताई खुशी

  • अपेक्षाकृत छोटे पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। अगले सप्ताह में अध्यक्ष की उपस्थिति में बैठक कर निर्णय ले लिया जाएगा। डाक बंगला चौराहा, तारामंडल तक सजावट की जाएगी। लाइटिंग में कसर नहीं छोड़ेंगे। - डॉ. पुरुषोत्तम मिश्रा, महासचिव, नवयुवक संघ, डाकबंगला
  • 30 फीट ऊंचे और 20 फीट चौड़े पंडाल के लिए ऑर्डर दे चुके हैं। बोरिंग रोड चौराहा के पास स्थित शिव मंदिर के आकार का पंडाल होगा। इसमें 8 फीट की मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। बोरिंग रोड चौराहा की लाइटिंग भव्य रखेंगे। - उमेश सिंह, अध्यक्ष, श्री दुर्गा पूजा समिति, बोरिंग रोड चौराहा
  • 8 फीट की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। मूर्ति निर्माण करने के लिए बंगाल से कारीगर को बुलाया जाएगा। कारीगर, डेकोरेशन सहित सामग्री बुक हो चुकी है। तैयारी जोर-शोर से चल रही है। पिछले साल से बेहतर सजावट की व्यवस्था की गई है। - समीर रॉय, वर्किंग प्रसीडेंट, बंगाली अखाड़ा, पूजा समिति
  • महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में कोरोना का मरीजों की संख्या पर हमारी नजर है। कोरोना के केस जिस तरह से इन राज्यों में बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए इस बार हम अपनी मशहूर झांकी नहीं बना रहे हैं। पंडाल भी छोटा रहेगा। - पुनिल कुमार, महासचिव, खाजपुरा शिव मंदिर श्री श्री दुर्गापूजा महोत्सव
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