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कोरोना संकट:गांव के 80% बच्चे ऑनलाइन नहीं पढ़ पा रहे हैं

शेखपुराएक महीने पहले
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  • स्मार्टफोन, लैपटॉप नहीं होने के कारण गरीब तबके के बच्चों को हो रही है काफी परेशानी

कोरोना महामारी के बाद हुए लॉकडाउन ने स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाई बंद हो गई। बच्चों की शिक्षा का एकमात्र रास्ता ऑनलाइन क्लास हो गया है। शैक्षणिक संस्थानों के बंद रहने के कारण सरकार की पहल पर ऑनलाइन कक्षाएं तो शुरू की गई है लेकिन पूरे जिले में 20 से 30 फीसदी बच्चे ही इसका लाभ ले पा रहे हैं। बच्चों के अधिकांश आबादी इससे वंचित है।

आंकड़ों को देखा जाए तो जिले में नामांकित तकरीबन 1 लाख 60 हजार बच्चों में से ग्रामीण इलाकों से जुड़े 70 फीसदी बच्चे के पास लैपटॉप, टेबलेट तो दूर स्मार्टफोन तक नहीं है। अभी ऐसे दर्जनों सुदूरवर्ती गांव है जहां बिजली और नेटवर्क की समस्या है। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई की बात बेमानी है। वर्तमान संकट के दौर में खराब इंटरनेट, बिजली की कमी और स्मार्टफोन या लैपटॉप का ना होना, बच्चों को पढ़ाई से दूर कर रहा है। सरकार ने मेरा दूरदर्शन मेरा विद्यालय अभियान की शुरुआत की, लेकिन विद्यार्थी इसमें भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।

लॉकडाउन में अभिभावकों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ

वहीं, दूसरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश ऐसे परिवार हैं जिनकी आमदनी कम है या लॉकडाउन में रुक गई है। किसी तरह मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। ऐसे में बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन की व्यवस्था करना उनके लिए एक चुनौती है। स्मार्टफोन के बाद उनके सामने डेटा की भी समस्या होती है। कोरोना के इस संक्रमण काल में शिक्षा का अधिकार सिर्फ स्मार्टफोन या लैपटॉप डिवाइस रखने वाले बच्चों के पास ही सिमट कर रह गया है और जिनके पास डिजिटल डिवाइस नहीं है वह इस अधिकार से वंचित हो रहे हैं। जिस कारण उनकी पढ़ाई पूरी नहीं पा रही है और आगे आने वाली परीक्षाओं का भी भय उन्हें सता रहा है।

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