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सासाराम:ऑनलाइन शिक्षा की गुणवत्ता जांच के लिए सीबीएसई ने कराया सर्वे

सासाराम14 दिन पहले
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  • शिक्षक कितने डिजिटली साक्षर, स्कूलों से मांगा गया था जवाब

ऑनलाइन सर्वे से लॉकडाउन में ऑनलाइन पढ़ाई के सच का खुलासा होगा। कोविड-19 के कारण मार्च से स्कूल बंद हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है। लॉकडाउन का काफी प्रभाव स्कूलों पर भी पड़ा है। इस कारण बच्चों, अभिभावकों के साथ स्कूलों के समक्ष कई चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। सीबीएसई ने स्कूलों पर लॉकडाउन के प्रभाव को कम करने व उनकी चुनौतियों के समाधान के लिए प्रयास शुरू किया है। बोर्ड ने इसके लिए ऑनलाइन सर्वे शुरू किया है।

सीबीएसई संगठन के पीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि सीबीएसई ने इस सर्वे के माध्यम से स्कूलों से विभिन्न तरह के प्रश्न पूछे हैं। खासकर यह कि उनके यहां शिक्षक कितने डिजिटली साक्षर हैं। स्कूलों को सर्वे में पूछे गए सवालों के जवाब 31 जुलाई तक देने का निर्देश दिया गया था। स्कूल प्रबंधन द्वारा दिए गए जवाबों का सीबीएसई द्वारा गंभीरता से जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि बदली शैक्षिक परिस्थितियों में स्कूल कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। वहीं, अभिभावक मनोज सिंह ने कहा कि मेरा बेटा आदित्य सिंह उज्जैन जूम पर रेगुलर क्लास ले रहा है, लेकिन इस ऑनलाइन पढ़ाई-लिखाई का अनुभव बस ठीक ही है। हर बच्चे पर विशेष रूप से ध्यान देने की समस्या इसमें दिखाई दे रही है। इस तरह की बात तकरीबन हर शख्स ने बताई है, चाहे वह शिक्षक हो, छात्र या पेरेंट्स।

इस महामारी ने कैंपस एक्सपीरियंस के पूरे आइडिया को ही बदल दिया है। गोविन्द शंकर सिंह ने कहा कि भले ही यह ऑनलाइन एजूकेशन का दौर है, लेकिन यह स्कूलों की जगह कभी नहीं ले पाएगी। बड़ा सवाल यह है कि कोविड-19 के बाद की दुनिया में मोबाइल एप्लिकेशन आधारित शिक्षण व्यवस्था भारत जैसे देश में कैसे बड़ी तादाद में बच्चों तक पहुंच सकती है जहां बहुत सारे लोगों के पास न तो स्मार्टफोन हैं और न ही इंटरनेट तक उनकी पहुंच है।

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