पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

पीरो:ठंड बढ़ी तो सोंधी तिलकुट की फैलने लगी खुशबू, जगह-जगह खुलने लगीं दुकानें

पीरो8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

ठंड बढ़ते ही बाजारों में सोंधी तिलकुट की महक फैलने लगी है।पीरो सहित आसपास के बाजारो में इसे बनाने और बिक्री की कई दुकानें सज गयी है। करीब डेढ़ माह तक चलने वाले इस कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार तिलकुट को बनाने में जितना परिश्रम, मजदूरी और लागत आती है उस अनुसार मुनाफा कम होता है। सामान्यतः दिसम्बर माह के शुरू होने वाला कारोबार इस बार नवम्बर माह में ही शुरु किया गया है।

मकर संक्रांति के बाद तिलकुट बनाने का यह कारोबार बंद हो जाता है। उसके बाद जो तिलकुट बच जाता है उसे बाजारो में बिक्री किया जाता है। तिलकुट बनाने वाले अधिकांश मजदूर एक से डेढ़ माह के ठेके पर आते हैं। कहीं दिन के अनुसार भी मजदूरी है। मजदूर डेढ़ माह तक इस कारोबार से जुड़े होने के बाद संक्रांति के बाद अपने घर चले जाते हैं।

पीरो में कई सालों से यह कारोबार हो रहा है। सभी मजदूर और मिस्त्री कैमूर, रोहतास से आते हैं। मजदूरो की मजदूरी ठेके के अनुसार 15 हजार रुपए से 17 हजार रुपए है जबकि कारीगर 24 से 30 हजार रुपए तक लेते हैं।तिलकुट बनाने में चिनी,गुड़, उजला और काला तिल का प्रयोग होता है। अधिकांशतः उजला तिल का तिलकुट ही बनता है।

कारोबारी बोले- मेहनत के अनुसार नहीं हो पाती है कमाई
रामकुमार ने बताया कि वे इस कारोबार में 25 सालों से जुटे हैं। महंगाई बढ़ रही है लेकिन मजदूरी उस हिसाब से नहीं बढ़ रहा है। यह सिजनली कारोबार है जिसका इंतजार पूरे साल रहता है। जिसके बाद घर का कार्य और अन्य मजदूरी कर पेट पालते हैं।

खबरें और भी हैं...