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प्रदूषण का खतरा:जिले में लगभग डेढ़ सौ हैं ईंट भट्‌ठे, पर मानक के अनुरूप इनमें से एक भी नहीं

सासाराम6 दिन पहले
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  • ईंट-भट्ठों के आधुनिकीकरण की मुहिम फ्लाप, बढ़ते जा रहे हंै अवैध ईट भट्ठे

जिले में सैकड़ों अवैध ईट भट्ठे चल रहे हैं। इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से अवैध ईट भट्ठों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे पर्यावरण तो प्रदूषित हो रही रहा है। साथ ही राजस्व को हो ने वाले आय का भी नुकसान हो रहा है। इट भट्ठा निर्माण के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए मानक का जिले में कहीं भी पालन नहीं किया जा रहा।

विभाग भी केवल खानापूर्ति में लगी है। इट भट्ठा के लिए तय मानक के अनुरूप जिले में कार्य हो इसके लिए विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। जिसका परिणाम है की जिले के विभिन्न स्थानों पर स्थापित इट भट्ठा की चिमनी धुआ के रूप में जहर उगल रहे है। जिले मे लगभग डेढ़ सौ इट भट्ठे है। जिसमें कोई भी मानक के अनुरूप नहीं पाया गया है।

विभागीय अधिकारी ने कार्रवाई के नाम पर मात्र दो दर्जन से अधिक अमानक ईट भट्ठा संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराया है। जिसपर कार्रवाई फाईलों तक हीं सिमटकर रह गई। इससे ईंट भट्ठा संचालकों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं ये लोग बड़े पैमाने पर ईट का निर्माण कर सरकारी व निजी जमीन के खनन करने में लगे हुए हैं। लेकिन सरकार एवं विभाग मुकदर्शक बना है। जिले के सासाराम, डेहरी, तिलौथू, चेनारी, शिवसागर, कोचस, बिक्रमगंज, नोखा आदि प्रखंडों में अमानक ईट भट्ठा संचालित हो रहे हैं।

जनजीवन के साथ ही हरियाली का नुकसान
मानक विपरीत चल रहे ईट भट्ठों की चिमनियों से निकल रहे धुएं से पर्यावरण को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। नियमानुसार चिमनियों के नीचे पानी का टैंक बनाए जाने का प्राविधान है। जिससे उससे निकलने वाले हानिकारक धुएं को कुछ हद तक रोका जा सके। लेकिन शायद ही जिले के ईट भट्ठों पर ऐसे टैंकों का निर्माण हो। इसके साथ ही चिमनियों की डिजायन व ऊंचाई भी निर्धारित है ताकि उससे निकलने वाला धुआं ऊपर ही उड़ कर निकल जाए। इससे पर्यावरण के खतरे के साथ ही हरियाली का नुकसान पहुंचा है। फलदार पेड़ों में फल नही आते हैं और ऊंचाई वाले पेड़ों के बाग आदि पर इसका खासा असर पड़ता है।

एनजीटी के आदेश के बाद भी नहीं हो सका कार्यान्वयन
ईंट-भट्ठों के माध्यम से कम से कम प्रदूषण फैले, इसको ध्यान में रखकर उनके आधुनिकीकरण की मुहिम शुरू की गई है। एनजीटी के आदेश के बाद यह कदम उठाया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि सभी ईंट-भट्ठा संचालक अपने भट्ठों को नेचुरल ड्राट से इन्डयूज्ड ड्राट क्लीन में परिवर्तित करें।

ईंट-भट्ठों को जिगजैग विधि में परिवर्तित कराने को कहा गया है। इस विधि से ईंट भट्ठे से निकलने वाली राख वातावरण में नहीं फैलती है, जिसके कारण प्रदूषण कम होता है। नियमानुसार सिस्टम अपग्रेड न करने पर बोर्ड और जिला प्रशासन द्वारा ईंट-भट्ठों को बंद किया जा सकता है।

इसके अलावा ईंट निर्माण के लिए मिट्टी खनन करने से पहले भी अनुमति लेनी होगी। इस अनुमति के बाद बोर्ड से जल और वायु की सहमति प्राप्त करनी होगी। एनओसी लेने के बाद ही ईंट-भट्ठे का संचालन किया जा सकता है। लेकिन जिले में यह मुहिम फ्लॉप साबित हो रहीं है।

अधिकारियों के निर्देश के बाद कार्रवाई: खनन पदाधिकारी
जिला खनन पदाधिकारी विकास कुमार ने बताया कि खनन पदाधिकारी ने कहा कि जिगजैग विधि से तैयार किए गए ईंट अच्छी क्वालिटी की होती है। चिमनी की ऊंचाई 140-150 फीट होती है। पर्यावरण को देखते हुए सरकार ने इस तरह के नियम लागू कर रखा है। ईट भट्ठा को ले मुख्यालय द्वारा वर्तमान में कोई आदेश नहीं जारी किया गया है। वरीय अधिकारियों से निर्देश प्राप्त हाने के बाद हीं कोई कार्रवाई की जा सकती है।

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