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धर्म-समाज:धर्मशाला व जन्मभूमि मंदिर, वीरशासन धाम तीर्थ में प्रातः पूजन, अभिषेक, शांतिधारा का आयोजन

राजगीर6 दिन पहले
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  • पर्युषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की आराधना

10 दिवसीय पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन आर्जव धर्म की आराधना की गई। पर्व को लेकर इस बार जैन अनुयायी में काफी उत्साह देखा जा रहा है। धर्मशाला मंदिर, जन्मभूमि मंदिर, वीरशासन धाम तीर्थ, पंच पहाड़ी के सभी मंदिरों में प्रातः पूजन, अभिषेक, शांतिधारा कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। पर्युषण के तीसरे दिन मंदिर जी में भगवान को स्वर्ण एवं रजत कलशों से अभिषेक कराया। इसके बाद देवशास्त्र गुरु की पूजा, समुच्च चौबीसी पूजा, नंदीश्वरद्वीप पूजा, उत्तम आर्जव धर्म की आराधना की गयी।

शाम में महाआरती के बाद प्रवचन कर धर्म का सार सभी लोगों को समझाया गया। उत्तम आर्जव धर्म पर बताते हुए रवि कुमार जैन ने कहा कि जैसा आपके मन में विचार किया जाये, वैसा ही दूसरों से कहा जाये और वैसा ही कार्य किया जाये। इस प्रकार से मन, वचन एवं किए गए कार्य की सरल प्रवृत्ति का नाम ही आर्जव है। संसार में उत्तम आर्जव की ही रीति अच्छी मानी जाती है तथा थोड़ी सी भी बेईमानी बहुत दुःख देने वाली होती है। इससे बचने के लिए जो मन में हो, उसे ही वचनों से कहना चाहिए तथा जो वचनों से कहें, वह क्रिया अर्थात आचरण में भी होना चाहिए। यही हमें उत्तम आर्जव धर्म सिखलाया है। प्रबंधक मुकेश जैन ने कहा कि अच्छी बातों को ही मन में सोचना चाहिए। बुरे, असभ्य, दूसरों को हानि, दुख पहुंचाने वाले न तो विचार करना चाहिए, यदि विचार आ जाएं तो वचन में नहीं कहना चाहिए।

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