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ऐसे होते हैं कोरोना फ्रंटलाइन वॉरियर्स:पटना एम्स में वैक्सीन ट्रायल में शामिल 40% बच्चे डॉक्टर्स के हैं; हम जांचा जा चुका टीका लेने में भी हिचक रहे

पटना13 दिन पहलेलेखक: माे. सिकन्दर
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एक तरफ कई लोग कोरोना की वैक्सीन लगवाने से भी हिचक रहे हैं दूसरी ओर बच्चे वैक्सीन ट्रायल में शामिल होने से भी नहीं डर रहे। पिछले एक हफ्ते से दिल्ली और पटना एम्स में बच्चों पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। पटना एम्स में पहले स्टेज के ट्रायल में 12 से 18 साल के जिन 27 बच्चों को शामिल किया गया है, उनमें 40% बच्चे डॉक्टर्स के हैं। इनमें 4 बच्चे तो एम्स के ही डॉक्टर्स के हैं।

खगाैल की स्त्री राेग विशेषज्ञ डाॅ. कल्पना ने अपने तीनों बच्चों पर वैक्सीन का ट्रायल कराया। पिछले साल वे खुद भी वैक्सीन ट्रायल में शामिल हुई थीं। वहीं एम्स की बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी की हेड डाॅ. वीणा ने 13 साल के बेटे सत्यम सिंह को ट्रायल में शामिल कराया। दूसरे चरण के ट्रायल में वे 7 साल के दूसरे बेटे सम्यक को भी शामिल कराएंगी। इसके लिए जल्द ही स्क्रीनिंग होगी।

डाॅ. वीणा ने भी खुद पर एम्स में ही पिछले साल काेवैक्सिन का ट्रायल कराया था। इसके अलावा एम्स की ही पैथाेलाॅजी की असिस्टेंट प्राेफेसर डाॅ. मीनाक्षी तिवारी ने अपनी14 साल की बेटी अनुभूति शर्मा को ट्रायल में शामिल कराया है।

दूसरे फेज में भी एम्स के 5 डॉक्टर्स के बच्चे शामिल होंगे
पटना एम्स में बच्चों पर कोवैक्सिन का ट्रायल चल रहा है। 12 से 18 साल के 27 बच्चों पर पहले डोज का ट्रायल हो चुका है। इन्हें अब 28 दिन के बाद दूसरा डोज दिया जाएगा। एम्स में दूसरे स्टेज यानी 6 से 12 साल के बच्चों पर ट्रायल के लिए स्क्रीनिंग शुरू हो गई है। एम्स के 5 डॉक्टर भी इसके लिए अपने बच्चों की स्क्रीनिंग करवाने वाले हैं।

करीब 25 बच्चों पर दूसरे स्टेज का ट्रायल एक सप्ताह में हो जाने की उम्मीद है। उसके बाद 2 से 6 साल के बच्चों पर ट्रायल शुरू होगा। इसमें भी करीब एक सप्ताह का समय लगेगा। एम्स के एमएस डॉ. सीएम सिंह ने बताया कि तीसरे स्टेज का ट्रायल खत्म होने के 56 दिन बाद एंटीबॉडी का टेस्ट किया जाएगा।

अगर एंटीबॉडी ICMR के स्टैंडर्ड के मुताबिक रहे तो ट्रायल कर रहे एम्स समेत सातों संस्थान इसकी रिपोर्ट ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को भेजेंगे। उसके बाद इमरजेंसी यूज प्रोटोकॉल के तहत बच्चों को कोवैक्सिन देने की अनुमति संभव है।

डॉक्टर्स से 2 सवाल

1. क्या इस ट्रायल में रिस्क नहीं है?
जवाब :
हमें पता है कि क्या रिस्क है, लेकिन हमें ये भी पता है कि क्या संभावनाएं हैं। दूसरे, क्लिनिकल ट्रायल तक पहुंचने से पहले एक वैक्सीन इतने चरणों से गुजर चुकी होती है कि उसमें रिस्क न के बराबर ही बचता है।

2. ट्रायल के बाद भी लोगों में डर क्यों?
जवाब :
कौन डरता है? सिर्फ वही लोग जो वैक्सीन के बारे में जानते नहीं हैं। या फिर वे लोग जिन्हें अपने मतलब से कुछ लोग जानबूझकर डरा कर रखते हैं।

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