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परेशानी:बांध टूटने से हजारों घरों में घुसा पानी और मरम्मत की बजाय अधिकारी मंत्री की कर रहे थे आगवानी

ज्योति कुमार निराला| हाजीपुर9 दिन पहले
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महनार के बाजीतपुर में वाया नदी के पानी के दबाव से स्लूइस गेट के निकट बना फ्लैंक टूटने के बाद जुटे लोग। - Dainik Bhaskar
महनार के बाजीतपुर में वाया नदी के पानी के दबाव से स्लूइस गेट के निकट बना फ्लैंक टूटने के बाद जुटे लोग।
  • महनार के बाजीतपुर में वाया नदी के पानी के दबाव से स्लूइस गेट के निकट बना फ्लैंक टूटा, बाढ़ की स्थिति भयावह हुई

वैशाली जिले में बाढ़ के खतरनाक हालात में प्रोटोकॉल और अफसरशाही की शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। एक तरफ महनार के बाजितपुर में बांध टूटने से कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए वहीं ग्रामीण जुगाड़ तकनीक से बांध की मरम्मति में जुटे दिखे। यहां बांध के साथ सड़क के एक बड़े हिस्से के बह जाने से लोग दहशत में थे। लेकिन जिले के अधिकारी मंत्री की आगवानी और प्रोटोकॉल के चक्कर में दिन भर मंत्री के साथ बैठक करते रहे और बाँध की सुध नहीं ली। दरअसल, महनार के वाजिदपुर में सोमवार की देर रात वाया नदी के साथ बने बांध में दरार आ गई थी।

बांध में आई दरार से पानी आबादी वाले इलाकों की तरफ बहने लगा। ग्रामीणों ने बांध में दरार देखा तो देर रात ही गांव के मस्जिद में लगे लाउडस्पीकर से खतरे को लेकर आसपास के लोगों को आगाह किया। लेकिन सुबह तक बांध के साथ सड़क का एक बड़ा हिस्सा भी टूट गया और पानी तेजी से आबादी वाले इलाकों में घुसने लगा। आस पास के 8 -10 पंचायतों के डूबने की आशंका से सहमे लोग बांध की मरम्मत में जुगत लगाते रहे। करीब 10 घंटे गुजर जाने के बाद भी अधिकारियों ने बांध को लेकर कोई सुध नहीं ली। मंगलवार को दोपहर के बाद एक जेसीबी मौके पर पहुंची लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब भी नदारद थे।

स्थानीय लोगों ने बताया- सूचना देने के कई घंटे बाद प्रशासन पानी के बहाव को रोकने के लिए सक्रिय हुआ

मंत्री की अगुवाई में लोगों का दर्द भूले अधिकारी
इधर बांध टूटने से आसपास के ग्रामीण दहशत और डर के साए में थे लेकिन कोई अधिकारी देखने भी नहीं पहुंचे। पता चला की जिले में प्रभारी मंत्री जयंत राज आए हैं। हद तो यह भी है कि मंत्री जी आए भी थे बाढ को लेकर तैयारियों का जाएजा लेने। दिन भर जिले के अधिकारी मंत्री जी के साथ बाढ़ के हालात पर बैठक करते रहे , लेकिन महनार के बांध की मरम्मति की सुध नहीं ली।

इधर ग्रामीण दहशत में तो मंत्री घोषणा में व्यस्त
बांध टूटने और बाढ़ के खतरे के बीच जद्दोजहद करते ग्रामीण सरकारी मदद नहीं मिलने से नाराज दिखे। लोगों को आश्चर्य इस बात का था कि आखिर यह कैसा जिला है जहां इतनी बड़ी समस्या आने पर भी अधिकारी देखने तक नहीं आए। लोगों ने कहा ये कैसे अधिकारी हैं जो लोगों की मौत का इंतजार कर रहे। दूसरी ओर मंत्री जी भी अलग ही राग अलापते दिखे। उन्होंने बैठक के कई फायदे बताते हुए कहा कि क्षति का आकलन के बाद लोगों तक मदद पहुंचा दी जाएगी।

प्रशासनिक लापरवाही के बाद स्थानीय लोगों की नाराजगी चरम पर
^स्थानीय जनप्रतिनिधि के द्वारा जेसीबी लाया गया है। हमलोग कोशिश कर रहे हैं। लेकिन पानी की धार काफी तेज है इस वजह से दिक्कत हो रही। प्रशासनिक मदद कुछ नहीं मिल रहा है। सीओ, बीडीओ सिर्फ फोन पर आश्वासन देर रहे हैं। कोई नहीं आया है अभी तक। ।
मोहन कुमार, स्थानीय ग्रामीण​​​​​​​

^ हमलोग भी व्यवस्था में लगे हुए हैं। पूरा गांव लगा हुआ है। लेकिन पानी नहीं रुक रहा है। जबतक प्रशासन से मदद नहीं मिलेगा तबतक इसको ठीक करना संभव नहीं है। हमलोग तो कर ही रहे हैं। फिर भी पानी रुक नहीं पा रहा है। बांध टूटने को देख कर रात में ढाई बजे माइक से एलान किया गया की बांध टूट गया है।।
मो. अबुल हसन, स्थानीय ग्रामीण

^चुकी इस बार वाया नदी में ज्यादा पानी आया है। आपलोग भी जानते होंगे की वाया नदी में पानी ज्यादा आता नहीं था। इस बार ज्यादा पानी आया है। इसके कारण से ज्यादा क्षति हुई है। मुख्यमंत्री जी के आदेश पर हमलोग बैठक कर रहे हैं। पहले भी बैठक किए हैं। हमलोग आकलन कर रहे हैं कि कितनी क्षति हुई है। आगे कैसे इस स्थिति को कम कर सकते हैं।
जयंत राज, ग्रामीण विकास सह प्रभारी मंत्री

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