नवरात्र:जगत जननी जगदम्बा के उपासक आज कन्या पूजन के साथ नौ दिवसीय व्रत का करेंगे समापन

सासारामएक महीने पहले
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कन्या पूजन की फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
कन्या पूजन की फाइल फोटो।
  • इस समय कन्या पूजन का है विशेष महत्व, दो से नौ वर्ष तक की कन्याओं का किया जाता है पूजन

नवरात्र के नौवें दिन आज गुरुवार को सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना होगी। सिद्धिदात्री के पूजन के साथ हीं नौ दिवसीय नवरात्र व्रत का समापन भी हो जाएगा। नवरात्र पूजन से जुड़ी कई परंपराएं हैं। इनमें से एक है कन्या पूजन। कन्या पूजन से न सिर्फ मां आदि शक्ति प्रसन्न होती हैं बल्कि सुख व समृद्धि भी आती है। शास्त्रों में नवरात्रि के अवसर पर कन्या पूजन या कन्या भोज को अत्यंत ही महत्वपूर्ण बताया गया है। सनातन धर्म के लोगों में सदियों से ही कन्या पूजन और कन्या भोज कराने की परंपरा है। विशेषकर कलश स्थापना करने वालों और नौ दिन का वृत रखने वालों को लिए कन्या भोज को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।

कुछ लेखों के अनुसार भविष्यपुराण और देवीभागवत पुराण में कन्या पूजन का वर्णन किया गया है। इस वर्णन के अनुसार नवरात्रि का पर्व कन्या भोज के बिना अधूरा है। कन्या पूजन के संबंध में आचार्य पंडित इन्दु प्रकाश मिश्र ने बताया कि दो वर्ष से लेकर दस वर्ष तक की कन्याएं साक्षात माता का स्वरूप मानी गई हैं। यही कारण है कि नवरात्र में इसी उम्र की कन्याओं के पैरों का विधिवत पूजन कर भोजन कराया जाता है। मान्यता है कि होम, जप और दान से देवी उतनी प्रसन्न नहीं होतीं, जितनी कन्या पूजन से होती है। कहा जाता है कि विधिवत, सम्मानपूर्वक कन्या पूजन से व्यक्ति के मन से भय दूर हो जाता है।

आयु के अनुसार है कन्या रूप का महत्व, पूजन से मिलता है मनोवांछित फल
नवरात्र में सभी तिथियों को एक-एक और अष्टमी या नवमी को नौ कन्याओं की पूजा होती है। दो वर्ष की कन्या (कुमारी) के पूजन से दु:ख और दरिद्रता दूर करती हैं। तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति रूप मानी जाती है। इनके पूजन से धन-धान्य और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। चार वर्ष की कन्या को कल्याणी माना जाता है। इनकी पूजा से परिवार का कल्याण होता है। जबकि पाच वर्ष की कन्या रोहिणी कहलाती है। इसे पूजने से व्यक्ति रोगमुक्त हो जाता है। छह वर्ष की कन्या को कालिका रूप कहा गया है। इससे विद्या, विजय, राजयोग की प्राप्ति होती है। सात वर्ष की कन्या का रूप चंडिका का है। इसकी पूजा करने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। आठ वर्ष की कन्या शाम्भवी कहलाती है। इनका पूजन करने से वाद-विवाद में विजय प्राप्त होता है। नौ वर्ष की कन्या दुर्गा कहलाती है। इनका पूजन करने से शत्रुओं का नाश होता है तथा असाध्य कार्य पूर्ण होते हैं। दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती है।

पूजन के लिए 10 वर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए कन्याओं की उम्र
कन्या पूजन के लिए जिन कन्याओं का चयन करें, उनकी उम्र दो वर्ष से कम और दस वर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। प्रातः काल स्नान करके प्रसाद में खीर, पूरी, और हलवा आदि तैयार करना चाहिए। इसके बाद कन्याओं को बुलाकर शुद्ध जल से उनके पांव धोना चाहिए। कन्याओं के पांव धुलने के बाद उन्हें साफ आसन पर बैठाना चाहिए। कन्याओं को भोजन परोसने से पहले मां दुर्गा का भोग लगाना चाहिए और फिर इसके बाद प्रसाद स्वरूप में कन्याओं को उसे खिलाना चाहिए। नौ कन्याओं के एक साथ एक छोटे बालक को भी भोज कराने का प्रचलन है। बालक भैरव बाबा का स्वरूप कहा जाता है। कन्याओं को भरपेट भोजन कराने के बाद उन्हें टीका लगाएं और कलाई पर रक्षा बांधें। कन्याओं को विदा करते वक्त अनाज, रुपया या वस्त्र भेंट करें और उनके पैर छूकर आशिर्वाद प्राप्त करें।​​​​​​​

शिवसागर: महाअष्टमी को लगी भक्तों की भीड़, लाेगाें ने मत्था टेक मांगी मन्नत

महाष्टमी के दिन शिवसागर प्रखंड के दुर्गा पंडालों मे भक्तों की अपार भीड़ देखी गई। इस दौरान आस्था पर कोरोना की सावधानियां फीकी पड़ गई। भक्तों ने कहा कि एक वर्ष के अंतराल पर मां का दीदार नवरात्र में हुआ है। वैसे हम लोग कोरोना संक्रमण को लेकर अलर्ट हैं। सावधानियां भी बरत रहे हैं। लेकिन मां दुर्गा के दर्शन पर किसी तरह का समझौता नहीं करने को तैयार हैं। अधिकांश लोगों ने वैक्सीन भी ले रखी है। मां दुर्गा की कृपा है अब कोरोना पूरी तरह से गायब हो जाएगा। रायपुर चोर,आलमपुर, बड्डी के मंदिरों और पंडालों मे भक्तों ने श्रद्धा पूर्वक पूजा किया। लेकिन शिवसागर स्थित दुर्गा पंडाल जो प्रखंड में पहली बार पंडाल परंपरा की नींव रखी गई है। काफी दर्शनीय और मनमोहक है। यहां आम लोगों के साथ खास लोग भी दर्शन के लिए आ रहे हैं। इसी कड़ी में सप्तमी के दिन सासाराम के विधायक राजेश गुप्ता भी इस पंडाल में अाकर मां का दर्शन किए। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा के पंडाल की शुरूआत प्रखंड के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने पूजा समिति के लोगों की प्रशंसा की और इस प्रखंड में मां दुर्गा का आशीर्वाद बना रहे। उसकी कामना की।

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