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लॉकडाउन का असर:गंगा का पानी निर्मल हुआ तो घाटों पर अठखेलियां करती नजर आईं डॉल्फिन

पटना24 दिन पहलेलेखक: राजू कुमार
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कोरोना वायरस के चेन को तोड़ने के लिए हुए लॉकडाउन में गंगा नदी का पानी निर्मल हुअा तो गंगा के गुलबी घाट, त्रिवेणी घाट और खाजकेलां घाट पर डॉल्फिन को अठखेलियां करती देखी गईं। पटना के घाटों पर डॉल्फिन पहली बार नजर आई है। पटना के घाटों पर गंगा नदी में आसानी से डॉल्फिन देख सकेंगे। साथ ही गांधी सेतु के बगल में हाजीपुर के कोनहारा घाट से करीब दो किमी दूरी पर नदी में डॉल्फिन देखी गई है। 2021 के जनवरी और फरवरी के बीच में कोसी नदी में हुए सर्वे में 194 डॉल्फिन मिले। बिहार में 1448 से बढ़कर डॉल्फिन की संख्या 1642 हो गई है।

डॉल्फिन विशेषज्ञों की मानें तो इधर 12 महीनों से गंगा नदी में डॉल्फिन के प्रजनन के लायक वातावरण है। अगली बार सर्वे होने पर करीब 30 फीसदी डॉल्फिन की संख्या वृद्धि होने की संभावना है। 2018 के सर्वे के अनुसार गंगा, घाघरा, गंडक और कोसी नदी मिलाकर करीब 1448 डॉल्फिन पाए गए थे।

पहली बार वैज्ञानिक पद्धति से सर्वे हुआ, कोसी नदी में मिली 194 डॉल्फिन

कोसी नदी में पहली बार वैज्ञानिक पद्धति से 2021 के जनवरी और फरवरी के बीच में डॉल्फिन का सर्वे किया गया। सर्वे रिपोर्ट हाल ही में आई है। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कोसी नदी में 194 डॉल्फिन पाई गई है। इससे स्पष्ट है कि कोसी में डॉल्फिन के लिए अच्छा वातावरण है। डॉल्फिन की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

हालांकि जानकारों की मानें तो कोसी नदी में बहुतायत संख्या में डॉल्फिन, कछुआ सहित अन्य जलीय जीव और पक्षी हैं। कई साल पूर्व कराए गए सर्वेक्षण में करीब 55 डॉल्फिन पाई गई थीं। 2018 तक 1448 डॉल्फिन हाे गई। 2021 में कोसी नदी के सर्वे में 194 डॉल्फिन मिले। दोनों आंकड़े मिलाकर अब बिहार में करीब 1642 डॉल्फिन हो गईं।

गंगा, गंडक सहित अन्य सहायक नदियों में डॉल्फिन की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसका वजह है साफ पानी, नदी की गहराई और पर्याप्त भोजन मिलना। छोटी-छोटी मछलियों को डॉल्फिन शिकार बनाती है। -दीपक कुमार सिंह, प्रधान सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग

लॉकडाउन के बाद गंगा में डॉल्फिन की संख्या बढ़ी है। डॉल्फिन अप्रैल से जून और अक्टूबर में बच्चे को जन्म देती है। अन्य मछलियां अंडे देती हैं और डॉल्फिन बच्चे को जन्म देती है। -सुनिल कुमार चौधरी, नदी डॉल्फिन विशेषज्ञ, तिलका मांझी विवि, भागलपुर

गांगेय डॉल्फिन की पटना के गंगा घाटों पर अठखेलियां दिखने लगी है। डॉल्फिन साफ पानी में रहना पसंद करती है। अब मछुआरे भी डॉल्फिन को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। -डॉ. गोपाल शर्मा, डॉल्फिन विशेषज्ञ, पटना जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ​​​​​​​

शाम 3 से 5 बजे के बीच भी दिखती है डॉल्फिन

पटना जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डॉल्फिन विशेषज्ञ डाॅ. गोपाल शर्मा कहते हैं कि फतुहा के त्रिवेणी घाट और पटना सिटी के खाजेकलां घाट पर गंगा में डॉल्फिन अठखेलियां करती नजर आती हैं। सुबह में 8 से 10 बजे तक या शाम 3 से 5 बजे के बीच में डॉल्फिन को देखा जा सकता है। इसके अलावा गुलबी घाट और बाढ़ स्थित उमा घाट पर डॉल्फिन देख सकते हैं। हालांकि इन दोनों जगहों पर कभी-कभी डॉल्फिन दिखाई देती है।​​​​​​​

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