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सरावगी और भाई वीरेंद्र का मामला:विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा बोले- सदन का दुर्भाग्य, हम नकारात्मक बातों की चर्चा कर देते हैं, सकारात्मक बातें दबी रह जाती हैं

पटना2 महीने पहले
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सरावगी और भाई वीरेंद्र के मामले को सुलझाने के लिए कार्यमंत्रणा समिति में होगी चर्चा। - Dainik Bhaskar
सरावगी और भाई वीरेंद्र के मामले को सुलझाने के लिए कार्यमंत्रणा समिति में होगी चर्चा।

विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने विधानसभा सदस्यों की प्रशंसा भी की और नसीहत भी दिया। कहा- सदन चलाने में सदस्य अपनी सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं, वह प्रशंसनीय है। यह लोकतंत्र को मजबूत करने का सार्थक प्रयास है। सरकार की सजगता और संवेदनशीलता के कारण शत-प्रतिशत प्रश्नों के जवाब मिल रहे हैं। सदन की सकारात्मक बातों की चर्चा होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य है कि हम नकारात्मक बातों की चर्चा कर देते हैं, सकारात्मक बातें दबी रह जाती हैं। अध्यक्ष मंगलवार को विधायकों के अमर्यादित आचरण और अभद्रता पर सदन में अपनी बातें रख रहे थे।

उन्होंने कहा कि आज जनप्रतिनिधियों को अग्निपरीक्षा देनी पड़ रही है। हमें कलंकित करने के नित्य नए-नए प्रयास हो रहे हैं। अध्यक्ष ने कहा यह बिहार विधान सभा परिसर से शुरू हुई घटना भी उसी की एक कड़ी है। अध्यक्ष ने कहा यह ध्यान रखें, हम शेर की सवारी कर रहे हैं, राजनीति पूरी तरह शेर की सवारी है, जबतक आप सर्तक, सजग और सावधान रहकर नैतिक मूल्यों का पालन करते हुए जनता के विश्वास पर राजहित की समस्याओं पर गंभीरता के साथ विमर्श करेंगे। तब तक आपकी प्रतिष्ठा बरकरार रहेगी। इससे भटकेंगे तो शेर कभी माफ नहीं करता है, हमारा प्राण ले लेगा। संजय सरावगी और भाई वीरेंद्र के बीच हुए तू-तू-मैं-मैं का मामले को अब विधानसभा अध्यक्ष देखेंगे। गुरुवार को होने वाली कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होगी।

चलिए मान भी जाइए... नहीं पिघले सरावगी
विधानसभा कैंपस में राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने भाजपा विधायक संजय सरावगी की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया लेकिन सरावगी नहीं पिघले।

राजीव रंजन बोले- राजद के लिए गुंडागर्दी छोड़ना असंभव
प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने कहा है कि गुंडागर्दी और अराजकता राजद के संस्कार है और यह इनके नेताओं के लिए अलंकार भी है। वास्तव में राजद के लिए गुंडागर्दी और अराजकता की राजनीति छोड़ना असंभव है। यह आज भी लाठी के ज़ोर पर ही राजनीति करना चाहते हैं। राजद नेता के आचरण ने राजद काल के आतंकराज की यादों को फिर से ताजा कर दिया है।