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धर्म समाज:दूसरे दिन आस्था-भक्ति के साथ देवी ब्रह्मचारिणी की हुई पूजा-अर्चना

सासाराम10 दिन पहले
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शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन रविवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की गई। भक्तों ने अपने घरों एवं मंदिरों में जाकर देवी की आराधना की। इस दौरान शहर के विभिन्न देवी मंदिरों में सुबह से हीं लोगों की भीड़ लगी रही। पूजा-अर्चना के बाद घर एवं मंदिरों में दुर्गा सप्तशती की पाठ भी किया गया।

पंडित रामअवधेश चतुर्वेदी ने बताया कि ब्रह्म का अर्थ है तपस्या व चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली देवी। मां के हाथों में अक्ष माला और कमंडल होता है। मां ब्रह्मचारिणी के पूजन से ज्ञान सदाचार लगन, एकाग्रता और संयम रखने की शक्ति प्राप्त होती है और व्यक्ति अपने कर्तव्य पथ से भटकता नहीं है। मां ब्रह्मचारिणी की भक्ति से लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है। कहा जाता है कि मां पूजा करने वाले भक्त जीवन में सदा शांत चित्त और प्रसन्न रहते हैं। उन्हें किसी प्रकार का भय नहीं सताता।

या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा मंत्र के द्वारा देवी का अाह्वान किया जाता है। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति भक्ति भाव एवं श्रद्धा से दुर्गा पूजा के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उन्हें सुख, आरोग्य की प्राप्ति होती है और मन प्रसन्न रहता है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं सताता है। सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।

आज देवी चंद्रघंटा की होगी आराधना
नवरात्र के तीसरे दिन साेमवार को देवी के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा का पूजन किया जायेगा। देवी चंद्रघंटा के सिर पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र नजर आता है। यही वजह है कि माता के भक्त उन्हें चंद्रघंटा कहकर बुलाते हैं। देवी चंद्रघंटा का वाहन सिंह होता है। मां की 10 भुजाएं, 3 आंखें, 8 हाथों में खड्ग, बाण आदि अस्त्र-शस्त्र हैं। इसके अलावा देवी मां अपने दो हाथों से अपने भक्तों को आशीष देती हैं। मां चंद्रघंटा की पूजा करने से मन के साथ घर में भी शांति आती है और व्यक्ति के परिवार का कल्याण होता है।

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