खेलकूद:बचपन में शीशा तोड़ने वाला माधव, अब राष्ट्रीय मुक्केबाजी में दिखा रहा दम

सासाराम4 दिन पहले
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अपने कोच के साथ माधव मिश्रा - Dainik Bhaskar
अपने कोच के साथ माधव मिश्रा
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुक्केबाजी में भारत को गोल्ड दिलाना है लक्ष्य

रोहतास जिले के सिसिरित (सरैया) निवासी माधव मिश्रा मुक्केबाजी (बाक्सिंग) में राष्ट्रीय पहचान बना चुका है। वह किसान रामनिवास मिश्र के पांच बेटों में सबसे छोटा है। माधव ने बताया कि उनके पिता ही उनके असली रोल मॉडल है। उसने बताया कि बचपन से मुक्केबाजी का बड़ा शौक था। कक्षा सातवीं में पढ़ने के दौरान डीएवी स्कूल की बस में चढ़ते ही कांच का शीशा तोड़ देता था। जिसके लिए कई बार प्रबंधन से माफी मांगनी पड़ी थी। माधव के पास पांच मेडल है। जिनमें दो गोल्ड और दो रजत और एक कांस्य पदक है।

सातवीं राष्ट्रीय फेडरेशन कप 2020 में गोल्ड मेडल हासिल करने के साथ ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी बाक्सिंग चैंपियनशिप 60 किलोग्राम वर्ग में लगातार दो साल 2019-20 एवं 2021-22 भी खेल चुका है। इसके अलावा बिहार स्टेट जूनियर बाक्सिंग चैंपियनशिप में भी अपना जौहर दिखा चुका है।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ रेलवे में ट्रेनिंग भी ले रहा माधव : गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में मैकेनिकल इंजीनियरिंग द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहे माधव मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में वह पढ़ाई के साथ बिलासपुर रेलवे में प्रशिक्षण भी ले रहा है। अर्जुन अवार्ड से सम्मानित मुक्केबाज वैंकटेश देवराजन उन्हें प्रशिक्षण दे रहे हैं।

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