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सरकार की पहल:फलदार पौधे लगाने वाले किसानों को 50% अनुदान

सासारामएक महीने पहले
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  • योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन या किसान सलाहकार व कृषि समन्वयक को आवेदन देना होगा
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फलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान देगी। आम, लीची, अमरूद, पपीता, आंवला के लिए प्रति हेक्टेयर 50 प्रतिशत यानी 50 हजार रुपए अनुदान मिलेगा। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना है। जो किसान ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते वे किसान सलाहकार व कृषि समन्वयक को आवेदन दे सकते हैं। वे आवेदन को ऑनलाइन जमा करा देंगे। जिला उद्यान पदाधिकारी विजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि पपीता और केला की खेती के लिए अनुदान दो किस्तों में मिलेगी।

आम, लीची, अमरूद, आंवला के लिए तीन किस्तों में अनुदान मिलेगा। प्रथम वर्ष में एक हेक्टेयर के लिए 30 हजार मिलेगा। दूसरे व तीसरे वर्ष में 10-10 हजार रुपए देने का प्रावधान है। केला व पपीता की खेती के लिए प्रथम वर्ष में 75 प्रतिशत और दूसरे वर्ष में 25 प्रतिशत अनुदान राशि मिलेगी। टिशू कल्चर केला की खेती प्रति हेक्टेयर लागत खर्च 1.25 लाख है। आम, अमरूद, लीची की लागत खर्च 1 एक लाख रुपए प्रति हेक्टेयर है।

नर्सरी से बढ़ा सकते हैं आमदनी, 16 लाख रुपए का प्रावधान
इस योजना के तहत किसानों को खेत पर पौधों की नर्सरी डेवलप कर आय प्राप्त करने का मौका भी दिया है। एक हेक्टेयर में नर्सरी तैयार करने का सरकार ने 16 लाख रुपए का प्रावधान रखा है। लेकिन किसान को उसकी क्षमता 50 हजार पौधों की रखनी होगी। पौधे बेचकर आय प्राप्त कर सकते हैं। फलदार पेड़ में आम, जामुन, बेलपत्र, अमरूद, लसोड़ा, शहतूत, अनार, आंवला, गुंदा, गुंदी, इमली, नींबू, महुआ, करोंदा, बेर, सीताफल।

छायादार में बड़, पीपल, नीम, करंज, कदंब, अर्जुन, कोहड़ा। इमारती वृक्ष में शीशम, बबूल, रोहिड़ा, सागवान, बांस पॉपलर। जलाऊ लकड़ी में देशी बबूल,खेजड़ी, जंगल जलेबी चुरेल। चारे वाले में खेजड़ी, अरडू, सहजन, झाड़ी बेर। अन्य में चंदन, कूमठा, तेंदुए, अमलतास, कचनार, सिल्वर आदि को सूची में शामिल किया है।

एक पौधे की लागत 70 रुपए, 4 किस्तों में मिलेगा भुगतान
इसे लेकर 4 साल की कार्य योजना तैयार की गई है। सरकार ने एक पौधा लगाने की लागत 70 रुपए माना है। 100 से 500 पौधे लगाने पर लाभार्थी किसान को 50 फीसदी अनुदान दिया जाएगा। फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद अनुदान राशि का 60 फीसदी हिस्सा भारत सरकार 40 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार देगी। जो कार्ययोजना के तहत 4 किश्तों में मिलेगा। पहले साल में 50 फीसदी अनुदान की 40 फीसदी राशि ही किसान को मिलेगी। दूसरे, तीसरे चौथे साल में उसे 20-20 फीसदी अनुदान राशि मिलेगी। योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास मृदा स्वास्थ्य कार्ड होना जरूरी है। योजना के तहत किसान के खेत पर जैविक कार्बन सुधार की मॉनिटरिंग भी होगी।

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