दुर्व्यवस्था:पीएमसीएच के अंदर महिला से ठगी, अधीक्षक बोले- हम दलालों को नहीं रोक सकते

पटना4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
परिसर में घूमते रहते हैं दलाल, खून जांच के नाम पर लोगों को डराकर ठगते हैं पैसे, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं। - Dainik Bhaskar
परिसर में घूमते रहते हैं दलाल, खून जांच के नाम पर लोगों को डराकर ठगते हैं पैसे, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं।

पीएमसीएच में महिलाएं दूर-दराज से प्रसव कराने के लिए आती हैं। इनमें अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की होती हैं। वे यह सोच कर यहां आती हैं कि उन्हें प्रसव के लिए पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे, बल्कि 1000 से 1400 रुपए भी मिल जाएंगे। पर यहां के हालात उलट ही है। यहां प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं के परिजनों को पांच से सात हजार रुपए दवा के लिए खर्च करने पड़ते हैं।

इतना ही नहीं यदि दलाल लग गए तो और अधिक खर्च हो सकता है। आया और सफाई कर्मी भी पैसे की मांग करते हैं। ऐसी ही एक घटना त्रिपोलिया के मनीष कुमार मिश्र के परिजन के साथ हुई। मनीष ने बकायदा इसकी शिकायत अधीक्षक, विभागाध्यक्ष से लेकर टीओपी से की। मंगलवार को भी मनीष इस संबंध में अधीक्षक से मिलने के लिए गए थे। उनका कहना था कि अधीक्षक नहीं मिलेंगे तो वे धरने पर बैठ जाएंगे।

सुरक्षा गार्ड के रहते होता है यह सब, पीड़ित के परिजन ने कर्मियों पर भी जताया संदेह

लैब की रिपोर्ट भी फर्जी
मनीष का आरोप है कि गाइनी के आपरेशन थिएटर के बाहर दलाल खड़े रहते हैं। खून जांच के नाम पर डराकर पैसे ठग लेते हैं और दूसरे दिन रिपोर्ट भी बनाकर दे देते हैं। रिपोर्ट में दिए गए नंबर पर कॉल करने या लैब पर जाकर पता करने पर कहा जाता है कि रिपोर्ट नकली है। रिपोर्ट इस लैब का नहीं है। इसकी शिकायत अधीक्षक से करने पर उन्होंने गाइनी के विभागाध्यक्ष से बात करने के लिए कहा। विभागाध्यक्ष कहती हैं कि वे कुछ नहीं कर सकतीं। अधीक्षक ही कुछ कर सकते हैं। मनीष का कहना है कि दलाल ओटी तक कैसे पहुंच जाते हैं, यह समझ से परे है। जबकि वहां सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं।

अस्पताल का कर्मी नहीं तो वार्ड में कैसे पहुंचा
मनीष का आरोप है कि उनकी पत्नी किरण कुमारी 9 जुलाई को अपनी बहन बिरन कुमारी को लेकर प्रसूति विभाग पहुंचीं। वहां तुरंत अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लिखा गया। इमरजेंसी में भर्ती मरीज को भी अल्ट्रासाउंड के लिए 12 घंटे का समय दिया जाता है। आपरेशन थिएटर के पास एक व्यक्ति अंदर-बाहर कर रहा था। वह बाहर आकर कहता है कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति की सुई लग गई है।

तुरंत जांच करानी पड़ेगी और जांच कराने के नाम पर पांच सौ रुपए ठग लिए। 10 जुलाई को जांच करने पर पता चला कि रुपया लेने वाला अस्पताल का कर्मचारी नहीं है। सवाल यह है कि रुपए लेने वाला व्यक्ति अस्पताल का कर्मचारी नहीं है तो वह अंदर कैसे पहुंच गया? इससे सुरक्षा गार्ड व कर्मचारियों की मिलीभगत का संदेह होता है।

जो दवा उपलब्ध है, वही लिखने के लिए कहा है
इस बाबत अधीक्षक डॉ. आईएस ठाकुर का कहना है कि दलालों पर हम रोक नहीं लगा सकते। इस बाबत सीनियर एसपी को लिख चुके हैं। गेट पास की भी व्यवस्था करना संभव नहीं है। मैनपावर की कमी है। अधीक्षक मानते हैं कि दवा की कमी है। दवा के लिए लिखा गया है। जो दवा उपलब्ध है, वही दवा चिकित्सक को लिखने के लिए कहा गया है। अस्पताल में जो दवा उपलब्ध है, वह मरीज को मिल रही है।