एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस से वेंटिलेटर गायब!:हार्ट अटैक वालों के लिए इंजेक्शन पंप तक नहीं; सरकारी एंबुलेंस की पड़ताल में दिखी असलियत

पटना4 महीने पहलेलेखक: मनीष मिश्रा

बिहार सरकार ने कोरोना को लेकर हर तरह की तैयारी का दावा किया है। दावा यह भी है कि अब दूसरी लहर की तरह एम्बुलेंस की समस्या नहीं होगी। एक कॉल पर 102 वाली एम्बुलेंस अस्पताल ले जाने के लिए हाजिर होगी। जब भास्कर ने सरकार के दावों की पड़ताल की तो पता चला कि मरीजों से पहले एम्बुलेंस का इलाज होना चाहिए। बिहार सरकार की 12 सौ एम्बुलेंस में एडवांस लाइफ सपोर्ट में भी मरीजों का सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। वेंटिलेटर से लेकर लाइफ सपोर्ट वाले सब सिस्टम फेल हैं, कोरोना काल में यह सिस्टम जान पर भारी पड़ सकता है।

बिहार में 1200 एम्बुलेंस, एक पर दो लाख महीने का खर्च
राज्य की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवा के लिए 102 एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई। राज्य सरकार ने एम्बुलेंस की व्यवस्था संचालित करने के लिए पशुपतिनाथ डिस्ट्रीब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड (PDPL) को जिम्मेदारी दी है। इस संस्था के माध्यम से राज्य में एम्बुलेंस का संचालन किया जाता है। बिहार सरकार ने 12 सौ एम्बुलेंस संस्था को दिया है जिसमें 300 एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस के साथ बेसिक लाइफ स्पोर्ट एम्बुलेंस है। राज्य सरकार की तरफ से हर माह प्रति एम्बुलेंस 2 लाख रुपए मेंटेनेंस और संचालन के लिए दिया जाता है। इसमें वाहनों के रख रखाव के साथ कर्मियों की सैलरी भी शामिल है।

देखिए एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस का हाल
दैनिक भास्कर ने एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस की पड़ताल की तो पता चला कि इस हाई टेक एम्बुलेंस में वैंटिलेटर तक नहीं है। एम्बुलेंस की फिटनेस फेल है और बीमा प्रदूषण का भी अता पता नहीं है। एंबुलेंस कर्मियों ने बताया कि इमरजेंसी में वह मरीजों को कोई भी हाई टेक लाइफ सपोर्ट नहीं दे पाते हैं। एंबुलेंस की एसी खराब पड़ी है, अधिकतर में वैंटिलेटर गायब है।

स्ट्रक्चर टूटा है और सिरिंज पंप तक नहीं है। मॉनिटर नहीं है जिससे मरीजों की निगरानी हो सके। यहां तक की एम्बुलेंस के बाहर गेट पर लॉक के बजाए दरवाजा का कुंडी लगाया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि एम्बुलेंस को बाहर से जुगाड़ से बंद कर दिया जाता है, लेकिन किसी आपात स्थिति में या दुर्घटना होने पर अंदर से मरीजों को निकाल पाना मुश्किल होगा।

एंबुलेंस कर्मियों ने लगाया बड़े घोटाले का आरोप
बिहार 102 एंबुलेंस यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष सोनू कुमार का कहना है कि मरीजों के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा है। सरकार तो व्यवस्था की है लेकिन निगरानी नहीं होने से हर माह करोड़ों रुपए का घोटाला हो रहा है। कर्मियों ने आरोप लगाया है कि हर माह करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी सरकार के एम्बुलेंस का इस्तेमाल मरीजों को बेहतर ढंग से नहीं मिल रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार तो अपना काम कर रही है लेकिन एजेंसी पैसा एम्बुलेंस की मेंटेनेंस में लगाने के बजाए उसका बंदरबांट कर रही है।

एम्बुलेंस ड्राइवर उमेश कुमार ने बताया कि एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस में सरकार ने हाई टेक मशीन लगाया है, लेकिन 4 माह से वैंटिलेटर से लेकर सारा सामान निकाल लिया गया है। मॉनिटर से लेकर हर सामान गायब है। स्ट्रक्चर तो ऐसा है कि बाहर तक नहीं निकलता है। संसाधन नहीं होने के कारण मरीजों की हालत बिगड़ जाती है और मौत भी हो रही है।

सरकारी दावा और एजेंसी का मेल, ड्राइवरों ने कहा सिस्टम फेल
सरकारी दावा और एजेंसी के बोल में काफी मेल है लेकिन ड्राइवर व कर्मियों का कहना है कि पूरा सिस्टम ही फेल है। सरकार का दावा है कि एम्बुलेंस पूरी तरह अलर्ट है और मरीजों की जान बचाने के लिए हाई टेक संसाधन हैं, एजेंसी का दावा भी कुछ ऐसा ही रहा। एजेंसी के डिप्टी डायरेक्टर विवेक भारद्वाज ने ड्राइवर व कर्मियों के आरोपों को सिरे से नकार दिया।

इसे राजनीति बताया और कहा कि जब व्यवस्था नहीं पसंद तो क्यों वह नौकरी कर रहे हैं। लेकिन, जब आंखों देखी स्थिति के बारे में सवाल किया गया तो उनका यही कहना था कि कुछ गाड़ियों में समस्या हो सकती है, लेकिन सभी गाड़ियां खराब नहीं हैं। ऐसे दावों के इतर बड़ा सवाल यह है कि इन गाड़ियों की निगरानी सरकार कैसे करा रही है। अगर ड्राइवर और कर्मचारी आरोप लगा रहे है और पड़ताल में एम्बुलेंस की हालत खस्ता है तो मामला जांच का है। इस पर सरकार को जांच कराना चाहिए।