गीता जयंती समारोह:सत्य-असत्य की लड़ाई में सत्य अकेले खड़ा होगा

राजगीरएक महीने पहले
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राजगीर में गीता जयंती समारोह में शामिल लोग। - Dainik Bhaskar
राजगीर में गीता जयंती समारोह में शामिल लोग।
  • असत्य की फौज लंबी होगी, क्योंकि असत्य के पीछे मूर्खों की झुंड खड़ी मिलेगी

शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का दिन बड़ा ही पावन और पुनीत है क्योकि आज ही के दिन आज से लगभग 5500 सौ वर्ष पूर्व योगेश्वर भगवान श्री कृष्णा ने कुरुक्षेत्र के युद्ध स्थल मे “मोक्षदा एकादशी” के दिन अर्जुन को श्री मद भागवत गीता का ज्ञान दिया था। उक्त बातें अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. धीरेंद्र उपाध्याय ने देवीस्थान के प्रांगण में गीता जयंती समारोह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि गीता का ज्ञान केवल अर्जुन के लिये नहीं अपितु सारे संसार के हर प्राणी के लिये बहुत ही उपयोगी है। वर्तमान परिवेश मे जब हिंसा, कलह,तनाव विषाद जैसी दुष्यंवृतियों से मानव समाज त्राहि -त्राहि हो रहा है ।ऐसे में श्री मद भागवत गीता की सदुपयोगिता और भी बढ़ जाती है।
असत्य के सामने अकेले खड़ा होगा सत्य
इस मौके पर जैन सन्त सोहम मुनि जी महाराज ने कहा कि गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है कि जब सत्य से असत्य की लड़ाई होगी तो सत्य अकेले खड़ा होगा और असत्य की फौज लंबी होगी क्योंकि असत्य के पीछे मूर्खों का झुंड होगा। मौके पर समाजसेवी मंतोष कुमार मिश्रा ने कहा कि केवल गीता का यही दिव्य ज्ञान मानव मात्र की रक्षा कर सकता है। अतएव संसार चक्र मं े पीड़ित मानवता के कल्याण के लिये इस दिव्य ज्ञान का दान करे। इस अवसर पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक डॉ जयनंदन पांडेय ने कहा कि पद्म पुराण मे भी कहा गया है सब दानो मे अन्न दान श्रेष्ठ है । लेकिन अन्न दान से भी श्रेष्ठ है विद्या दान और विद्या दान मे भी भक्ति की विद्या दान अति श्रेष्ठ है। इस अवसर पर प्राचार्य नित्यानंद उपाध्याय ने कहा कि भागवत गीता के 18 वे अध्याय मे स्वयं योगेश्वर श्री कृष्णा कहते है “हे अर्जुन जो मेरे और तुम्हारे बीच के इस संवाद को दूसरों से कहता है इसका दान करता है वो मेरा सबसे प्यारा भक्त है। इस अवसर पर जागरूकता अभियान के समन्वयक रमेश कुमार पान ने कहा कि यह धन्य है पावन धरती जहां भगवान कृष्ण जी पधारे हैं। इस अवसर पर गायक भैया अजित ने कहां की भगवान कृष्ण की पावन धरती राजगीर में गीता जी के जयंती मनाया जा रहा है यह अपने आप में एक बड़ी बात है। जब तक हमारा तन मन स्वच्छ नहीं होगा तब तक हम लोग अच्छा सुकर्म नहीं कर पाएंगे। इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कर्म प्रधान विश्व करि राखा जो जस करही तसहि फल चाखा।

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