तेजप्रताप की जनशक्ति यात्रा:1 मई को बिहटा से करेंगे शुरुआत; सुनेंगे जनता की समस्या, घर पर लगेगा दरबार

पटना3 महीने पहले

RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव एक बार फिर से जनता के बीच जाएंगे। उनकी समस्या सुनेंगे और उसका निदान करवाएंगे। इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। एक मई मजदूर दिवस के दिन वे बिहटा से जन शक्ति यात्रा का आगाज करेंगे। इस यात्रा का स्लोगन उन्होंने लड़ेंगे हम, जीतेंगे हम... दिया है।

पार्टी की तरफ से लगातार नजरअंदाज किए जाने की खबरों के बीच अब वे जन शक्ति परिषद के बैनर तले अपना जनाधार बढ़ाएंगे। हालांकि इस बीच ऐसी चर्चा है कि RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव 30 अप्रैल को पटना पहुंच रहे हैं। उनसे मंत्रणा के बाद वे इस यात्रा को बंद कर सकते हैं।

परिषद का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं
इस यात्रा में अहम भूमिका निभा रहे और तेज प्रताप के कोर टीम के एक मेंबर के मुताबिक जनशक्ति परिषद का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। पार्टी से इतर परिषद बनाया जा सकता है। दोनों की अपनी-अपनी भूमिका होती है। इससे पहले भी तेज प्रताप एक संगठन बनाकर जनता के लिए काम कर चुके हैं।

1 मई से तेजप्रताप की जनशक्ति यात्रा।
1 मई से तेजप्रताप की जनशक्ति यात्रा।

क्या ये यात्रा तेज प्रताप की प्रेशर पॉलिटिक्स है
इस तरह की यात्रा का क्या औचित्य होता है। इस पर वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेल्लारी कहते हैं कि तेज प्रताप की ये एक प्रेशर पॉलिटिक्स हो सकती है। लेकिन इसका पार्टी पर कुछ असर होता हुआ नहीं दिख रहा है। न ही इसका पार्टी के कोर वोट बैंक पर कोई असर पड़ेगा और न ही इनके जनाधार में कोई खास इजाफा होगा। लगातार ऐसा कर वे उपहास के पात्र होते जा रहे हैं।

दरकिनार किए जाने का है टीस
कन्हैया भेल्लारी कहते हैं कि तेज प्रताप के अंदर एक टीस है। बड़ा पुत्र होने के बाद भी अघोषित तौर पर लालू प्रसाद यादव अपनी पॉलिटिकल विरासत छोटे बेटे तेजस्वी यादव को सुपूर्द कर चुके हैं। स्थिति ये है कि वे RJD के एक विधायक के अलावा कुछ भी नहीं हैं। उन्हें कोई पद नहीं है। गाहे-बगाहे वे ऐसा कर अपनी उपस्थिति जताने की कोशिश करते हैं।