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माली की नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़े का मामला:आगंतुक कक्ष में मिलता था शातिर अमित, मिलवाने के लिए प्रति कैंडिडेट कौशलेंद्र को देता था 2 हजार रुपए

पटना4 महीने पहले
ठगी के शिकार समस्तीपुर के नीलेश और जय सिंह।

माली की नौकरी के नाम पर किए गए फर्जीवाड़ा मामले में नई बात सामने आई है। ठगी के शिकार हुए कैंडिडेट्स ने मुजफ्फरपुर के रहने वाले जिस अमित कुमार का नाम लिया है, वो सचिवालय में पोस्टेड है या नहीं। इस बात पर संशय है।

मगर, सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले बेरोजगार युवकों को अपना शिकार बनाने के लिए वह विकास भवन अक्सर आता था। यहीं के आगंतुक कक्ष में वह लगातार बैठा करता था। आगंतुक कक्ष में बैठकर वह माली की नौकरी के लिए डील तय करता था। बेरोजगार युवकों को झांसा देकर वो भरोसा दिलाता था कि वह यहीं का स्टाफ है।

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इसने जहानाबाद के कौशलेंद्र के साथ सेटिंग कर रखी थी। इसे समझा रखा था कि तुम्हें सिर्फ एक काम करना है। गेट के बाहर खड़े माली की नौकरी के लिए आने वाले कैंडिडेट्स को एक-एक कर आगंतुक कक्ष में लाना और मुझसे मिलवाना है। इसके एवज में शातिर अमित कुमार प्रति कैंडिडेट 2 हजार रुपए कौशलेंद्र को दिया करता था।

बस में हुई थी मुलाकात

दरअसल, मंगलवार को विकास भवन के बाहर हुए हंगामे के दौरान कौशलेंद्र पकड़ा गया था। युवकों की भीड़ ने उसे अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद उसे सचिवालय थाना की पुलिस के हवाले कर दिया था।

इसके बाद थानेदार सीपी गुप्ता और उनकी टीम ने उससे पूछताछ की। बुधवार को थानेदार से हुई बातचीत के अनुसार कौशलेंद्र अभी भी डिटेन है। उसने अब तक बताया है कि अमित कुमार से उसकी मुलाकात कुछ महीनों पहले बस में हुई थी। उसी वक्त उसे अपने साथ काम करने का ऑफर दिया था। वह कहां रहता है? इस बारे में उसे नहीं पता।

कई सवालों को जवाब उसने अब तक नहीं दिया है। कैंडिडेट्स की तरफ से जो लिखित शिकायत मिली है, उसके आधार पर पड़ताल जारी है। अमित कौन है? इसकी सही जानकारी मिल नहीं रही है। कैंडिडेट्स अमित से कैसे मिले? इन दोनों के बीच की कड़ी कौन है? इस बारे में कंप्लेन करने वाले कैंडिडेट्स भी सही तरीके से बता नहीं रहे हैं। बावजूद इसके पूरे मामले की छानबीन चल रही है।

इस तरह से सामने आया मामला

मंगलवार को काफी सारे कैंडिडेट्स माली की बहाली को लेकर विकास भवन पहुंचे थे। पर उन्हें शक हुआ कि सरकारी नौकरी के नाम पर उनके साथ फर्जीवाड़ा हुआ है। ठगी के शिकार कैंडिडेट्स की संख्या 150 बताई गई है। दावा यह किया गया है कि प्रति कैंडिडेट 5-5 लाख रुपए की शातिरों ने ठगी की है।

फर्जीवाड़ा किए जाने का पता चलते ही विकास भवन के बाहर जमकर कैंडिडेट्स ने जमकर हंगामा किया था। इसमें समस्तीपुर के रहने वाले नीलेश कुमार ने दावा किया था कि उसने 5 लाख रुपए दिए थे। उसे सर्विस बुक भी दिया गया था। एक महीने तक BPSC के सदस्य के घर उससे नौकरी भी कराई गई। बाद में उसे नौकरी से निकाल भी दिया गया।

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