53 साल बाद बिहार से पूरी तरह खत्म हुए नक्सली:जहां बिछी थीं 5000 लैंड माइन, उस आखिरी नक्सल दुर्ग पर अब CRPF ने बनाया कैंप

पटना2 महीने पहले
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बिहार 53 साल बाद पूरी तरह नक्सल मुक्त हो गया है। नक्सलियों ने 1969 में धमक दी थी। तब उन्होंने पहली बार मुजफ्फरपुर के मुसहरी में पुलिस पर हमला किया था। उसके बाद नक्सलियों का आतंक बिहार में कायम रहा। 5000 लैंड माइन बिछा गया-औरंगाबाद के चकरबंधा को नक्सली कमांडर संदीप यादव ने अभेद्य दुर्ग बना रखा था। अब यहां सीआरपीएफ के चार कैंप हैं। जमुई, लखीसराय और मुंगेर से घिरे भीम बांध के इलाके से नक्सली वर्चस्व पूरी तरह समाप्त हो गया है।

गृह मंत्री अमित शाह और सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह ने भी बुधवार को इसपर मुहर लगा दी। सीआरपीएफ के डीजी ने कहा कि बिहार अब पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त हो गया है। माओवादियों की उपस्थित सिर्फ रंगदारी वसूलने वाले गैंग के तौर पर है। पूर्वी क्षेत्र के किसी भी राज्य में उनका दबदबा नहीं रहा। पहली बार एसी आधिकारिक घोषणा की गई है।

अमित शाह ने ट्वीट कर लिखा कि पहली बार बूढा पहाड़, चक्रबंधा और भीमबांध के दुर्गम क्षेत्रों से माओवादियों को सफलतापूर्वक निकालकर सुरक्षाबलों के स्थायी कैंप स्थापित किये गए हैं। नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आतंकवाद व LWE के विरुद्ध गृह मंत्रालय की जीरो टॉलेरेंस की नीति जारी रहेगी और ये लड़ाई आगे और तेज होगी। देश की आंतरिक सुरक्षा में एक ऐतिहासिक पड़ाव पार हुआ है।

संदीप यादव के गढ़ में CRPF

17 गुना 35 किमी की पहाड़ियां 33 वर्षों से नक्सली गढ़ थीं। 2006 से उन्हें खदेड़ने की कोशिशें जारी थीं। 2022 में सफलता मिली। यहां 5000 लैंड माइंस बिछी थीं। 2500 हटाई गई। CRPF ने चरी, लंगुराही, पचरूखिया और नागोबार में कैंप बनाया।

चकरबंधा का तरी कैंप
चकरबंधा का तरी कैंप

जहां एसपी की हत्या वहीं CRPF कैंप

जमुई, लखीसराय और मुंगेर से घिरे भीम बांध में दो दशक से नक्सलियों का प्रभाव था। 2005 में यहीं नक्सलियों ने मुंगेर के एसपी केसी सुरेन्द्र बाबू की पैसरा गांव के पास हत्या कर दी थी। अब वहीं एक कैंप बना है। दूसरा चोरमारा में।

भीम बांध का पैसरा कैंप
भीम बांध का पैसरा कैंप

पटना के पास पुनपुन तक पहुंच गए थे नक्सली

रंग लाई आईजी अमित कुमार की रणनीति
सीआरपीएफ के बिहार-झारखंड सेक्टर के आईजी अमित कुमार ने चकरबंधा व भीम बांध से नक्सलियों को खदेड़ स्थायी कैंप बनाने की रणनीति को अंजाम दिया। वे बिहार कैडर के आईपीएस हैं। अब सीआरपीएफ झारखंड सेक्टर के आईजी हैं। बूढ़ा पहाड़ को भी सीआरपीएफ ने मुक्त करा लिया है।

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