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परिवार से बड़ा ऑनलाइन गेम!:पिता ने 'फ्री फायर' गेम खेलने से रोका तो 10वीं के छात्र ने छोड़ा घर, पत्र में लिखा-अब मैं बड़ा हो गया हूं

पटना10 दिन पहले
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मयंक के माता-पिता। - Dainik Bhaskar
मयंक के माता-पिता।
  • इस 'फ्री फायर' गेम आईडी की आधी रात से लगती है बोली, देखिए आपके बच्चे को इसकी लत तो नहीं

पिता ने ऑनलाइन फ्री फायर गेम खेलने से मना किया तो 10वीं में पढ़ने वाला बेटा घर छोड़कर भाग गया। मामला कंकड़बाग थाना इलाके के पूर्वी इंदिरा नगर का है। छात्र मयंक कुमार 15 जुलाई को ही घर छोड़कर भाग गया। इस संबंध में पिता कामदेव पंडित ने कंकड़बाग थाने में लिखित आवेदन दिया है। कामदेव मूलरूप से नालंदा के रहने वाले हैं।

पूर्वी इंदिरा नगर में किराए पर रहते हैं। वे आरएमएस काॅलोनी स्थित एक स्कूल में शिक्षक हैं और उसी स्कूल में मयंक पढ़ता है। घर छोड़ने से पहले बेटा ने एक पत्र भी लिखा है, जिसमें उसने लिखा है कि आपका गेम खेलने वाला बेटा, मोटू पतलू देखने वाला बेटा अब बड़ा हो गया है। मैं बहुत बुरा हूं। आपका नेट खत्म कर देता हूं। बैठकर खाली खाता हूं। अब अपने दम पर सबकुछ करूंगा। मेरा इंतजार कीजिएगा। इधर थानेदार रविशंकर सिंह ने कहा कि पुलिस छात्र का पता लगा रही है। उसके मोबाइल को सर्विलांस पर रखा गया है। जांच चल रही है।

पत्र में लिखा-पुलिस को बताया तो लौटकर मुर्दे की तरह रहूंगा

घर छोड़कर भागने से पहले मयंक ने घर में रखे बोर्ड पर लिखा-आई एम सॉरी। इसके बाद एक पत्र में लिखा-इस बात को प्राइवेट ही रखिएगा। पब्लिक मत कीजिएगा। अगर पुलिस को बताते हैं और पुलिस मुझे खोज लेती है तो मैं घर तो लौट आऊंगा, लेकिन मुर्दे की तरह ही रहूंगा। अब जो करना है अपने दम पर करूंगा। मेरा शरीर आपकी तरह है, लेकिन दिमाग मम्मी की तरह है। मुझमें कोई अच्छाई नहीं है। दिमाग काम नहीं कर रहा है।

पिता ने कहा-पढ़ाई पर फोकस नहीं था

पिता ने कहा कि पिछले एक महीने से मयंक काफी गेम खेलने लगा था। पढ़ाई पर फोकस नहीं कर रहा था। इसी कारण उसे डांटा। कई बार उसे समझाया था। 15 जुलाई को मैं ऑनलाइन क्लास लेने चला गया। बेटी काॅलेज चली गई और मेरी पत्नी किसी काम से बाहर चली गई थी। बेटा घर पर अकेला था। इसी बीच वह चिट्‌ठी लिखकर घर से कहीं निकल गया। 16 जुलाई को सुबह-सुबह ह्वाट्सएप पर मैसेज किया- मुझे डर लग रहा है। धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का।

एक्सपर्ट ने कहा- अभिभावकों को भी समझना होगा गेम का पूरा खतरा

फ्री फायर गेम के आदी बच्चे ऑनलाइन क्लास के समय भी गेम खेल रहे हैं और मोबाइल लेकर टॉयलेट में भी। इसमें 13-14 साल की उम्र बताकर बड़ी उम्र के और एक्सपर्ट खिलाड़ी अपनी आईडी चला रहे हैं। वह मोबाइल गेम खेलने वाले बच्चों को प्रोवोक करते हैं कि इतना क्रेडिट प्वाइंट बनाना तुम्हारे वश का नहीं। गेम्स एक्सपर्ट शुभम वर्मा बताते हैं कि ऐसा कहे जाने से बच्चे ज्यादा समय ज्वाइंट ग्रुप में गेम जीतते हुए क्रेडिट प्वाइंट बढ़ाने की कोशिश करते हैं। नहीं कर पाने पर अच्छी क्रेडिट प्वाइंट वाली गेम आईडी खरीदने के लिए चोरी-हेराफेरी भी करने लगते हैं।

आईडी का अच्छा क्रेडिट प्वाइंट हो गया तो बेचने के लिए बोली लगवाते हैं, नहीं तो ऐसी आईडी खरीदने के लिए बोली में शामिल होते हैं। यह बोलियां अमूमन रात 12-1 बजे से सुबह 5 बजे तक लगती हैं। यह बोली बिहार में 500 रुपए से 42 हजार रुपए तक की लगती है। कई बार बोली लगाकर आईडी बेचने वाला पैसा लेकर भी आईडी ट्रांसफर नहीं करता है, जिसके कारण भी अप्रिय घटनाएं होती हैं।

साइकोलॉजिस्ट बोले : हर एक्शन पर नजर रखें, रिएक्शन न दिखाएं

क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. मनोज कुमार बताते हैं कि पटना के 4-5 मनोचिकित्सकों के पास काउंसिलिंग के लिए रोज 10-12 ऐसे केस आ रहे हैं। उनके पास 4-5 ऐसे बच्चों को लोग रोज दिखाने भी आ रहे हैं। गेम आईडी खरीदने के लिए घर से पैसे चोरी के दर्जनों केस उनके पास हैं। वह बताते हैं कि यूपीआई से पैसा ट्रांसफर का भी केस आ चुका है और किसी से उधार पैसे लेकर फ्री फायर की आईडी खरीदने वाले बच्चों की भी काउंसलिंग कर रहे हैं। कहा-बच्चों के व्यवहार पर नजर रखना इससे बचाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है।

डॉ. मनोज कहते हैं कि बच्चा बिना चबाए खाए, रातभर जागे, धैर्य की कमी दिखाए, खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे, ज्यादा देर बाथरूम में रहे तो सावधान हो जाना चाहिए। बच्चों का मनोविज्ञान समझाते हुए प्रख्यात मनोवैज्ञानिक डॉ. बिंदा सिंह कहती हैं कि यह शराब-सिगरेट जैसा एडिक्शन है। सीधे रोकेंगे तो रिएक्शन दिखेगा।

वैसे भी बच्चे कोरोना काल में अकेले हैं। उन्हें इसमें कमाई तक दिखती है और जीतने का जुनून तो है ही। इसलिए, जब भी मोबाइल दें तो वाचफुल रहें। अगर बच्चा छोटा है तो अपने साथ बैठाएं। लत लगने के पहले ही समझाकर कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए साथ बैठना, बातें करना, स्टोरी बुक पढ़ना होगा। एक्स्ट्रा एफर्ट तो करना ही होगा। फीलिंग समझकर उन्हें प्यार से समझाना होगा।

पटना में नामी मनोचिकित्सकों के पास रोज ऐसे 10-12 बच्चों की हो रही काउंसिलिंग

फरवरी में गोपालगंज के कुचायकोट में फ्री फायर गेम के तीन खिलाड़ियों ने बार-बार जीतने वाले साथी रौशन अली को मारकर नदी में फेंक दिया था। बिहार में फ्री फायर गेम का दूसरा मामला सामने आने पर भास्कर ने गेम्स एक्सपर्ट और साइकोलॉजिस्ट से बात शुरू की तो सामने आया कि इस गेम का क्रेज बहुत ज्यादा बढ़ गया है। ये दो घटनाएं नहीं, सेल्फ हार्म और अटैक की रोजाना कई घटनाएं हो रही हैं। 8 से 15 साल के बच्चे फ्री फायर की लत में आधी रात से सुबह तक बोली लगाकर अपनी आईडी बेच या दूसरे की आईडी खरीद रहे हैं।

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