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  • There Is No Road In Neerpur Village With A Population Of Six Hundred, The Light Of Development Is Still Far Away, The Villagers Are Craving For Basic Facilities

मूलभूत सुविधाओं से वंचित:छह सौ की आबादी वाले नीरपुर गांव में सड़क नहीं, विकास की रोशनी अभी दूर, मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे ग्रामीण

शेखोपुरसराय25 दिन पहले
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कीचड़मय पगडंडी से होकर जाना पड़ता है प्रखंड मुख्यालय। - Dainik Bhaskar
कीचड़मय पगडंडी से होकर जाना पड़ता है प्रखंड मुख्यालय।
  • सुविधा न होने से लौटी बेटी की बारात, बारिश के दिनों में यह गांव टापू में तब्दील रहता है, जिसके चारों ओर पानी ही पानी

शेखोपुरसराय प्रखंड अंतर्गत नीरपुर गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। लगभग 600 आबादी वाले इस गांव में जाने के लिए सड़क नहीं है। इस गाँव मे इलाज के लिए न तो स्वास्थ्य केंद्र है न शिक्षा ग्रहण हेतु विद्यालय। सड़क के नाम पर कच्ची पगडंडी है जो इस गाँव के लोगों के आवागमन का एकमात्र सहारा है। बारिश के दिनों में यह गांव टापू में तब्दील रहता है और जिसके चारों ओर पानी ही पानी दिखता है।

इस कारण इस गांव में अन्य गाँव के लोग शादी-ब्याह करना पसंद नही करते। गांव वाले बताते है कि इस गाँव मे किसी तरह की मूलभूत सुविधाएं न होने की वजह से बेटे-बेटियों की शादी में समस्या आ रही है। इस बाबत ग्रामीण अखिलेश मालाकार ने बताया कि हाल ही में गांव में आए बारात को बैठने के लिए समुचित व्यवस्था नहीं रहने के कारण बारात उनके घर से वापस लौट गई थी।

यहाँ बारात ठहराने के लिए न तो स्कूल है न कोई सामुदायिक भवन। जिसमें बारात को ठहराया जा सके। छोटे बच्चों को पढ़ाई हेतु हेतु एक आंगनबाड़ी केन्द्र तक नहीं खुल सका है। गौरतलब है कि नीरपुर गांव शेखपुरा एवं नालंदा जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में अवस्थित है और यह गाँव पांची पंचायत में आता है।

हालांकि पंचायत के मुखिया शकीला देवी भी अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में नीरपुर गांव में कोई विकास का कार्य नहीं करवा पाए जबकि इस गांव के ग्रामीण कई बार जनप्रतिनिधि के मिलकर अपनी समस्या से अवगत कराते रहते है। लेकिन अब तक इस गांव की विकास हेतु कोई पहल नहीं किया गया है। वहीं, चुनाव के समय जनप्रतिनिधि हमेशा यही आश्वासन देते है कि जल्द ही गाँव की तस्वीर बदल जाएगी। लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह इस गांव के लोगों से मिलने से भी कतराते है।

स्वास्थ्य व शिक्षा से महरूम है ग्रामीण
आज भी इस गांव के लोग अपने छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाने को लेकर काफ़ी चिंतित है। लेकिन यहाँ न तो कोई प्राथमिक विद्यालय है और न कोई आंगनबाड़ी केंद्र। जिससे यहाँ के बच्चों का भविष्य अंधकारमय है। ग्रामीण मधुसूदन कुमार व संतु कुमार ने बताया कि सर्पदंश के कारण उनके पिताजी को समय पर उपचार नहीं मिलने के पीएचसी ले जाने के दौरान रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। सड़क नहीं रहने के कारण उन्हें चारपाई पर पगडंडी होते हुए ले जाया जा रहा था। लेकिन देर होने की वजह से इलाज के अभाव में उनकी मौत हो गयी। सड़क निर्माण हेतु ग्रामीणों द्वारा कई बार आंदोलन किया गया।लेकिन आजतक उनकी आवाज़ आलाधिकारियों एवं मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंच सकी है।

स्थानीय जनप्रतिनिधि भी नहीं लेते कोई रुचि
यहाँ के ग्रामीण बताते है कि इस बार पंचायत चुनाव से पहले हमारे गांव में सड़क, स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी सुविधाएं बहाल नहीं हुई तो सभी ग्रामीण पंचायत चुनाव का बहिष्कार करेंगे। अगर फिर भी हमलोगों की बात सुनी नहीं जाएगी तो हम लोग बीडीओ व सीओ कार्यालय सहित जिला मुख्यालय में धरना प्रदर्शन देंगे। गौरतलब है कि यह क्षेत्र बरबीघा विधानसभा अंतर्गत आता है और यहां दो बार सुदर्शन कुमार विधायक रह चुके है। लेकिन वह इस गांव के ग्रामीणों से मिलना भी मुनासिब नहीं समझते है। स्थानीय सांसद चंदन सिंह से कुछ उम्मीद जगी थी, लेकिन उनके द्वारा भी किसी प्रकार की कोई पहल नहीं किया गया। ग्रामीणों ने कहा कि अब उन्हें जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों पर विश्वास नहीं रहा है।

मुखिया ने माना नहीं मिल रही है सुविधा
इस सन्दर्भ में मुखिया शकीला देवी ने कहा कि नीरपुर गांव में जो सुविधा मिलना चाहिए था, वो नही मिल पाया। वर्ष 2018 में सड़क हेतु मनरेगा से कार्य कराया जा रहा था। लेकिन बीच रास्ते रैयती जमीन का अड़ंगा आ जाने के कारण सड़क निर्माण नहीं हो सका। वहीं, इस गांव में किसी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं है। जबकि विद्यालय भवन का निर्माण किया जा रहा था, लेकिन आधा निर्माण के दौरान प्राचार्य की मौत हो जाने के कारण मामला अधर में लटक गया। जिसके लिए वह लगातार प्रयासरत है कि नीरपुर गांव के लोगों को सुविधा मिल सकें।

  • नीरपुर का मामला उनके संज्ञान में आया है और प्रखड स्तर से जो संभव होगा, उस गांव को सुविधा उपलब्ध कराया जाएगा। सड़क, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मामले को जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। ताकि यहां के ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित न रहना पड़े।-अमरेंद्र कुमार अमर, बीडीओ शेखोपुरसराय।
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