अच्छी खबर:123 दिन बाद वीरान पड़े शिक्षा के मंदिर हुए गुलजार

शेखपुरा2 महीने पहले
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लापरवाही ठीक नहीं: जिले के एक स्कूल में बिना मास्क के पढ़ने पहुंचे बच्चे। - Dainik Bhaskar
लापरवाही ठीक नहीं: जिले के एक स्कूल में बिना मास्क के पढ़ने पहुंचे बच्चे।
  • कई स्कूलों में बिना मास्क के दिखे बच्चे, पहले दिन जिले में संचालित 66 उच्च विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति करीब 15 से 20 प्रतिशत तक रही

कोरोना के कारण 123 दिनों से वीरान पड़े शिक्षा के मंदिर शनिवार को फिर गुलजार हुए। जहां स्कूल पहुंचे बच्चे काफी खुश नजर आ रहे थे तो वहीं, दूसरी तरफ शिक्षक-शिक्षिकाएं भी काफी उत्साहित रहे। पहले दिन जिले में संचालित 66 उच्च विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति करीब 15 से 20 प्रतिशत तक रही। कोरोना महामारी की दूसरे लहर के कारण पूरे बिहार में फिर से राज्य के सरकारी व गैर सरकारी विद्यालय बंद कर दिया गया था। जिसके बाद शनिवार को राज्य सरकार के दिशा-निर्देश के बाद सभी उच्च विद्यालय खुल गए।

जिसमें सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में बच्चे मास्क लगाकर अपने-अपने विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने का निर्देश दिया गया। प्रथम दिन जिले के इस्लामिया उच्च विद्यालय, डीएम उच्च विद्यालय, बरबीघा उच्च विद्यालय, श्रीकृष्ण उच्च विद्यालय चेवाड़ा में 20 फीसद ही बच्चे पहुंचा। इस दौरान बच्चे अपने दोस्तों के साथ मिलकर काफी खुश नज़र आ रहे थे। वहीं, तत्काल विद्यालय प्रबंधन द्वारा बच्चों को मास्क व सोशल डिस्टेंस के तहत पठन-पाठन कराया गया। विदित हो कि बीते कई माह से कोरोना के कारण विद्यालय में पठन पाठन बंद था। शनिवार को पुन: पठन-पाठन चालू से ग्रामीण इलाके के बच्चों के साथ अभिभावकों के चेहरे खिल उठे हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर को देखते हुए शिक्षा विभाग के द्वारा जारी कोविड नियम का कई विद्यालय में पालन नहीं किया गया। सोशल डिस्टेंस की जमकर धज्जियां उड़ाई गई। वहीं कई छात्र बिना मास्क के ही नजर आए।

क्लास रूम में पढ़ने को लेकर उत्साहित नजर आए विद्यार्थी
अपने साथियों से मिलने व क्लास रूम में पढ़ने को लेकर स्टूडेंट काफी उत्साहित नजर आए। शिक्षक व स्टूडेंट सभी का कहना था की क्लास रूम में पढ़ाई का जो माहौल होता है वह ऑनलाइन क्लास में नहीं हो पाता है। इस संबंध में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इस्लामियां हाई स्कूल का छात्र आयुष कुमार, आशीष कुमार व पवन कुमार ने कहा कि विद्यालय में पठन-पाठन शुरू होने से काफी अच्छा लग रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण जारी की गई लॉकडाउन के दौरान विद्यालय में पठन-पाठन कार्य स्थगित कर दिया गया था। सिर्फ ऑनलाइन क्लास कराया जा रहा था। जो पूरी तरह समझ में नहीं आ पा रहा था। लेकिन अब ऑफलाइन क्लास शुरू होने से छात्रों को काफी लाभ होगा। शिक्षक के द्वारा जो पढ़ाया जाएगा। वह पूरी तरह समझ में आ जाएगा।

कोराेना की दूसरी लहर में 5 अप्रैल से ठप थी पढ़ाई
कोरोना की दूसरी लहर में बिहार के सभी स्कूल कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थानों को 5 अप्रैल 2021 को बंद कर दिया गया था। कोरोना महामारी के कारण सरकार बच्चों को लेकर हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। संक्रमण का ग्राफ कम होने के बाद काफी सुरक्षा के साथ बच्चों को स्कूल बुलवाने का निर्णय लिया गया है। अब लगभग 123 दिनों के बाद 9 वीं और 10 वीं के निजी और सरकारी स्कूलों को खोलने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले 12 जुलाई से 10 वीं के ऊपर के सभी शिक्षण संस्थानों को कोरोना प्रोटोकॉल के साथ खोलने का आदेश दिया गया था।

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