खेती-बाड़ी:खाद की किल्लत से रबी फसल की बोआई में देरी

शेखपुराएक महीने पहले
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बंद पड़ा बिस्कोमान केंद्र। - Dainik Bhaskar
बंद पड़ा बिस्कोमान केंद्र।
  • }लाइसेंसी-गैर लाइसेंसी किसी भी दुकान पर खाद नहीं मिलने से किसानों की बढ़ी परेशानी

जिले में रबी फसल की एक बार फिर से डीएपी सहित अन्य खाद की किल्लत हो गयी है। जिसके कारण किसानों को रबी फसल की बोआई करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि रबी फसलों की बुआई का सीजन शुरू हो गया। लेकिन खेतों में नमी रहने से किसानों रबी फसल की बुआई के कार्य में विलम्ब हो रही है। वहीं, खेतो में नमी रहने से किसान बुआई के लिए खेतों को किसी प्रकार तैयार कर रहे हैं, लेकिन बुआई के लिए सबसे जरूरी डीएपी खाद नहीं मिलने से परेशान हैं। किसान विभिन्न सरकारी बिक्री केंद्रों के चक्कर लगाने के साथ ही बाजार के अन्य दुकानों का भी चक्कर लगा रहे हैं।

लेकिन उन्हें कहीं भी सफलता नहीं मिल रही है। जिससे दिनों दिन उनका संयम जवाब देने लगा है। किसानों में अब आक्रोश भी पनपने लगी है। किसानों का कहना है कि कृषि विभाग के अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी भी सुनवाई नहीं कर रहे। सरकारी केंद्र में खाद नहीं मिल रही है। हालांकि, निजी दुकानों पर भी खाद उपलब्ध है लेकिन उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वहीं, नवंबर-दिसंबर में किसान सरसों व गेहूं के अलावा आलू, गाजर सहित अनेक सब्जियों की बुआई शुरू कर देते हैं। जिसमें डीएपी खाद की सख्त जरूरत होती है। कुछ दिन पहले तक डीएपी उपलब्ध था।

हथियावां बिस्कोमान केंद्र पर यूरिया उपलब्ध

हथियावां बिस्कोमान केंद्र पर यूरिया खाद उपलब्ध है। लेकिन जिले में डीएपी खाद की किल्लत है, जो रबी फसल के लिए अति आवश्यक है। लेकिन 1 सप्ताह के अंदर दो कंपनियों के द्वारा रेक लगाया जाएगा। जिसके बाद जिले में भी सभी प्रकार की खाद उपलब्ध हो जाएंगे। जिससे किसानों को राहत प्रदान होगी।
- शिवदत्त सिन्हा, जिला कृषि पदाधिकारी, शेखपुरा।

दुकानों से खाली हाथ वापस हो रहे किसान

शेखपुरा, बरबीघा सहित विभिन्न स्थानों पर सरकारी खाद वितरण केंद्र के साथ साथ दर्ज़नो लाइसेंसी खाद की दुकानें हैं। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों भी भी छोटे-मोटे खाद की गैर लाइसेंसी दुकानें है, लेकिन किसी भी दुकान में डीएपी खाद उपलब्ध नहीं है। इससे किसान काफी परेशान हैं। निबंधित के साथ ही गैर निबंधित खाद की दुकानों का चक्कर काट प्रतिदिन किसान वापस हो रहे हैं। खेती में विलंब करने के अलावा इनके पास तत्काल में कोई उपाय नहीं है। इतना ही नहीं यूरिया भी आउट ऑफ स्टॉक हो चुका है।

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