उदासीनता:नेशनल ग्रीन ट्रिव्यूनल के हस्तक्षेप से टल सकती है बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया

सासाराम19 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • 2018-2019 में भी हो चुके हैं घाट निलाम, जिनकी अग्रिम जमानत राशि अभी भी पड़ी है सरकार के पास

रोहतास में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया में बाधा आने की उम्मीद है। जिसके पीछे नेशनल ग्रीन ट्रिव्यूनल का हस्ताक्षेप का मुख्य कारण हो सकता है। केंद्र की यह संस्था एनजीटी के तरफ से अभी तक इन बालू घाटों की नीलामी के लिए कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। जब तक से यह संस्था अनापति प्रमाण पत्र नहीं देगी तब तक नीलामी प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकती है। राज्य खान एवं भूतत्व विभाग के तरफ से मिली जानकारी के अनुसार 8 अक्टूबर को रोहतास सहित सात जिलों के बालू घाटों का नीलामी प्रक्रिया शुरू होने वाली थी।

जिसमें एनजीटी की भूमिका महत्वपूर्ण है। अंतिम समाचार आने तक एनजीटी ने अपना रूख स्पष्ट नहीं किया था। जिसका विभाग इंतजार कर रहा है। खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा खनन प्रक्रिया को शुरू कर विभागीय साइट पर अपलोड करने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उधर इन घाटों के लिए पहले से हुई नीलामी प्रक्रिया भी विभाग के सामने चुनौती बनी हुई है। जिसके लिए निकाली गई निविदा में घाटों की नीलामी हो चुकी थी। प्रत्येक घाट की हुई नीलामी पर उसकी अग्रिम राशि के रूप में दस प्रतिशत विभाग ने एजेंसियों से जमा करा लिया था।

2018-2019 में भी हुई थी इन घाटों की नीलामी
रोहतास जिला के सोन सहित अन्य नदियों में बंद पड़े जिन बालू घाटों की नीलामी करने के लिए राज्य सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग ने नए सिरे से निविदा निकालने की घोषणा की थी। उन बालू घाटों की दो साल पहले 2019 में भी नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। जिसमें राेहतास के लगभग चार दर्जन बालू घाटों की नीलामी विभिन्न कंपनियों ने अलग अलग लिया था। जिसकी अग्रिम राशि के रूप में लगभग 60 करोड़ की राशि विभाग के खाते मे जमा भी करा ली गई थी। सभी घाटों की नीलामी की बोली पांच सौ करोड़ से ज्यादा में गई थी। उसके दस प्रतिशत की राशि पिछले दो वर्षों से सरकार के पास पड़ी है। उन कंपनियों ने सरकार से अपनी राशि और निविदा पर विचार करने के लिए अलग से गुहार लगाई है।

ग्रीन ट्रिब्यूनल के अनुमति के बाद ही होगी नीलामी
नदियो के संरक्षण और पर्यावरण के लिए बनाई गई केंद्र की इस संस्था से बिना अनुमति मिले बालू घाटों की नीलामी संभव नहीं है। जिसके लिए राज्य सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग ने ट्रिव्यूनल में अनुशंसा भेज दी थी। इधर बालू खनन में लगी पूर्ववर्ती कंपनियों ने सोन में ज्यादा पानी आने सहित कोविड काल का हवाला देकर अपनी अवधी बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। जिस पर अभी तक कोर्ट का रूख सामने नहीं आया है। यह बालू घाटों की नीलामी में अड़चन का दूसरा पहलू है। जानकारी हो कि रोहतास में सोन नदी में बालू का खनन कर रही कंपनी आदित्या मल्टीकॉम ने भारी घाटा दिखाकर खनन से हाथ खड़े कर दिए थे। उसके बाद की गई कार्रवाई में लाखों एमटी बालू चोरी सहित कई मामले सामने आए थे। जिनमें प्रशासन ने कंपनी पर एफआईआर भी दर्ज कराया था।

बालू की कमी से इधर मचा है त्राहिमाम| पिछले वर्षों की तरह 1 अक्टूबर से बालू खनन शुरू होने की उम्मीद लगाए बैठे जिले की विभिन्न कंट्रक्शन कंपनियों को उस समय निराशा हाथ लगी। जब पता चला कि रोहतास में बालू का खनन फिलहाल नहीं हो पाएगा। इधर बालू की कमी से स्थानीय स्तर पर रूके पड़े भवन निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों में काम करने वाले मजदूरों और राजमिस्त्री के सामने भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यहां तक की सरकारी कार्य भी ठप पड़े हुए हैं।

खबरें और भी हैं...