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लोगों की बेबसी:गायब हुए जनता के मुद्दे, एक-एक कर बंद होती गईं रोहतास की औद्योगिक ईकाइयां

डेहरी सदर7 दिन पहले
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  • रोजी-रोटी के सवाल पर हर बार ठगी जाती रही है रोहतास जिले की जनता
  • 140 करोड़ में रेलवे ने इसके करीब 220 एकड़ परिसर को खरीदा था
  • 32.5 टन कैपेसिटी का फ्रेट कैरिडोर व कप्लर सहित अन्य उद्योग स्थापित करने की रेलवे ने योजना बनाई है

विधानसभा चुनाव के दौरान सरकार बनाने की दौड़ जारी है। जनसंपर्क और जन सभाओं के जरिए मतदाताओं को विभिन्न आश्वासनों के जरिए रिझाने की कोशिशें जारी हैं। इससे इतर विधानसभा क्षेत्र ही नहीं संपूर्ण जिले सहित आसपास के इलाके को प्रभावित करने और उनके रोजी रोटी का जुगाड़ करने के अहम मुद्दे गायब हैं।

नौजवानों के रोजगार गारंटी की बात नहीं हो रही है। सैकड़ों एकड़ में फैले रोहतास उद्योग समूह का इलाका बेबस है। रोजगार पर चर्चा हुई तो कबाड़ में बिक चुके रोहतास उद्योग समूह का मुद्दा भी चर्चा में होगी। चर्चा तो इस बात पर भी होने लगेगी कि अभी कुछ महीनों पहले ही झूला वनस्पति लिमिटेड और क्षेत्र का जेबीएल राइस मिल भी बंद हो चुका है और बेरोजगारी बढ़ी है।

इसी कड़ी में सबका ध्यान उस ओर भी मुड़ जाएगा की करीब 23 एकड़ में फैले डेहरी औद्योगिक क्षेत्र में दर्जनों छोटी औद्योगिक इकाइयां क्यों बंद पड़ी हुई हैं। शहर से सटे सुअरा हवाई अड्डा इलाके में टेक्स्टाइल हब बनाने का संकल्प ठंडे बस्ते में है।

डालमियानगर में रेल कारखाना लगाने की प्रक्रिया धीमी
रोहतास उद्योग समूह की संपत्ति बेचकर बकायादारों को भुगतान करने की प्रक्रिया के तहत रेलवे ने इसके 220 एकड़ परिसर को करीब 140 करोड़ में इसलिए खरीदा था कि वह उद्योग स्थापित कर स्थानीय लोगों को रोजगार देगा। पिछले 13 वर्षों में इस प्रक्रिया के लिए सरकारी करोड़ों रुपए का खर्च हो गए हैं और कबाड़ बेचकर करोड़ों की आमदनी के सिवा मामला जमीनी हकीकत नहीं ले सका है।

वर्ष 2015 में सुअरा हवाई अड्डे से एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पीएम ने भी रेल कारखाना का जिक्र किया था तो लगा अब कायाकल्प हो जाएगी। लेकिन अब तक रोजगार देने लायक नहीं बन सका। हालात बिगड़ते आगे बढ़े तो इसी सभा स्थल के ठीक बगल में स्थापित झूला वनस्पति उद्योग भी इसी वर्ष बंद होकर कबाड़ में बिकने को तैयार खडा़ है। सैकड़ों बेरोजगार होकर सड़क पर हैं।

रोहतास उद्योग समूह ने औद्योगिक मानचित्र पर पांच दशकों तक किया राज
अपने स्थापना काल 18 मार्च 1933 से 9 जुलाई 1984 तक डालमियानगर रोहतास उद्योग समूह ने औद्योगिक मानचित्र पर राज किया। समापन में जाने के बाद रेलवे द्वारा खरीदी गयी। कैंपस में मौजूद मशीनों को कबाड़ के भाव 74 करोड़ में बेच दिया गया। पहले यहां 60 से 70 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध था।

रेलवे ने वैगन रिपेयर कारखाना, 32.5 टन कैपेसिटी का फ्रेट कैरिडोर व कप्लर सहित अन्य उद्योग स्थापित करने की योजना बनाई है। रेलवे की अनुषंगी इकाई राइट्स द्वारा कारखाना लगाने की निविदा आमंत्रित की गई थी। वैगन ओवरहालिंग कार्यशाला की स्थापना के लिए 290.45 करोड़ रुपए रखा था। कैंपस में दो बड़े शेड निर्माण की योजना है। समय बीत रहे लेकिन निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ने से मायूसी बरकरार है।

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