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लापरवाही:पेटदर्द, उल्टी, जोड़ों का दर्द, कमजोरी और भूख में कमी भी कोरोना के लक्षण, खुद को रखें सतर्क

सासाराम13 दिन पहले
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  • भारत सरकार की मानें तो इस समय देश के 18 राज्यों में कोरोना के खतरनाक वैरिएंट्स मिले हैं
  • 24 घंटे में 28 और 8 अप्रैल को फिर 28 नए मरीज के साथ कुल सक्रिय संक्रमितों की संख्या147 हो चुकी है

कोरोना वायरस की दूसरी लहर तेज हो गई है। गत एक सप्ताह के भीतर 121 नए केस सामने आए हैं। यह पहली लहर के पीक से भी ज्यादा हैं। पहली लहर में जिले में अबतक एक भी मरीज नहीं मिले थे। पहली लहर का पीक 8 अगस्त को था, जब 24 घंटे में 153 केस सामने आए थे।

उसके मुकाबले दूसरी लहर में 7 अप्रैल को 24 घंटे में 28 और 8 अप्रैल को फिर 28 नए मरीज के साथ कुल सक्रिय संक्रमितों की संख्या147 हो चुकी है। और तो और, कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन एक्टिव होने से नए लक्षण भी सामने आ रहे हैं। अब पेट दर्द, उल्टी, जोड़ों का दर्द, कमजोरी, भूख में कमी को भी कोरोना वायरस का लक्षण माना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अलग-अलग लोगों को अलग-अलग तरह के लक्षण सामने आ रहे हैं। ज्यादातर लोगों को माइल्ड से मॉडरेट बीमारी हो रही है और अस्पताल में भर्ती हुए बिना ठीक भी हो रहे हैं। आम तौर पर व्यक्ति के वायरस से इन्फेक्ट होने के 5-6 दिन बाद यह लक्षण सामने आ रहे हैं। हालांकि कुछ मामलों में यह लक्षण 14 दिन तक भी सामने आए हैं।

क्यों आ रही है संक्रमण में तेजी?
एसीएमओ डॉ. केएन तिवारी कहते हैं कि हर वायरस म्यूटेट होता है और उसके नए वैरिएंट्स सामने आते हैं। कोरोना वायरस में भी यह हो रहा है। यूके और ब्राजील जैसे कुछ स्ट्रेन गंभीर हैं और यह तेजी से फैलते हैं। भारत सरकार की मानें तो इस समय देश के 18 राज्यों में कोरोना के खतरनाक वैरिएंट्स मिले हैं। इनमें महाराष्ट्र में मिला डबल म्यूटेंट स्ट्रेन भी शामिल है। महाराष्ट्र में जो केस सामने आए हैं, उनमें वायरस में दो जगहों पर बदलाव हुए हैं। इससे इसकी ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ी है। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि लोगों के व्यवहार में भी बदलाव आया है। उन्हें लग रहा है कि कोरोना वायरस खतरनाक नहीं रहा, इसलिए मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजर के इस्तेमाल में कमी आई है। इसका भी वायरस के नए केस सामने आने में अहम योगदान है।

थकान भी हो सकते है कोरोना के शुरुआती लक्षण
बहुत ज्यादा कमजोरी और थकान को भी कोरोना इन्फेक्शन का शुरुआती लक्षण माना जा रहा है। यह साइटोकिन्स की वजह से हो सकता है, जो शरीर में किसी भी तरह के इन्फेक्शन पर रिएक्शन के तौर पर इम्यून सिस्टम में बनने लगते हैं। जब आपका शरीर इन्फेक्शन से लड़ता है तो आपको महसूस होगा कि आपके शरीर की पूरी एनर्जी ही किसी ने खींच ली है।

किस तरह के नए लक्षण सामने आए हैं?
देश में नए केसेज को लेकर जो स्टडी हुई है, उसके अनुसार बदलते स्ट्रेन की वजह से लक्षण भी बदल रहे हैं। अब सिर्फ बुखार, थकान या सूखी खांसी, स्वाद और गंध महसूस न होना ही कोरोना के लक्षण नहीं हैं। भारत के अस्पतालों में हुई रिसर्च के अनुसार वायरस के लिए पॉजिटिव पाए गए मरीजों में नए लक्षण सामने आए हैं। नए लक्षणों में पेट दर्द, मतली, उल्टी और सर्दी के साथ ही मांसपेशियों का दर्द, गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल जटिलताएं, कमजोरी और भूख लगने में कमी भी शामिल हैं। डॉक्टर बुखार और खांसी जैसे सामान्य लक्षण न होने के बाद भी टेस्ट करवा रहे हैं तो मरीज पॉजिटिव आ रहे हैं। नए स्ट्रेन की वजह से आंखों में लालिमा, सूजन और पानी आने की समस्या हो सकती है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ऑडियोलॉजी में पिछले हफ्ते छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इन्फेक्शन सुनने की क्षमता को भी कमजोर बना रहा है। स्टडी के मुताबिक 7.6% इन्फेक्टेड लोगों की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है।

फिर खोले जाएंगे क्वारेंटाइन सेंटर, वही होगी कोरोना जांच
राज्य सरकार के निर्देश पर अब प्रखंड में क्वारेंटाइन सेंटर का शुरुआत की जाएगी। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले को देखते हुए राज्य सरकार के निर्देश पर सभी प्रखंडों में क्वारेंटाइन सेंटर बनाने का निर्देश दिया गया है। इसमें कोरोना के दूसरी लहर को रोकथाम के लिए यह सेंटर सभी प्रखंडों में बनाया जा रहा है। इसकी जानकारी देते हुए बीडीओ रामजी पासवान ने बताया कि नोखा प्रखंड के श्रीखिंडा गांव में क्वारेंटाइन सेंटर बनाने के लिए स्कूल का चयन किया जा रहा है। हालांकि अभी इसका फाइनल नहीं किया गया है।

कोरोना संक्रमण को नियंत्रण करने के प्रवासी मजदूरों आने के लिए ट्रेन का परिचालन भी शुरू होने के संभावना व्यक्त की जा रही है। वैसे भी कोरोना के डर से लोग शहर छोड़ कर अपने गांव आ रहे है। महाराष्ट्र,दिल्ली,अहमदाबाद सहित अन्य शहरों से आने वाले प्रवासी पर प्रशासन को नजर रखने को बोला गया है। कोरोना संक्रमण को लेकर प्रवासी मजदूरों को टेस्टिंग और वैक्सीनेशन पर भी जोर देने को कहा गया है। वही पंचायत के प्रतिनिधियों को भी इसमें सहयोग करने की अपील प्रशासन द्वारा किया गया है। इस मामले को पंचायत स्तर पर जांच की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया है। शहर या ग्रामीण इलाको में माइक्रो केटनवेंट जोन बनाने की बात कही गई है। वैसे अभी नोखा प्रखंड में कोई वैसा पॉजिटिव केस नहीं मिल पाया है। जिसके पालन करने के लिए प्रशासन को निर्देशित भी किया गया है।

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